शिकार व अकाल मौतों से संकट में राष्ट्रीय पक्षी

जिले में वन विभाग के रेंजर के आधे से अधिक पद रिक्त, निगरानी व गश्त के अभाव में बढ़ रहे शिकार, जिले में आए दिन हो रहे मोर, हरिण, तीतर के शिकार

By: shyam choudhary

Published: 16 May 2020, 09:14 PM IST

नागौर. जिले में राष्ट्रीय पक्षी मोरों को बचाने के लिए जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में मोर प्रजाति भी गिद्ध की तरह लुप्त होने के कगार पर आ जाएगी। पिछले तीन महीनों में जिले में हुई शिकार की घटनाओं एवं अकाल मौतों पर नजर डालें तो 200 से अधिक मोरों की मौत हो चुकी है। सबसे अधिक शिकार एवं अकाल मौत कुचेरा व गच्छीपुरा थाना इलाके में हुई है। वन विभाग के आंकड़े भी यही बता रहे हैं कि पिछले पांच सालों में जिले में मोरों की संख्या आधी से कम हो गई है।

मोरों का शिकार एवं अकाल मौत के कारण ढूंढ़े तो सबसे बड़ा कारण वन विभाग में खाली पड़े महत्वपूर्ण पद हैं, जिनके अभाव में न तो शिकारियों के खिलाफ समय पर उचित कार्रवाई हो पाती है और न ही शिकार की घटनाओं पर अंकुश लग पा रहा है। जिले में वन विभाग की स्थिति भी काफी दयनीय है, प्रथम श्रेणी रेंजर के चार पद हैं, जिनमें से मात्र दो भरे हुए हैं, जबकि दो रिक्त हैं। इसी प्रकार द्वितीय श्रेणी रेंज के 8 में से 7 पद रिक्त हैं। जिले में कुल सात रेंज हैं, जिनमें से डीडवाना, परबतसर व मेड़ता में ही रेंजर (दो प्रथम श्रेणी व एक द्वितीय श्रेणी) हैं, जबकि नागौर, जायल, लाडनूं व कुचामन में रेंजर के पद लम्बे समय से रिक्त चल रहे हैं।

गाजू की घटना खोलेगी मोरों की मौतों का राज
जिले के कुचेरा थाना क्षेत्र के गाजू गांव में हुई 12 मोरों व 2 तीतरों की मौत फिलहाल वन विभाग के लिए पहेली है, लेकिन जल्द ही इसका पता लगा लिया जाएगा। जिले में दिनों-दिन कम हो रही मोरों की संख्या को देखते हुए वन विभाग के उप वन संरक्षक ज्ञानचंद व सहायक वन संरक्षक ने गुरुवार को घटना स्थल पर पहुंचकर जानकारी जुटाई। उप वन संरक्षक ने बताया कि घटना स्थल सुरजाराम पुत्र चेतनराम कड़वासरा का खेत है, जिसके चारों तरफ मेड़बंदी की हुई है तथा आने-जाने के लिए घर के पास ही रास्ता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि शिकारी ने प्रवेश कहां से किया। अधिकारियों को मौके पर दाने भी मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए भिजवाया गया है। साथ ही मृत मोरों का पोस्टमार्टम करवाकर सैम्पल भी लिए हैं, जिनकी रिपोर्ट भी बहुत कुछ बयां करेगी।

नागौर में यूं घटी मोरों की संख्या
वर्ष - मोर
2015 - 17,955
2016 - 19,536
2017 - 19,811
2018 - 9,811
2019 - 7,666

राष्ट्रीय पक्षी मोर पर मौत का साया
जिले में आए दिन मोर, हरिण, तीतर, खरगोश आदि वन्य जीवों व पक्षियों के शिकार हो रहे हैं। मोरों को जहरीला दाना डालकर मारा जा रहा है। गुरुवार को ही कुचेरा व रोल थाना क्षेत्र में शिकार की घटनाएं सामने आई हैं। इसको लेकर मैंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर जिले में सभी रेंजर के पद भरने, उडऩदस्ता चौकी स्थापति करने तथा रात्रि गश्त करने की मांग की है।
- पद्मश्री हिम्मताराम भाम्भू, पर्यावरण प्रेमी, नागौर

पद रिक्त होने से आ रही परेशानी
जिले में रेंजर के अधिकतर पद पिछले काफी समय से रिक्त हैं। जिले में कुल सात रेंज हैं, जिनमें मात्र दो में प्रथम श्रेणी के रेंजर हैं और एक में द्वितीय श्रेणी का रेंजर है। इसके बावजूद हमारी कोशिश है कि जिले में शिकार की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
- ज्ञानचंद, उप वन संरक्षक, नागौर

shyam choudhary Reporting
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