नागौर के पशु मेले में आकर्षण का केंद्र बनी एक करोड़ तीन लाख की घोड़ी

Nagaur patrika. नागौर का सुप्रसिद्ध श्री रामदेव पशु मेला इन दिनों अपने पूरे परवान पर है मेले में बड़ी संख्या में पशुपालक व व्यापारिक शामिल हुए है। इसके साथ ही इन दिनों मेले मैं मारवाड़ी नस्ल की आई एक घोड़ी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. Nagaur patrika

Sharad Shukla

Updated: 03 Feb 2020, 12:51:04 PM (IST)

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

नागौर. नागौर का सुप्रसिद्ध श्री रामदेव पशु मेला इन दिनों अपने पूरे परवान पर है मेले में बड़ी संख्या में पशुपालक व व्यापारिक शामिल हुए है। इसके साथ ही इन दिनों मेले मैं मारवाड़ी नस्ल की आई एक घोड़ी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है घोड़ी की कीमत 1करोड़ 30 लाख बताई जा रही है। जोधपुर से गाड़ी के मालिक भैया राम ने बताया कि इस घोड़ी के परिवार सभी सदस्यों की कीमत करोड़ो में है इस घोड़ी के पिता देव घोड़ा है जोकि अभी अहमदाबाद में जिसकी कीमत करीब ढाई करोड़ की है । इसके साथ ही इसके नाना प्रभात की कीमत 1 करोड़ 31 लाख है । भैया राम ने बताया कि इस घोड़ी की उम्र करीब 36 माह है ।इस घोड़ी के पालन-पोषण में बड़ा खर्च करना पड़ता है उन्होंने बताया कि इस घोड़ी के रखवाले के पालन पोषण के लिए दो व्यक्तियों को रखा हुआ है इसके साथ ही इस घोड़ी को दिन में करीब 20 लीटर दूध पिलाया जाता है इसके साथ ही यह घोड़ी बदाम सहित अन्य खाद्य पदार्थों को खाने का शौकीन है। घोड़ी के विशेषताओं को देखते हुए बड़ी संख्या में पशु पालक व व्यापारिक इस घोड़ी को देखने के लिए आ रहे हैं।

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व्यापारी को भी मना कर दिया
भैयाराम ने बताया कि मेले में पंजाब से आए व्यापारियों ने घोड़ी की कीमत एक करोड़ 31 लाख आंकने के साथ ही इसे खरीदने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन इन्होंने मना कर दिया। भैयाराम ने कहा कि यह घोड़ी नहीं, बल्कि इनके परिवार की सदस्य है। इसे वह बिलकुल नहीं बेच सकते। यहां पर आए अन्य व्यापारियों ने भी इसकी और ज्यादा कीमत देने का प्रलोभन दिया, लेकिन घोड़ी मालिक इसको बेचने को तैयार नही है ।

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पशुओं के रंग में रंगा मेला
ऊंट, घोड़े एवं गोवंशों के कारण मेला अब पशुओं के रंग में रंगने के बाद समापन की ओर बढृ़ चला है। नागौरी बैलों के साथ ही घोड़ों एवं ऊंटों की हुई खरीद के बाद व्यापारियों को अब इनको सकुशल अपने गंतव्यों तक ले जाने की चिंता सताने लगी है। खरीदे गए पशुओं के यहां पर अलग से खेमे भी लग चुके हैं। फिलहाल इनकी देखभाल करने के लिए लगे पालकों को अब केवल रवन्ना मिलने का इंतजार है। व्यापारियों का कहना है कि रास्ते में आने वाली दिक्कतों के संदर्भ में अधिकारियों को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। अधिकारियों ने इसके लिए उन्हें आश्वस्त किया है कि वह खरीद की चिट्टी में भी इसका उल्लेख कर देंगे। उनकी ओर से पूरा प्रयास रहेगा कि पशुओं के परिवहन की राह में उनके रास्ते में गंतव्यों में पहुंचने तक कोई बाधा नहीं आए। पशुओं के घंटियों की ध्वनि से गुंजायमान रहा मेला अब सोमवार को पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। मेला का अधिकारिक विधिवत समापन जरूर हो जाएगा, लेकिन दुकानें फिलहाल लगी रहने से मैदान की रौनक बनी रहेगी। दुकानों के हटने के बाद मेला मैदान फिर से सन्नाटे में चला जाएगा।

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