कागजों में ओडीएफ, हकीकत खुले में जा रहे शौच

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By: Pratap Singh Soni

Published: 03 Jan 2019, 07:32 PM IST

चौसला. शौच मुक्त करने के प्रशासन के तमाम दावे कागजों में दौड़ रहे हैं पर जमीनी हकीकत कुछ ओर ही बयां करती है। प्रशासनिक अधिकारियों ने पुख्ता जानकारी के बिना ही क्षेत्र की अधिकतर ग्राम पंचायतों को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित कर दिया है। चौसला पंचायत की बात करें तो करीब 10 प्रतिशत ग्रामीण खुले में शौच जाने को मजबूर है। इसका कारण है कि या शौचालय बने ही नहीं या फिर सिर्फ भुगतान पाने के लिए सीट रखकर फोटो खिंचवा लिया। पत्रिका द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार अकेले चौसला में करीब 30-40 घरों में अब तक शौचालय बने ही नहीं है। कस्बे के करीब 10 फीसदी लोग अभी भी यहां खुले में शौच के लिए बाहर जा रहे हैं। ये यहां की जमीनी हकीकत है। लोग श्मशान स्थल, तालाब, सडक़ों के किनारे गंदगी फैला रहे हैं। कई गरीब लोग के तो ये हाल है कि शौचालय बनाकर भुगतान लेने के चक्कर में आर्थिक स्थिति कमजोर होने से आधे-अधूरे अटके हुए है। कई घरों में केवल दीवारें ही खड़ी है तो कई घरों में दीवारें भी अधूरी पड़ी है। इन लोगों का कहना है कि रुपए के अभाव में न तो कारीगर बुला पा रहे हैं और न ही मैटेरियल ला पा रहे हैं। कुछ ग्रामीण या तो शौचालय का उपयोग करना नहीं चाहते या फिर उक्त शौचालय इतने बेहतर नहीं बन पाए जितने की उम्मीद उन्होंने की थी। ऐसे में शासन द्वारा महज लक्ष्य पूरा करने और ओडीएफ के दायरे में लाने मात्र के लिए मनमाने ढंग से शौचालय तान दिए गए है। उल्लेखनीय है कि कई ग्राम पंचायतों के शौचालयों की वास्तविक दुर्दशा भी किसी से छिपी नहीं है। कई घरों में बनाए गए शौचालयों में या तो घरेलू सामान भरे है या कंडे।

इनका कहना है
वार्ड एक में जिन लोगों के शौचालय अधूरे पड़े हैं, उन्होंने 12 हजार रुपये की राशि लेने के लिए अभी तक पंचायत में आवेदन नहीं किया है।
धर्मसिंह, सरपंच, ग्राम पंचायत चौसला

Pratap Singh Soni
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