मिट्टी में मिल रहा है भामाशाहों का नाम

मिट्टी में मिल रहा है भामाशाहों का नाम
problem

Sandeep Pandey | Publish: Jul, 26 2019 11:46:53 AM (IST) Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

लाडनूं. समाज और शहर को देने वाले लोगों के नाम अब धुंधले होने लगे हैं। कभी करीने से लगाए गए शिलापट्ट या तो गुम हो गए या फिर धूल-मिट्टी ने भामाशाह के नाम गुम कर दिए।

दीक्षान्त हिन्दुस्तानी

लाडनूं. समाज और शहर को देने वाले लोगों के नाम अब धुंधले होने लगे हैं। कभी करीने से लगाए गए शिलापट्ट या तो गुम हो गए या फिर धूल-मिट्टी ने भामाशाह के नाम गुम कर दिए। किसी को इसकी चिंता नहीं है या फिर कोई नहीं चाहता कि भामाशाह को उनके किए गए काम के लिए याद किया जाए या फिर जस मिल सके। हर तरफ इस मुद्दे पर चुप्पी है। बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नेता हों या फिर उनके नुमाइंदे, किसी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा।

समाज व शहर के विकास के लिए अनगिनत समाज सेवियों ने अपनी जमा पूंजी को आम जनता के हित में लगाया। इसी कारण आज उनके नाम पर नगर के अस्पताल, विद्यालय व मार्गों के नाम रखे गए। बावजूद इसके आज कस्बे में बड़े बड़े भामाशाह के नाम मिट्टी में जमींदोज किए जा रहे हैं। जनता व प्रशासन दोनों की अनदेखी के चलते समाजसेवियों द्वारा करवाए गए काम के शिलापट्ट तक अब नगर में सुरक्षित नजर नहीं आ रहे हैं। स्थानीय सब्जी मंडी के समीप स्थित मांगीलाल शुभकरण कठोतिया मार्ग का 22 दिम्बर 2003 को लगे बोर्ड को हाल ही वहां किसी नेअपने निजी निर्माण को लेकर रातोंरात जेसीबी से तुड़वा कर पटक दिया है। फिर किसी ने भी उसकी सुध नहीं ली ।अगर ऐसे ही भामाशाहों के नाम मिट्टी में मिलाकर सेवा कार्यों को हतोत्साहित किया जाएंगे तो भला फिर कौन समाज सेवा के कार्यों में आगे आएंगे। यह एक ही ऐसा मामला नहीं नगर की चन्द्रसागर स्मारक रोड पर स्थित नानूराम पाटनी मार्ग का शिलालेख भी टूटा पड़ा है। कुछ समय पूर्व समाजसेवी सागरमल नाहटा द्वारा भी क्षेत्र में सैंकड़ो की सं या बैठने वाली बेंचे लगाई गयी थी किन्तु कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उन पर भी कालिख पोत दी गई।आश्चर्य की बात तो यह है कि जनता के साथ-साथ प्रशासन भी समाजसेवियों के खिलाफ उतरता नजर आ रहा है। बस स्टैंड स्थित 60 वर्ष प्राचीन नगर की धरोहर सुखदेव आश्रम के पीछे का सेठ तोलाराम गार्डन जो उस समय के नियमो व स्वीकृति के मुताबिक बना है फिर भी तहसीलदार हवासिंह वर्मा के द्वारा 3 जनवरी 2019 को नोटिस देकर इसे अतिक्रमण का हिस्सा बताया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता रघुवीर राठौड़ ने कागज पेश कर बताया कि अफसोस है कि सभी दस्तावेज हमारे पास मौजूद होने के बावजूद इस प्रकार की कोर्ट में कार्यवाही चल रही है। कुछ समय पूर्व राजकीय अस्पताल में लगी गणपत राय सरावगी की प्रतिमा तक हाल बेहाल है। इतना ही नहीं नगर में संचालित सेठ जौहरी राजकीय विद्यालय के नाम परिवर्तन करने के प्रयास को लेकर भी नगर में खासा चर्चा रही थी । वहीं पूर्व में संचालित जिनकु देवी, महावीर, जयचंद लाल भूतोडिय़ा हायर सैकण्डरी जैसी स्कूले सरकारी अंशदान के बावजूद फैल हो गई। वर्तमान में भी नगर में पुराने भामाशाह के ट्रस्टों के नाम की कुछ जमीनें जो सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए रखी गई थी उनपर भी भूमाफियों की नजर है। दानदाताओं द्वारा निर्मित प्याऊ व रेन बसेरों की भी हालत खस्ता है। दानदाताओ द्वारा निर्मित धरोहरों की देखरेख करना तो दूर बल्कि उन्हें नुकसान पहुंचाना शर्मनाक है। लाडनूं में अनेक समाजसेवियों के नाम पर गोलछा मार्ग, गंगवाल मार्ग, मुणोत मार्ग, सरावगी मार्ग, खटेड मार्ग, पांड्या मार्ग आदि है उन्हें भी धूमिल कर दिया जाएगा। जबकि पूर्व नगरपालिका अध्य्क्ष बछराज नाहटा के समय समाजसेवियों के जन सहयोग से विकास के लिए योजनाएं भी चलाई गईं।

इनका कहना है

हमारे दादा ने इस मार्ग का निर्माण आमजन की सुविधा के लिए करवाया गया, लेकिन दुख की बात है कि आज शिलापट्ट तक खंडित है
नरेंद्र पाटनी-दिगम्बर समाज प्रतिनिधि

नगर में भामाशाहों के द्वारा करवाए जनहित के कार्यों का सम्मान करना सभी का दायित्व है। प्रशासन को भी इनके संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए

राजेन्द्र खटेड-मंत्री श्वेतांबर तेरापंथी सभा

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned