Nagaur:नहीं देंगे बीएसएनएल को आठ लाख...!

नागौर में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से अनुबंधित एजेंसी ने शहर के बीकानेर फाटक पर आरओबी निर्माण के दौरान निर्धारित मापदंडों को तार-तार कर दिया

By: Sharad Shukla

Published: 11 Dec 2017, 10:59 PM IST

नागौर. बीएसएनएल की ओर से बीकानेर रेलवे फाटक पर आरओबी निर्माण के लिए आप्टिकल फाइबर एवं अंडरग्राण्ड लाइन की शिफ्टिंग के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को आठ लाख का एस्टीमेट दिया गया था। प्राधिकरण की ओर से यह राशि बीएसएनएल को हस्तांतरित करनी थी। इसके बाद भी यह राशि नहीं दी गई, उल्टा प्राधिकरण से अनुबंधित एजेंसी की ओर से चल रहे कार्य के दौरान लाइन तोडकऱ विभाग को लाखों का नुकसान पहुंचा दिया। इस संबंध में विभाग की ओर से उच्च स्तर पर अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया गया है कि प्राधिकरण की मनमर्जी से जनहित की सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। बीएसएनएल अधिकारियों का मानना है कि राशि नहीं मिली तो फिर वह प्राधिकरण एवं संबंधित एजेंसी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करेंगे।
आरओबी निर्माण में बरती जा रही लापरवाही की वजह से दो विभागों के बीच तनातनी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। स्थिति इतनी खराब होने लगी है कि जिला कलक्टर को इस संबंध में अवगत कराने के साथ हस्तक्षेप किए जाने का आग्रह किया गया, लेकिन समस्या नहीं सुलझी। बीएसएनएल अधिकारियों के अनुसार तकरीबन एक साल पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की उनके साथ आरओबी निर्माण के संदर्भ में हुई आंशिक मीटिंग में तय हो गया था कि शिफ्टिंग किए जाने की राशि जमा कराई जाएगी। इसके पश्चात बीएसएनएल के इंजीनियरों के दल ने बीकानेर फाटक के पास निर्माण होने वाले स्थल का पूरा निरीक्षण करने के बाद रिपोर्ट में आठ लाख रुपए की राशि प्राधिकरण से लिए जाने की अनुशंसा की। रिपोर्ट की उच्चाधिकारियों की ओर से स्क्रीनिंग करने के बाद पूरा एस्टीमेट बनाकर प्राधिकरण को भेज दिया गया। प्राधिकरण के अधिकारियों को बता दिया गया था कि आठ लाख की राशि प्राप्त होने के बाद बीएसएनएल की ओर से शिफ्टिंग का काम तुरन्त शुरू कर दिया जाएगा। तय होने के एक साल बाद भी प्राधिकरण की ओर से न तो पूर्व में बने एस्टीमेट के आठ लाख रुपए दिए गए, और न ही विभाग से दोबारा प्राधिकरण के अधिकारियों ने संपर्क किया। अधिकारियों का कहना है कि नियमत: प्राधिकरण की ओर से राशि मिल गई होती तो स्थिति इतनी ज्यादा खराब नहीं होती। यही नहीं, प्राधिकरण से अनुबंधित एजेंसी की ओर से भी मौके पर काम करने के लिए अकुशल श्रमिकों को लगाना न केवल प्रावधानों के खिलाफ है, बल्कि समझ से परे भी रहा है। यही नहीं, इस संबंध में जिला कलक्टर को प्रकरण की गंभीरता से अवगत कराने के पश्चात भी, रोजाना मापदंडों को तार-तार किया जा रहा है। हालात यही रहे तो फिर विभाग खुद ही इसके लिए विधिक कदम उठाएगा।
यहां भी तोड़ दी केबल, मांगी क्षतिपूर्ति राशि
शहर के हनुमानबाग क्षेत्र में सीवरेज खुदाई के दौरान नगरपरिषद की ओर से अनुबंधित एजेंसी के कर्मियों की ओर से तोड़ी गई केबल की क्षतिपूर्ति राशि 42 हजार 500 की राशि अभी तक नहीं मिली है। बीएसएनएल के अधिकारियों का कहना है दूसरे विभाग इसी तरह उनकी लाइन तोड़ते रहें और जनता परेशान होती रहे। विभाग के लाखों का नुकसान होने के बाद भी क्षतिपूर्ति राशि दिलाने के एवज में प्रशासनिक जिम्मेदारों की उदासीनता से हालात अब बिगडऩे लगे हैं।
बीएसएनएल के अनुसार करीब दो दिन पूर्व ही सीवरेज की खुदाई में भी निर्धारित मापदंडों को दरकिनार करते हुए जेसीबी का प्रयोग किया गया। इसकी वजह से तीन से चार जगहों पर केबल क्षतिग्रस्त हो गई। इसको दुरुस्त करने में ही विशेषज्ञों की टीम को घंटों लग गए। इसकी वजह से न केवल लोगों के मोबाइल नेटवर्क प्रभावित हुए, बल्कि इंटरनेट भी नहीं चला। इससे विभाग का हजारों रुपए का नुकसान हो गया। इस संबंध में मौके की पूरी जांच करने के बाद संबंधित एजेंसी को क्षतिपूर्ति राशि का बिल भेजा गया था। इसकी भी जानकारी जिले के प्रशासनिक जिम्मेदारों को दी गई, लेकिन कार्रवाई कुछ भी नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि संचार सेवा बाधित होने पर न केवल लोगों के मोबाइल ठप होने पर उनमें बीएसएनएल के प्रति गलत संदेश जाता है, बल्कि परेशानी अलग से होती है। जिला दूरसंचार अधिकारी योगेश भास्कर का कहना है कि इस तरह मनमर्जी से सडक़ों एवं सार्वजनिक मार्गों का खुदाई नहीं की जा सकती है, लेकिन इस तरह से काम कर लोगों के भी मौलिक अधिकारों का उल्लंघन खुलेआम किया जा रहा है। इसकी वजह से सूचना दिए बिना ही लोगों की जनहित से जुड़ी सेवा को बाधित कर दिया जाता है।
इनका कहना है...
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को आप्टिकल फाइबर एवं अंडरग्राउण्ड केबल की शिफ्टिंग के लिए आठ लाख का एस्टीमेट बनाकर दिया गया था। पैसा दिए जाने की जगह केबल तोड़ दी।
योगेश भास्कर, जिला दूरसंचार प्रबनंधक नागौर

Sharad Shukla Reporting
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