एक नहीं, तेरह राष्ट्रीय पक्षियों को शिकारियों ने मार डाला

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By: Anuj Chhangani

Updated: 11 Jan 2019, 07:47 PM IST

नागौर. जिले के ग्राम पंचायत झाड़ीसरा के झांझोलाई ग्राम की नाडी क्षेत्र में जहरीला दाना खाने से 13 मोरों की जान चली गई,जबकि 23 का उपचार श्रीकृष्ण गोपाल गोसेवा समिति में चल रहा है। इधर घटना की जानकारी मिलने के बाद गांव में हडक़म्प मच गया। पर्यावरण प्रेमियों के साथ ग्रामीणों की मौके पर भीड़ एकत्र हो गई। जानकारी मिलने पर वन विभाग के अधिकारी भी पहुंचे। मृत मोरों को लाकर वन विभाग की नर्सरी में पशुपालन विभाग के मेडिकल बोर्ड की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया। मोरों के पेट से जांच के लिए सेंपल लेकर रख लिया गया। इसे अजमेर की प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ग्राम पंचायत झाड़ीसरा के झांझोलाई नाडी के निकट मंदिर के पास शिकारियों ने मोरों को मारने की नीयत से जहरीले दाने बिखरा रखे थे। अपराह्न में करीब तीन बजे मोर दाने की तलाश में इधर से गुजरे और खाने लगे। इसके बाद इनकी हालत बिगड़ गई। इस दौरान ग्रामीणों की नजर पड़ी तो वह भागते हुए मौके पर पहुंचे, और देखा कि दाना खा रहे मोर गिरकर वहीं तड़पने लगे। शोर मचने पर ग्रामीणें की भीड़ एकत्र हो गई। जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय वन्य अधिकारी टीकूराम वन कर्मियों के साथ पहुंचे। इस बीच वहां पर पहुंचे पीपुल फार एनीमल्स के जिलाध्यक्ष हिम्मताराम भांभू भी पहुंचे, और इस पर असंतोष जताया। इसके बाद 13 मृत मोरों को नागौर लाया गया। यहां पर पोस्टमार्टम के बाद उनको जमीन में दबा दिया गया। मेडिकल बोर्ड में डॉ. नरेन्द्र प्रकाश चौधरी, डॉ. सुरेन्द्र चौधरी, डॉ. अनिल कुमार वैष्णव आदि शामिल थे। ग्रामीणों में कैलाश गोदारा, झाड़ीसरा पूर्व उपसरपंच श्यामनाथ, मंगलनाथ, हेतराम बिश्नोई, अर्जुन, कालूराम, नत्थूराम गोदारा आदि ने वन विभाग के अधिकारियों के समक्ष इस पर असंतोष जताते हुए कार्रवाई की मांग की। अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा के जिलाध्यक्ष रमेश बिश्नोई ने भी वन विभाग पर असंतोष जताते हुए कहा कि इस संबंध में जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया जाएगा।

13 मोरों के मरने के बाद भी कार्रवाई नहीं
मोर राष्ट्रीय पक्षी होने के साथ ही पालतू नहीं होने के कारण वन विभाग के संरक्षण में थे। इसके बाद भी वन विभाग की ओर से शिकारियों के लिए रोकथाम के लिए न तो कोई कदम उठाए गए, और न ही एक साथ 13 राष्ट्रीय पक्षियों की हत्या करने वालों के खिलाफ कोई मामला दर्ज कराया गया। वन प्रेमियों का कहना है कि मोर राष्ट्रीय पक्षी होने की वजह से राष्ट्रय धरोहर के रूप में हैं। ऐेसे में इन्हें मारने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होना समझ से परे रहा है। विभागीय जानकारों का कहना है कि तत्कालीन डीएफओ वेदप्रकाश गुर्जर के जाने के बाद मोहित गुप्ता नए डीएफओ तो बने, लेकिन उनकी ओर से इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया गया। करीब तीन माह से वह ट्रेनिंग एवं अन्य कारणों से विभागीय कार्यालय में अनुपस्थित चल रहे हैं। ग्रामीणों की ओर से फोन किए जाने पर भी डीएफओ गुप्ता की ओर से न तो कॉल रिसीव की जाती है, और न ही उनको कोई जवाब मिलता है। इससे विभाग भगवान भरोसे चल रहा है।

इनका कहना है...
मृत मोरों का पोस्टमार्टम कराने के बाद जांच के लिए सेंपल लिया गया है। पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराया गया है। 23 मोरों का उपचार कराया जा रहा है।

टीकूराम, क्षेत्रीय वन्य अधिकारी नागौर

 

Anuj Chhangani Reporting
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