एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी के भरोसे प्रदेश पांचवां सबसे बड़ा जिला नागौर

shuddh ke lie yuddh abhiyaan 2.0, नागौर जिले में लम्बे समय से एक ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी, सरकार ने अभियान के लिए लगा दिए दूसरे विभागों के अधिकारी, लेकिन वर्षभर कार्रवाई के लिए नहीं है पूरी टीम

By: shyam choudhary

Published: 29 Oct 2020, 01:18 PM IST

नागौर (Nagaur). एक बार फिर दीपावली के सीजन में मिठाइयों की मांग बढऩे के साथ राज्य सरकार के निर्देश पर चिकित्सा विभाग के साथ अन्य विभागों की टीम कार्रवाई के लिए मैदान में उतरी है। आमजन व उपभोक्ताओं को शुद्ध खाद्य पदार्थ मिले, इसके लिए सरकार ने 20 दिन तक धुंआधार अभियान (shuddh ke lie yuddh abhiyaan 2.0) खाद्य पदार्थों के अधिक से अधिक नमूने लेने के निर्देश भी दिए हैं। रसद विभाग, विधिक बाट-माप विज्ञान विभाग, प्रशासनिक अधिकारी व डेयरी के अधिकारी चिकित्सा विभाग की टीम के साथ होने से यह अभियान सफल भी हो जाएगा, लेकिन मिलावट का गोरखधंधा वर्ष भर होता है, इसलिए अभियान को अनवरत चलाने के लिए मजबूत टीम की आवश्यकता है, जबकि जिले में पिछले करीब पांच-छह साल से एक ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी के कंधों पर यह जिम्मेदारी डाली हुई है। हालांकि जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के दो पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक लम्बे समय से रिक्त है।
गौरतलब है कि बीकानेर, चूरू, सीकर, जयपुर, अजमेर, पाली और जोधपुर जिलों के बीच स्थित नागौर जिला जनसंख्या की दृष्टि से प्रदेश का चौथा तथा क्षेत्रफल (17,718 वर्ग किमी) की दृष्टि से पांचवां सबसे बड़ा जिला है।

इनकी भी जांच के निर्देश
प्रमुख शासन सचिव रिलीफ एण्ड डिजास्टर सिद्धार्थ ने निर्देश दिए कि अभियान shuddh ke lie yuddh abhiyaan 2.0 के दौरान जांच दलों द्वारा दुकानों पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेने के साथ-साथ पैकेजिंग फूड के रैपर पर मैन्युफेक्चुरिंग डेट की भी जांच की जाए। यदि कोई भी दुकानदार एक्पायरी डेट की किसी भी प्रकार की पैकेज्ड खाद्य सामग्री विक्रय करता पाया जाए तो उसके विरूद्ध भी जांच कर विधि सम्मत कार्रवाई की जाए। इसके साथ-साथ बाट एवं माप की भी निर्धारित मापदण्डों के मुताबिक जांच की जाए।

दिक्कत : हर जगह पहुंचना मुश्किल
जिले में मिलावटी पदार्थों की रोकथाम के लिए एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी है। इतने बड़े जिले के प्रत्येक कस्बे व गांव तक एक अधिकारी का पहुंचना संभव नहीं है। कार्रवाई के दौरान लिए जाने वाले नमूने भी जांच के लिए अजमेर लेबोरेट्री में भिजवाए जाते हैं, जहां से रिपोर्ट आने में आधा से एक महीना लग जाता है। दूसरी तरफ खाद्य सुरक्षा अधिकारी को कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी उपस्थित रहना पड़ता है।

विडम्बना : मावा, घी व तेल में मिलावट ज्यादा
मिलावटी खाद्य पदार्थों में नागौर में वर्तमान में सबसे अधिक तेल, घी एवं मावा बनाया जा रहा है। नकली माल बनाने वाले लोग मावा एवं घी को थोक के भाव से दुकानदारों को सप्लाई कर रहे हैं। दुकानदार अपने ग्राहकों को सस्ते दामों पर बेच रहे हैं। सस्ता मिलने के लालच में ग्राहक भी यह तेल, घी, मावा खरीद लेते हैं।

विशेष : दूसरे विभागों के अधिकारियों को लगाया
सरकार के निर्देशानुसार दीपावली को लेकर चलाए जा रहे शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत तहसील स्तर पर संयुक्त जांच दल गठित किया गया है। जांच दल में तहसीलदार, नायब तहसीलदार और विकास अधिकारी को टीम लीडर बनाया गया है तथा दल में खाद्य सुरक्षा अधिकारी, विधिक माप विज्ञान अधिकारी, संबंधित पुलिस थाना के उप निरीक्षक, रसद विभाग के प्रवर्तन निरीक्षक या प्रवर्तन अधिकारी तथा डेयरी के प्रतिनिधि को शामिल करने के निर्देश हैं।
हर ब्लॉक में हो एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी
मिलावट के खिलाफ सही कार्रवाई तभी हो पाएगी, जब हर ब्लॉक में एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी लगाया जाए। नागौर जिले में मात्र दो दो पद स्वीकृत हैं और उसमें भी एक रिक्त है। एक अधिकारी के भरोसे पूरे जिले की जिम्मेदारी है, जिसे जांच की कार्रवाई करनी है, उनकी कागजी कार्रवाई पूरी करके कोर्ट में पेश करना है और फिर सुनवाई के दौरान भी उपस्थित रहना है। ऐसे में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती है।
- डॉ. सुकुमार कश्यप, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, नागौर

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