लापरवाही ने फिर छीनी ‘जिंदगी’, जाने कब तक होंगे ये हादसे

बिजली लाइनों का काम करते पोल से गिरकर हुई मजदूर की मौत
- हादसे में फिर सामने आई ठेकेदार व डिस्कॉम की लापरवाही

By: shyam choudhary

Published: 11 Jan 2021, 10:12 PM IST

नागौर. बिजली लाइनों का काम करते हुए नागौर शहर के नया दरवाजा क्षेत्र में रविवार को एक और ‘मजदूर’ की मौत हो गई। डिस्कॉम ठेकेदार के पास काम करने वाला अलाय निवासी विकास रेगर (22) पुत्र मोहनराम रेगर रविवार दोपहर को नया दरवाजा स्थित गोशाला के पास पोल पर चढकऱ बिजली लाइन का काम कर रहा था, इस दौरान अचानक वह निचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना में एक बार फिर ठेकेदार व डिस्कॉम की लापरवाही उजागर हुई है। काम करते समय विकास ने न तो सुरक्षा बेल्ट लगा रखा था और न ही सुरक्षा के अन्य उपकरण यथा दस्ताने, अर्थिंग चैन आदि का उपयोग कर रहा था। यहां तक कि उसने जूते भी नीचे उतार रखे थे।

बिजली लाइनों का काम करते समय होने वाले हादसों को रोकने के लिए डिस्कॉम द्वारा सरकारी कर्मचारियों के साथ ठेकेदार के कार्मिकों को प्रशिक्षण देने तथा सुरक्षा उपकरणों के नाम पर भले ही ‘मोटा बजट’ खर्च किया जा रहा है, लेकिन आए दिन होने वाले हादसे जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं।
गौरतलब है कि डेढ़ साल पहले 30 जुलाई 2019 को अमरपुरा जीएसएस पर सोमणा निवासी सुरेश सोमड़वाल पुत्र रामकिशोर की करंट लगने से हुई मौत हो गई थी। वहीं 24 जुलाई 2019 को नागौर शहर के बासनी रोड पर बिजली लाइन का काम करते समय करंट लगने से एफआरटी कार्मिक अर्जुनपुरा निवासी प्रेमसुख (24) पुत्र मघाराम जाट की मौत हो गई थी, जबकि रामप्रकाश गंभीर रूप से झुलस गया था। इसके बावजूद न तो किसी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई हुई और न ही किसी अधिकारी की जिम्मदारी तय हुई। राजस्थान पत्रिका द्वारा समय-समय पर समाचार प्रकाशित कर जिम्मेदारों को जगाने का प्रयास करता रहा है।
स्थिति यह है कि कमिशनखोरी के खेल में ठेकेदार के पास काम करने वाले कार्मिक न तो तकनीकी रूप से प्रशिक्षित होते हैं और न ही उन्हें पूरे सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आए दिन हादसे हो रहे हैं। रविवार को हुए हादसे में भी प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आई है। हालांकि डिस्कॉम अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं जांच के बाद ही वास्तविकता का पता चल पाएगा।

इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं

  • नियमानुसार ठेकेदार द्वारा बिजली लाइनों का काम करवाते समय मौके पर डिस्कॉम का जेईएन या तकनीकी कर्मचारी उपस्थित रहना जरूरी है, यह हादसा हुआ तब क्यों नहीं थे?
  • बिजली लाइनों का काम करते समय मजजूद या कार्मिक को सुरक्षा उपकरणों (दस्ताने, अर्थिंग चैन, सुरक्षा बेल्ट) का उपयोग करना होता है, रविवार को विकास ने क्यों नहीं किया?
  • अधिकारियों का कहना है कि काम करते समय बिजली सप्लाई बंद थी और पास में खड़े टॉवर का करंट प्रवाहित होने से विकास नीचे गिर गया। सिर के बल गिरने से उसकी मौत हो गई। ऐसे में यदि सुरक्षा बेल्ट लगा होता तो हादसा नहीं होता। विकास जब पोल पर चढ़ा तो उसने बेल्ट क्यों नहीं लगाया?
  • पिछले पांच-छह साल में नागौर शहर सहित जिले में करीब 180 लोगों (कर्मचारी, ठेकेदार के कार्मिक एवं आमजन) की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद डिस्कॉम ने हादसों को रोकने के लिए उपाय क्यों नहीं किए?
  • ठेकेदार द्वारा अपने कार्मिकों को सुरक्षा उपकरण नहीं देने तथा कार्मिकों द्वारा सुरक्षा उपकरणों का उपयोग नहीं करने के बावजूद अधिकारी निरीक्षण के दौरान उन्हें क्यों नहीं टोकते?

मुख्य अभियंता के निर्देश ताक पर
गौरतलब है कि जिले में पिछले छह साल में करंट लगने से 180 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इतने ही पशु भी काल कवलित हुए हैं। विद्युत हादसों की रोकथाम को लेकर छह माह पहले अजमेर डिस्कॉम के मुख्य अभियंता मुरारीलाल मीणा ने निर्देश जारी कर अधिकारियों को उनकी सख्ती से पालना सुनिश्चित कराने के लिए कहा था, जिसमें एक यह भी था कि ठेकेदार द्वारा काम कराने पर मौके पर जेईएन या लाइनमैन की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी, इसके बावजूद मुख्य अभियंता के निर्देशों की पालना करने की बजाय हवा में उड़ाए जा रहे हैं।

सहायता राशि देने की बात पर माने परिजन
हादसे के बाद कोतवाली पुलिस ने शव को जेलएन अस्पताल पहुंचाया, जहां मृतक के परिजन एवं ग्रामीण एकत्र हो गए। उधर, ठेकेदार व डिस्कॉम के अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे, जहां ठेकेदार व मृतक के परिजनों के बीच समझौते का प्रयास किया गया। काफी देर बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मृतक के परिजनों को साढ़े पांच लाख रुपए का चेक व 50 हजार रुपए नकद दिए गए। इस दौरान कांग्रेस नेता अनोपचंद विश्नोई, चेनार के पूर्व सरपंच खींवसिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

विकास ही था घर में कमाने वाला
अलाय के ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार विकास ही घर में कमाने वाला था। विकास के एक भाई है, जो छोटा है। पिता दिहाड़ी मजदूर है, जो कभी कभार काम पर जाते हैं। मां पिछले काफी सालों से बीमार है। पैरों की बीमारी के कारण वह बिस्तर पर है। घर की पूरी जिम्मेदारी विकास के कंधों पर पर ही थी।

shyam choudhary Reporting
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