जिले में न सड़कें बन रही और न पुरानी की मरम्मत हो रही, क्षतिग्रस्त सड़कों से हो रहे हादसे

राज्य सरकार के पौने दो साल पूरे, लेकिन जिले को नहीं मिला कोई भी सड़क का बड़ा प्रोजेक्ट
ठेकेदारों को भी नहीं मिल रहा पुरानी स्वीकृतियों का भुगतान, क्षतिग्रस्त सड़कों पर होने लगे हादसे, बारिश के बाद स्थिति हुई बदहाल

By: shyam choudhary

Published: 21 Sep 2020, 11:05 AM IST

नागौर. शुरू से ही आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के पौने दो साल पूरे हो गए हैं, लेकिन जिले को सड़क का एक भी बड़ा प्रोजेक्ट राज्य सरकार ने नहीं दिया है। स्थिति यह है कि गांवों को जोडऩे वाली छोटी सड़कों की स्वीकृति भी गिनी चुनी जारी की जा रही है। यहां तक कि वर्षों पहले बनी सड़कों की मरम्मत भी समय पर नहीं होने से बड़े-बड़े गड्ढ़े बन गए हैं जो अब हादसे के सबब बन रहे हैं।

गौरतलब है कि पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव से पूर्व निकाली गई अंधाधुंध सड़कों की स्वीकृतियों के बाद सत्ता में आई कांग्रेस ने करीब एक साल तक नई स्वीकृतियां जारी नहीं की। इस साल के शुरुआत में कुछ स्वीकृतियां जारी की, लेकिन मार्च के अंत में कोरोना महामारी के चलते सभी कार्य ठप हो गए। पहले से आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य सरकार की कोरोना ने कमर तोड़ दी। सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार के पास बजट ही नहीं है, ऐसे में नई स्वीकृतियां निकालना मुश्किल हो रहा है। वहीं ठेकेदारों का कहना है कि उनका लम्बे समय से भुगतान अटका हुआ है। पिछले साल तो ठेकेदारों ने भुगतान के लिए पीडब्ल्यूडी कार्यालय में धरना तक दिया था।

क्षतिग्रस्त सडक़ों से हो रहे हादसे
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कई सडक़ें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। कई मरम्मत के अभाव में तो कई गारंटी पीरियड पूरा होने के चलते पूरी तरह टूटी चुकी हैं। बारिश के बाद ऐसी सडक़ों की स्थिति और अधिक खस्ताहाल हो गई हैं। जिला मुख्यालय से गुजरने वाले दोनों बाइपास की सडक़ें मूण्डवा चौराहा, महिला कॉलेज के सामने, जेएलएन अस्पताल तक जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। वहीं मूण्डवा-संखवास सडक़ का पालड़ी से संखवास तक का पूरा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, इसी प्रकार मूण्डवा-खजवाना सडक़ भी जगह-जगह से टूट चुकी है।

एनएच के काम भी वर्षों से अटके
ग्रामीण क्षेत्र के सडक़ें एवं स्टेट हाइवे की सड़कों के साथ जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजामार्ग-89 का काम पिछले पांच साल से बंद पड़ा है, जिसके चलते अजमेर-नागौर व नागौर-बीकानेर रोड पर आए दिन हादसों में लोगों की जान जा रही है। ईनाणा, मूण्डवा, भडाणा आदि गांवों में बनने वाले बाइपास व रेण में बनने वाले आरओबी का काम अधूरा होने से लोगों को टोल चुकाने के बावजूद परेशानी झेलनी पड़ रही है। मरम्मत के अभाव में यह सडक़ पूरी बनने से पहले ही कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

न सडक़ों का भुगतान हुआ और न ही सड़कों की मरम्मत का
पीडब्ल्यूडी के ठेकेदारों का भुगतान लम्बे समय से अटका हुआ है। न स्वीकृति तो दूर, पुरानी स्वीकृतियों में बनी सड़कों का भुगतान भी अटका हुआ है। नागौर पीडब्ल्यूडी एसई कार्यालय क्षेत्र हुए कामों का करीब 20 करोड़ रुपए का भुगतान तथा मरम्मत के करीब 10 करोड़ का भुगतान काफी समय से नहीं हुआ है। भुगतान के अभाव में ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है।
- भूराराम चौधरी, जिलाध्यक्ष, राजस्थान कांट्रेक्टर एसोसिएशन

प्रस्ताव भेजे हुए हैं
जिले में क्षतिग्रस्त हो चुकी सडक़ों का पुनर्निर्माण करने को लेकर प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजे हुए हैं। जिले में पिछले चार-पांच माह में कोई नई सडक़ की स्वीकृति जारी नहीं हुई है। केन्द्र से करीब तीन-चार माह पूर्व छह सडक़ों की स्वीकृति मिली थी, लेकिन उनका भी काम शुरू नहीं हो पाया है।
- सत्येन्द्रसिंह, अधीक्षण अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, नागौर

shyam choudhary Reporting
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