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ना कम्पाउण्ड ना चपरासी चिकित्सक को लगाना पड़ता झाडू-पौछा

रवीन्द्र मिश्रा
नागौर . एलोपैथी चिकित्सा पद्धति से इलाज पर केन्द्र व राज्य सरकारें सालाना अरबों रुपए का बजट जारी करती है, लेकिन आयुर्वेद, होम्योपैथी व यूनानी पैथी के नाम पर बजट जारी करने में हाथ खींच लेती है। जबकि कोरोना महामारी के दौरान यह सिद्ध हो चुका है कि कारोना के उपचार में आयुर्वेदिक व होम्योपैथी की दवाइयां काफी कारगर साबित हुई। स्थिति यह है कि न इन औषधालयों में पूरा स्टाफ है और ना ही पूरी मात्रा में दवाइयां।

नागौर

Updated: February 24, 2022 06:56:05 pm

ग्राउण्ड रिपोर्ट

- होम्योपैथी व आयुर्वेदिक औषधालयों में सिर्फ चिकित्सक कार्यरत

- पुुराना अस्पाताल परिसर में संचालित है दोनों औषधालय

- चिकित्सक तो बैठते है, लेकिन कम्पाउण्डर सहित अन्य पद खाली

- स्थिति यह है कि झाडू भी खुद चिकित्सक को लगानी पड़ती है।
ना कम्पाउण्ड ना चपरासी चिकित्सक को लगाना पड़ता झाडू-पौछा
नागौर. पुराना अस्पताल परिसर स्थित होम्योपैथी व आयुर्वेद के औषधालय ।


कई बार तो चिकित्सक अपने स्तर पर दवाइयों का इंतजाम करते हैं। नागौर में तो एक मात्र चिकित्सक औषआलय खोलकर बैठते है ना कम्पाउण्डर है और ना ही चपरासी कई बार अस्पताल परिसर में झाडू लगाने से लेकर साफ सफाई तक का काम चिकित्सक करते हैं। ऐसा नहीं की होम्योपैथी व आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीज नहीं आते, यहां रोजाना की ओपीडी 30 से 40 के करीब रहती है।
पुराना अस्पताल परिसर में संचालित है औषधालय
नागौर में केन्द्र सरकार के आयुष मंत्रालय की योजना के तहत पुराना अस्पताल परिसर में होम्योपैथी, आयुर्वेद व यूनानी पैथी के औषधालय खोलकर एक ही छत के नीचे तीनों के चिकित्सकों को बैठाकर उपचार किया जाना था। होम्योपैथी व आयुर्वेद के औषधालय तो संचालित है, लेकिन यूनानी पैथी का बजट कम पडऩे के कारण कमरे की नींव भरकर छोड़ दी गई। वर्तमान में यह औषधालय तारकिशन की दरगाह के पास किराए के भवन में चल रहा है। पुराना अस्पताल परिसर में पहले तीनों पैथी के अस्पताल व जांच केन्द्र था। लेकिन एलोपैथिक चिकित्सालय को बीकानेर रोड पर स्फिट करने के बाद से पुराना अस्पताल परिसर का कोई धनीधोरी नहीं है। कई लोगों को तो यह तक पता नहीं कि यहां होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक औषधालय भी संचालित है।
नागौर सिटी का एक मात्र सरकारी होम्योपैथिक चिकित्सालय
पुराना अस्पाताल परिसर में नागौर का एक मात्र राजकीय जिला होम्योपैथी औषधालय संचालित है। नागौर शहर का भी यह एक मात्र सरकारी होम्योपैथिक औषधालय है। जबकि शहर की जनसंख्या और विस्तार को देखते हुए दो- तीन औषधालय होना जरूरी है। पूरे जिले मेंं आठ होम्योपैथिक औषधालय है। जो नागौर, मूण्डवा, खींवसर, मेड़तासिटी, कुचेरा, डीडवाना, कुचामनसिटी, कसुम्बी व फिरवासी में है। नागौर में सबसे पहले 1980 में गांधी चौक में किराए के भवन में राजकीय होम्योपैथिक औषधालय खोला गया था। फिर यह अस्पताल वहां से बदलकर प्रतापसागर की पाल पर लाया गया। बाद में 2005 में केन्द्र सरकार की आयुष योजना के तहत पुराना अस्पाताल परिसर में अलग से बिल्ंिडग बनाकर एक ही छत के नीचे तीनों चिकित्सा पैथी के चिकित्सक बैठाए गए। लेकिन यूनानी औषधालय के लिए बजट के अभाव में कमरा नहीं बन पाया।
पद स्वीकृत पर नियुक्ति नहीं
राज्यसरकार ने होम्योपैथिक औषधालयों के लिए पद तो स्वीकृत किए हुए हैं, लेकिन नियुक्ति नहीं होने से आज हालत यह है कि चपरासी के अभाव में चिकित्सक को मरीज देखने से पहले खुद को झाडू-बुहारी करने पड़ती है। जिला होम्योपैथिक औषधालय में एक चिकित्सक, एक कम्पाउण्डर व एक परिचारक का पद स्वीकृत, लेकिन एक मात्र चिकित्सक हीं लगा हुआ है। उन्हें किसी सरकारी काम से बाहर जाने या अवकाश पर होने पर औषधालय को ताला लगाना पड़ता है। इसी तरह मूण्डवा, कुचेर, खींवसर, मेड़तासिटी में चिकित्सक कार्यरत है, जबकि डीडवाना में पद रिक्त है। कुचामन व फिरवासी के औषधालय नर्स व कम्पाउण्डर के भरोसे है।
सफाई के नाम पर प्रतिमाह 500 सौ
औषधालय मेंं सफाई के पेटे सरकार प्रतिमाह 500 रुपए का कंटीजेंसी के नाम पर बजट देती है। इसी में सफाईकर्मी का मेहताना व फिनाइल-पौछा-झाडू आदि शामिल है। अंदाजा इसी से लगाय जा सकता है कि आज के समय में 500 रुपए में सफाईकर्मी कहा मिलता है। दवाई की हालत यह है कि डिमांड के अनुसार पूरी नहीं आती है, लेकिन रूटीन में आवश्यक दवाई की आपूर्ति पूरी है। यहां आने वाले मरीजों में पेंशनर की संख्या अधिक होती है। औषधालय का समय सर्दी में सुबह 9 से 3 व गर्मियों में 8 से 2 रहता है।
भवन की हालत होने लगी खराब
देखरेख के अभाव व समय पर रंगाई-पुताई नहीं होने से नए बने भवन की भी हालत खराब होने लगी है। इस संबंध में निदेशालय को कई बार लिखा जा चुका है। लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। दीवारों से चूना उतरने लगा है। पूरा परिसर जंगल सा बना हुआ है। रात को शराबी यहां बैठे रहते हैं।
आयुर्वेद औषधालय
आयुर्वेद औषधालय में भी एक चिकित्सक व एक परिचारक का पद स्वीकृत है। लेकिन सिर्फ चिकित्सक ही कार्यरत है। परिचारक का पद रिक्त पड़ा है। मांग के अनुरूप दवाई की सप्लाई नहीं है। कुछ कम ही श्रेणी की दवाईयां उपलब्ध रहती है। बाहर की दवाई मरीजों को ज्यादा लिखनी पड़ती है। निशुल्क दवा के कारण सरकारी व पेंशनर ज्यादा आते हैं। यहां भी प्रतिदिन 25 -30 मरीजों की ओपीड़ी रहती है।
आरोग्य समिति करेगी देखरेख

