मकान तोडकऱ खुश हो गया प्रशासन, न गोचर खाली हुई और न बंजारों का पुनर्वास

31 अगस्त 2019 को राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने सांसद हनुमान बेनीवाल के साथ वार्ता के बाद पत्रकारों के सामने की थी पुनर्वास की घोषणा, 15 दिन में मांगें नहीं मानने पर सांसद बेनीवाल ने दी थी आंदोलन की चेतावनी

By: shyam choudhary

Published: 06 Jan 2020, 11:18 AM IST

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

नागौर. ‘सरकार ही माई-बाप है, वो जो करेगी, वही होगा। चार महीने पहले मकान बनाने के लिए जमीन व रुपए देने का आश्वासन मंत्रीजी ने दिया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला है। आप ही मदद करो साब कुछ, हमारे बच्चे खुले आसमान तले सर्दी में ठिठुर रहे हैं।’ यह पीड़ा बंजारा बस्ती के मंगला बंजारा की है, जिसका मकान चार महीने पहले ध्वस्त कर दिया था।
मंगला बंजारा ही नहीं, बस्ती में रहने वाले हर बुजुर्ग, युवा व महिला की आंखों में आंसू हैं, लेकिन उम्मीद भी है कि कोई फरिस्ता आएगा और उन्हें राहत देगा।

जी हां, हम बात कर रहे हैं ताऊसर ग्राम पंचायत की गोचर भूमि पर बसे बंजारा बस्ती के लोगों की, जिनके मकान चार महीने पहले जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश पर जमींदोज किए थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भले ही हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में बंजारों के मकान तोडकऱ उसकी वीडियोग्राफी पेश कर अपनी खाल बचा ली, लेकिन वास्तविकता यह है कि पहले से ज्यादा अतिक्रमण आज है। तोड़े गए मकानों का मलबा वहीं पड़ा है और बेघर हुए लोगों ने मलबे के पास ही तिरपाल लगाकर अस्थाई निवास बना लिए हैं और बनाते भी क्यों नहीं, सरकार के प्रतिनिधि के रूप में 31 अगस्त 2019 को नागौर आए राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने बेघर हुए लोगों को इस बात का आश्वासन दिया कि वे उनको मकान बनाने के लिए जमीन और पैसा दोनों देंगे। बंजारा इसी उम्मीद में हैं कि उन्हें सरकार 300 वर्ग गज की जमीन देगी और मकान बनाने के लिए रुपए भी देगी। इसलिए वे यहीं पर डेरा जमाए बैठे हैं।

इन मांगों पर बनी थी सहमति
31 अगस्त को नागौर सर्किट हाउस में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी व सांसद हनुमान बेनीवाल की वार्ता के बाद निम्न बातों पर सहमति बनी थी -
- पूरे प्रकरण की अजमेर संभागीय आयुक्त एलएन मीणा जांच करेंगे। जांच में दो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी
- चारागाह भूमि पर बसे अतिक्रमियों को कार्रवाई में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए न्यूनतम 300 वर्ग गज तक जमीन आवास के लिए दी जाएगी। इसके साथ घर टूटने से जो नुकसान हुआ है, उसके लिए भी नियमानुसार सहयोग दिया जाएगा। इसके साथ नागौर सांसद व यहां के विधायकों के कोष से राशि देने की बात कही गई।
- मृतक परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी, चाहे वह जेसीबी चालक फारूख हो या बंजारा समाज का महेन्द्र। मंत्री ने कहा वे व्यक्तिगत तौर पर भी मदद करेंगे।
- नागौर एसडीएम के खिलाफ जो रिपोर्ट दी गई है, उसकी तीन दिन में जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोषी होने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।
- विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच सीआईडी-सीबी के निष्पक्ष अधिकारी से करवाई जाएगी।

चार माह बाद भी जांच अधूरी
गत 11 दिसम्बर को नागौर दौरे पर आए अजमेर संभागीय आयुक्त एलएन मीणा ने पत्रिका से हुई बातचीत में बताया कि बंजारा बस्ती में अतिक्रमण हटाने के मामले की जांच अंतिम चरण में है। उन्हें तीन बिन्दुओं की जांच सौंपी गई थी, जिसमें अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस एवं प्रशासनिक स्तर पर रही कमियां तथा नागौर एसडीएम व सीओ एससी-एसटी की भूमिका की जांच शामिल है। इसको लेकर उन्होंने कलक्टर व एसपी से रिकॉर्ड लिया है तथा कई अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए हैं, जल्द ही जांच पूरी कर ली जाएगी। रविवार को पत्रिका द्वारा फिर बात करने पर संभागीय आयुक्त मीणा ने कहा कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है, जल्द ही कर देंगे।

हम कोई पाकिस्तानी नहीं है साब
बंजारा बस्ती के मनोज बंजारा ने पत्रिका के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि हमारे जीवन भर की कमाई से बने मकान प्रशासन ने तोड़ दिए। मंत्री हरीश चौधरी ने हमारी उजड़ी बस्ती में आकर कहा था कि उनका पुनर्वास करवाएंगे, मकान देंगे, अभी चार महीने हो गए, पहले बारिश और अब सर्दी में हम तिरपाल की के नीचे निवास कर रहे हैं। आंखों में आंसू लिए मनोज ने रुंधे गले से कहा - हम कोई बाहर से नहीं आए, यहीं के रहने वाले हैं, पाकिस्तान से लोग आ जाते हैं, उन्हें भी नहीं मारते, उनको भी बचाते हैं। सरकार से हाथ जोडकऱ निवेदन है कि हमें यहीं जमीन दे दो, ताकि जीवन बसर कर सकें।

सरकार ने थूक कर चाट लिया
बंजारा समाज के लोगों के पुनर्वास को लेकर हमारे साथ हुए समझौते में राज्य सरकार ने धोखा दिया है, जहां 16 बीघा जमीन देने की बात थी, वहां 8 बीघा की बात करने लगे। मुआवजे के रूप में 70 से 80 लाख विधायकों के कोष से तथा एक करोड़ सांसद कोष से देने के लिए सरकार ने सामड़ाऊ प्रकरण की तर्ज पर नियमों में बदलाव करने की बात कही थी, उस पर भी कुछ नहीं किया। पूरे प्रकरण की जांच अजमेर संभागीय आयुक्त को सौंपी, लेकिन चार महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हुई। पीडि़त परिवारों को पांच-पांच लाख रुपए देने की बात कही थी मंत्री ने, लेकिन नहीं दिए। मंत्री समझौते से मुकर गए। सरकार ने थूककर चाट लिया। हमने मांगें नहीं मानने पर आंदोलन की बात कही थी, उस समय चुनाव आने के कारण टालना पड़ा, लेकिन हम बंजारों को न्याय दिलाने के लिए नए सिरे से आंदोलन करेंगे, पूरे राजस्थान के ऐसे लोगों को जोड़ेंगे, जो बेघर हैं।
- हनुमान बेनीवाल, सांसद, नागौर

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