Video : एमएसपी पर शुरू नहीं हुई मूंग खरीद, किसान कम दाम पर मंडी में बेचने को मजबूर

मंडी में हो रही बम्पर आवक, लेकिन नहीं मिल रहे पूरे भाव, सरकार ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी शुरू नहीं की

By: shyam choudhary

Published: 08 Oct 2020, 10:29 AM IST

नागौर. जिले सहित प्रदेश भर में मूंग की फसल निकलने लगी है, इसके बावजूद राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग की खरीद शुरू नहीं की है। इसके चलते किसान कम दाम पर अपनी उपज मंडी में बेचने को मजबूर हो रहे हैं। नागौर मंडी में पिछले दस दिन से मूंग की बम्पर आवक हो रही है।

गौरतलब है कि इस बार जिले में खरीफ में पांच लाख हैक्टेयर से भी अधिक क्षेत्र में मूंग की बुआई की गई। समय पर अच्छी बरसात होने से कुछ क्षेत्रों को छोडकऱ उत्पादन भी अच्छा हुआ है। खींवसर, नागौर, जायल, मूण्डवा, मेड़ता क्षेत्र में मूंग का उत्पादन प्रति बीघा डेढ़ से दो क्विंटल हो रहा है, ऐसे में किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद बंधी है, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से उनकी उम्मीदें धूमिल हो रही हैं। एक ओर राज्य सरकार केन्द्र द्वारा पारित कृषि बिलों में एमएसपी का मुद्दा उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ खुद ही प्रदेश के किसानों से एमएसपी पर समय पर मूंग नहीं खरीद रही है।

एक-दो ढेरी बिकती है ऊंचे भाव में
धारणा के किसान रामनिवास सिंवर ने बताया कि मंडी में एक-दो ढेरी के भाव साढ़े 7 से आठ हजार के बीच लगाए जाते हैं, जबकि ज्यादातर मूंग छह से सात हजार प्रति क्विंटल बिक रहा है। किसान ऊपर वाले भाव का समाचार सुनकर मंडी आ रहे हैं, लेकिन उन्हें पूरे भाव नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में सरकार को समय पर खरीद शुरू करनी चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़े।

नागौर मंडी में पिछले सात दिन में मूंग की आवक
दिन - आवक
29 सितम्बर - 1541
30 सितम्बर - 2692
01 अक्टूबर - 3169
02 अक्टूबर - 3953
03 अक्टूबर - 4054
05 अक्टूबर - 4900
06 अक्टूबर - 5139
(आवक के आंकड़े क्विंटल में)

सरकार की नीयत में खोट
मंडी में आए किसानों का कहना है कि सरकार की नीयत में ही खोट है, इसलिए देरी से खरीद शुरू की जाती है और आधी-अधूरी खरीद करके बंद कर दी जाती है, जिसके कारण छह महीने इंतजार के बाद भी उनके मूंग एमएसपी पर नहीं बिक पाते। गत वर्ष भी खरीद जनवरी में बंद कर दी, जिसके बाद किसानों को मंडी में सस्ते दाम पर मूंग बेचने पड़े। गुड़ला से आए किसान मानाराम ने बताया कि कल मंडी आया तो किसी ने बताया कि अच्छे मूंग 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल बिक रहे हैं, लेकिन आज मूंग लेकर आया तो बताया कि मूंग के भाव 7 हजार से भी नीचे है। सरकार मूंग खरीद नहीं रही है और हमारी मजबूरी है कि ट्रैक्टर व खाद-बीज वाले को रुपए चुकाने हैं।

खरीद की सीमा भी बढ़ाएं
मंगलवार को नागौर दौरे पर आईं राजसमंद सांसद दीयाकुमारी ने पत्रिका को बताया कि उन्होंने कृषि मंत्री को पत्र लिखकर इस बात की मांग की है कि प्रति किसान से मूंग खरीद की सीमा 25 क्विंटल से अधिक की जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज कम दाम पर मंडी में नहीं बेचनी पड़े। किसानों का भी कहना है कि बंटवारे नहीं होने के कारण तीन-चार भाइयों के एक ही गिरदावरी नकल जारी होती है, जिसके आधार पर मात्र 25 क्विंटल ही खरीद की जाती है, जबकि इस सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए।

पत्रिका व्यू... गत वर्ष का विरोध-प्रदर्शन नहीं भूलें जिम्मेदार
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने गत वर्ष रजिस्टर्ड सभी किसानों का मूंग खरीदने के बजाए जनवरी में ही सरकारी खरीद बंद कर दी थी, जिसके विरोध में किसानों ने मंडी के गेट पर ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया था। जिले में करीब दस टोकनधारी काश्तकार समर्थन मूल्य पर अपने मूंग की बेचने से वंचित रह गए थे। ऐसे में सरकार को समय रहते टोकन जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर मूंग खरीदने चाहिए, ताकि सभी किसान लाभान्वित हो सके।

अभी कोई दिशा-निर्देश नहीं
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद को लेकर अब तक उच्चाधिकारियों ने कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए हैं। हमने प्रस्तावित खरीद केन्द्रों की सूची मुख्यालय को भिजवाई है। निर्देश मिलने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- जयपाल गोदारा, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, नागौर

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