सात सितम्बर 2021 को आयुर्वेदिक औषधालय की देखरेख व संचालन के लिए आरोग्य समिति का गठन किया गया है। जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सचिव के अलावा पांच सदस्य शामिल किए गए है। यह समिति एलोपैथिक अस्पतालों में गठित मेडिकल रिलीफ सोसायटी की तर्ज पर कार्य करती है। आयुर्वेद विभाग के सहायक निदेशक इसके अध्यक्ष , वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी उपाध्यक्ष व चिकित्सा अधिकारी को सचिव नियुक्त किया हुआ है। समिति के निर्णय के अनुसार अब मरीज का दस रुपए शुल्क लेकर रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इस शुल्क से एकत्रित राशि का औषधालय की आवश्यकताओं पर खर्च किया जाएगा। विकलांग, विधवा, बीपीएल व महामारी की दवाई लेने आने वाले मरीजों से रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाता है।
इनका कहना
औषधालय भवन की मरम्मत होनी चाहिए। पूरा स्टाफ लगा दिया जाए तो मरीजों को उपचार में अच्छी सुविधा मिल सकती है। प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र डिस्पेंसरी खुलनी चाहिए। एलोपैथी पर करोड़ों का बजट खर्च होता है। जबकि होम्योपैथी व आयुर्वेद की अनदेखी की जाती है।
डा, रामकिशोर लामरोड़,
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी,
जिला होम्योपैथिक औषधालय, नागौर।

- प्रत्येक आयुर्वेदिक औषधालय में एक कम्पाउण्डर, एक परिचारक व एक सफाई कर्मचारी लगाना जरूरी है। औषध आपूर्ति नियमित होती है। एक चिकित्सक के भरोसे औषधालय रहने से शिविर आदि में ड्युटी लगने पर औषधालय बंद करना पड़ता है। इससे मरीजों को परेशानी होती है। इसकी अल्टरनेट व्यवस्था होनी चाहिए।
डा. सोहनराम गेट
चिकित्साधिकारी, आयुर्वेदिक औषधालय, नागौर।

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