Video : कोविड वार्ड तो दूर, इमरजेंसी में भी बेड नहीं, कोई स्ट्रेचर पर काट रहा रात तो किसी के लिए घर से आ रही खाट

जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल में मरीजों की अधिक संख्या व संसाधनों की सीमितता के आगे का चिकित्सक व अस्पताल स्टाफ बेबस
- मरीजों को 24 से 30 घंटे तक वार्ड में नहीं मिल रहा प्रवेश, इमरजेंसी के हालात ‘नाजुक’

By: shyam choudhary

Published: 09 May 2021, 09:37 AM IST

नागौर. जिला मुख्यालय के जेएलएन राजकीय अस्पताल में कोविड मरीजों के साथ सस्पेक्ट मरीजों का भार इतना बढ़ गया है कि जिंदगी की जंग लड़ रहे मरीजों को कोविड वार्ड तो दूर, इमरजेंसी में भी बेड नहीं मिल रहा है, कोई स्ट्रेचर पर रात काट रहा है तो किसी के लिए परिजन घर से खाट ला रहे हैं। चिंता की बात यह है कि वार्ड में जगह नहीं होने के कारण कई मरीजों को 24 से 30 घंटे तक इमरजेंसी में ही रहना पड़ रहा है, इसके चलते मरीजों की मौतें भी हो रही हंै। शुक्रवार शाम को इमरजेंसी में एक वृद्ध महिला के लिए बेड की व्यवस्था नहीं होने पर परिजन घर से खाट व बिस्तर लेकर आए और उपचार शुरू करवाया।
चिकित्सा विभाग एवं जिला प्रशासन कोरोना महामारी के संकट काल में मरीजों को उचित उपचार देने के भरसक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मरीजों की अधिकता एवं संसाधनों की सीमितता के चलते जेएलएन अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ बेबस हैं।

सामान्य मरीजों के संक्रमित होने की आशंका
जेएलएन अस्पताल के इमरजेंसी में कोरोना व सस्पेक्ट मरीजों को भर्ती करने के कारण यहां आने वाले सामान्य मरीजों व घायलों के संक्रमित होने की आशंका बढ़ गई है। इमरजेंसी की स्थिति यह है कि कोविड वार्ड में जगह नहीं होने के कारण यहां भी मरीजों को बेड ही नहीं मिल रहे। यहां सेवा देने वाले चिकित्सकों का कहना है कि दोनों प्रकार के मरीज एक साथ होने से जिन्हें कोरोना नहीं है, वे भी संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन को सामान्य मरीजों के लिए अलग से ओपीडी शुरू करनी चाहिए। गौरतलब है कि जिले के डीडवाना में बांगड़ अस्पताल प्रबंधन ने सामान्य मरीजों के लिए ओपीडी की व्यवस्था बांगड़ स्कूल में कर दी है, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो गया है।

जुगाड़ तकनीक से मरीजों के बचाने का प्रयास
ऑक्सीजन के अभाव में किसी की जान नहीं जाए, इसलिए नर्सिंग स्टाफ जुगाड़ करके एक सिलेण्डर से ग्लूकोज वाले पाइप लगाकर तीन-चार मरीजों को ऑक्सीजन दे रहे हैं। शनिवार को एक महिला को बैंच पर बैठाकर ऑक्सीजन सप्लाई दी गई। स्टाफ ने बताया कि पिछले काफी दिन से यह स्थिति आम हो गई है।

इसके लिए भी हो प्रयास
जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल पर मरीजों का दबाव कम करने के लिए चिकित्सा विभाग एवं जिला प्रशासन को जिले के सीएचसी व पीएचसी स्तर के अस्पतालों में जहां, फिजिशियन है, वहां ऑक्सीजन की व्यवस्था करके कोविड के सामान्य मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि उनका स्थानीय स्तर पर ही उपचार हो सके। जेएलएन में केवल गंभीर मरीजों को ही रेफर किया जाए।

वो, कलक्टर साहब से पूछो
(जेएलएन अस्पताल के पीएमओ डॉ. शंकरलाल से पत्रिका की सीधी बात)
पत्रिका : जेएलएन अस्पताल की इमरजेंसी में कोविड व संदिग्ध मरीजों के साथ सामान्य मरीज व घायल भी आ रहे हैं?
पीएमओ : हां, वो तो आएंगे।
पत्रिका : ऐसे में सामान्य मरीजों व घायलों में संक्रमण फैलने की आशंका नहीं है क्या?
पीएमओ : क्या करें, घायलों के लिए बेड खाली कराने के लिए पुलिसकर्मी लगा रखे हैं।
पत्रिका : सामान्य मरीजों व घायलों के लिए अलग से ओपीडी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही?
पीएमओ : वो, आप कलक्टर साहब से पूछो।

जल्द ही करेंगे
जिला मुख्यालय पर सामान्य मरीजों के लिए ओपीडी की व्यवस्था अलग करने की तैयारी चल रही है। जल्द ही इसकी व्यवस्था करेंगे।
- डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, जिला कलक्टर, नागौर

shyam choudhary Reporting
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