मूंग की फसल में कीटों का प्रकोप

तरनाऊ (नागौर). मंूग की फसल में कीटों का प्रकोप होन से गांवों में इन दिनों किसान फसल पर कीटनाशक दवाओं के स्प्रे करते नजर आ रहे हैं। मूंगों की बुवाई से अब तक किसान करीब तीन-तीन स्प्रे कर चुके हैं पर इस साल कई प्रकार की लट के साथ ही मच्छर व अन्य कीटों पर दवाईयां कारगार नहीं हो रही है।

By: Ravindra Mishra

Published: 05 Sep 2020, 01:34 PM IST


तरनाऊ (नागौर). मंूग की फसल में कीटों का प्रकोप होन से गांवों में इन दिनों किसान फसल पर कीटनाशक दवाओं के स्प्रे करते नजर आ रहे हैं। मूंगों की बुवाई से अब तक किसान करीब तीन-तीन स्प्रे कर चुके हैं पर इस साल कई प्रकार की लट के साथ ही मच्छर व अन्य कीटों पर दवाईयां कारगार नहीं हो रही है। पत्रिका ने गांवों की स्थिति जानी तो सामने आया कि अलग-अलग रंग की लट व अन्य कीट मूंग की फसल के उत्पादन को चट कर रही है। दो महीने से अधिक बड़ी मूंग की फसलों पर अब भी फलियों की संख्या बहुत कम है।
किसान वर्ग हर पन्द्रह दिन से लट को मारने के प्रयास में स्प्रे करते है पर बाजार में मिलने वाली दवाईयां हर प्रकार की लट को मारने में कारगार नहीं हो रही है। किसान हड़मानराम,भूराराम,तेजाराम बताते है कि हर साल तो क्यूनालफोर्स व इमिमाबेक्टिन द्वारा लट का प्रकोप खत्म हो जाता है इस साल कई प्रकार की लट पर इन दवाईयों द्वारा कंट्रोल नहीं हो पा रहा है। साथ ही अन्य कीट भी मूंग की फसल पर आने वाले फूलों को खिलने नहीं दे रहे है,जिस कारण मूंग का उत्पादन भी कम होने की आशंका है। कृषि विज्ञान केन्द्र अठियासन के कृषि वैज्ञानिक डॉ.हरीराम चौधरी ने बताया कि जिले भर में सर्वे कर जांच करने पर पाया कि मूंग की फसल पर इस साल कई रंग व कई प्रकार की लट फसलों में नुकसान पहुंचा रही है। क्वानालफोर्स,इमिमाबेक्टिन,थाईमोक्सिन सहित बाजार में उपलब्ध कई दवाएं सभी कीटों को खत्म करने में कम कारगार है। क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत(वेस्टीकोर) 90 मिलीलीटर प्रति 500 लीटर पानी के साथ स्प्रे किया जाए तो लगभग सभी प्रकार की लट सहित कीटों पर कंन्ट्रोल हो सकता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि मूंग की फसल में फूलों को झडऩे से रोकने व फूलों की संख्या बढाने के लिए जिबे्रलिक एसिड या प्लेनोफिक्स डालकर काफी हद तक अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि मूंगों की बंपर पैदावार लेने के लिए किसान मिटटी की जांच करवाने के साथ ही जमीन में जरूरत के हिसाब से तत्व डालकर अच्छी तरीके से जुताई करे,वहीं अच्छी गुणवता का बीज लेकर बुवाई करे तथा समय-समय पर फसलों को जरूरत के हिसाब से दवाओं का छिङकाव करे तो अच्छा उत्पादन मिल सकता है।

Ravindra Mishra
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