एमसीएच विंग : एसीबी की जांच दो साल बाद भी अधूरी, ठेकेदार का गारंटी पीरियड हो गया पूरा

Nagaur MCH Wing: ACB investigation still incomplete after two years, contractor guarantee period completed

ढह न जाए एमसीएच विंग का भवन... जेएलएन अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड यूनिट का भवन क्षतिग्रस्त होने से लगने लगा डर, एनएचआरएम ने मरम्मत के लिए बनाया 60 लाख का प्रस्ताव

By: shyam choudhary

Updated: 16 Sep 2020, 10:46 AM IST

नागौर. जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल की मदर एंड चाइल्ड (एमसीएच) विंग के भवन निर्माण में बरती गई लापरवाही एवं किए गए भ्रष्टाचार की जांच कर रही एसीबी की फाइल एक बार फिर जयपुर जाकर अटक गई है, जबकि यहां भवन का निर्माण करने वाले ठेकेदार का गारंटी पीरियड पूरा हो चुका है। इधर, एमसीएच यूनिट का भवन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। भवन की स्थिति जर्जर होने के कारण दीवारों व छत में ‘पोती’ गई ‘रेत’ कब गिर जाए, कुछ नहीं कह सकते। ऐसे में यहां ड्यूटी करने वाले चिकित्सा स्टाफ के साथ भर्ती होने वाले मरीजों को भी डर सताने लगा है। इसको देखते हुए एनआरएचएम के एईएन ने भवन की मरम्मत कराने के लिए 60 लाख का प्रस्ताव बनाकर जयपुर भिजवाया है, ताकि बड़ा हादसा होने से पहले भवन की मरम्मत की जा सके।

दो साल पहले लिए थे निर्माण सामग्री के नमूने
करीब 14 करोड़ के भारी भरकम बजट के बावजूद एमसीएच यूनिट के भवन निर्माण में की गई गड़बड़ी की शिकायत पर तत्कालील जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम ने एसीबी के अधिकारियों को पत्र लिखा था, जिसके बाद एसीबी के तत्कालीन उपाधीक्षक जाकिर अख्तर ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ 6 सितम्बर 2018 को अस्पताल पहुंचकर निर्माण सामग्री के नमूने लिए थे। एसीबी ने भवन के भूतल सहित ऊपरी मंजिल की दीवारों एवं छतों के फर्श, बाथरूम व टायलेट्स आदि के आधा दर्जन से अधिक नमूने लिए थे।

रेत बिछाकर लगा दी टाइल्स
छत की फर्श एवं भूतल सहित अन्य मंजिलों की दीवारों पर लगी टाइल्स को लगाने के लिए ठेकेदार ने निर्धारित मापदंड की तुलना में आधी भी सीमेंट का उपयोग नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप भवन की गुणवत्ता पर शुरू से ही सवालिया निशान लग रहे हैं। हालांकि गारंटी पीरियड में ठेकेदार ने अपनी गड़बड़ी को छिपाने के लिए जगह-जगह ‘कारियां’ लगाई, लेकिन अब स्थिति ज्यादा खराब हो गई है।

पत्रिका व्यू... ठेकेदार से हो पूरी वसूली
दो साल पहले जब एसीबी ने भवन से निर्माण सामग्री के नमूने लिए थे, उस समय एनएचआरएम के अधिकारियों ने कहा था कि बिल्डिंग तीन साल के गारंटी पीरियड में है, इसलिए निर्माण में जो भी खामियां है, उसे ठेकेदार के खाते से ठीक करवा देंगे। लेकिन अब उन्हीं अधिकारियों का कहना है कि गारंटी पीरियड पूरा हो गया। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जिला कलक्टर के निर्देश के बावजूद अस्पताल प्रबंधन एवं एनएचआरएम के अधिकारियों ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करवाई। इधर, एसीबी ने भी जांच को दो साल बाद भी फाइलों में दबा रखा है। जबकि अस्पताल के भवन निर्माण में लीपापोती कर आमजन की जान से खिलवाड़ करने वाले ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाकर पूरी वसूली की जानी चाहिए, ताकि दूसरे ठेकेदार इस तरह की गड़बड़ी की हिमाकत नहीं कर सके।

रिपोर्ट जयपुर भेजी है
जेएलएन अस्पताल की एमसीएच विंग के भवन निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत पर एसीबी द्वारा लिए गए नमूनों की एक्सपर्ट से जांच कराने के बाद रिपोर्ट तैयार कर जयपुर मुख्यालय भेजी गई थी, जिसको लेकर वापस हमें कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
- रमेश मौर्य, एएसपी, एसीबी, नागौर

मरम्मत का प्रस्ताव बनाकर भेजा है
जर्जर हो चुके एमसीएच विंग के भवन की मरम्मत करने के लिए मैंने 60 लाख का प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा है। स्वीकृति मिलने पर ही मरम्मत हो पाएगी। करीब आठ-दस माह पूर्व कुछ स्थानों पर मरम्मत करवाई, उसका पैसा हमने ठेकेदार कम्पनी के खाते से काट लिया, लेकिन अब गारंटी पीरियड पूरा हो चुका है। इसलिए मरम्मत विभाग को ही करवानी पड़ेगी।
- अनिल अग्रवाल, एईएन, एनआरएचएम, नागौर

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