scriptPak's snatched tank will be seen on the land of Nagaur | पाक का छीना टैंक नागौर की धरा पर आएगा नजर | Patrika News

पाक का छीना टैंक नागौर की धरा पर आएगा नजर

संदीप पाण्डेय

नागौर. पाक को युद्ध में पटखनी देने के बाद उससे छीना एक टैंक नागौर की धरा पर जल्द नजर आएगा। संभवतया 16 दिसंबर तक यह टैंक नकाश गेट के समक्ष रख दिया जाएगा। इसकी तैयारियां शुरू हो गई है। पुणे से यह टैंक मंगवाया जा रहा है। जंग हारने के बाद पाकिस्तान सेना का यह टैंक भारतीय शूरवीरों ने कब्जा लिया था।

नागौर

Published: November 18, 2021 10:17:12 pm

यह टैंक वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय सेना के शौर्य का गवाह है।सूत्रों के अनुसार इस टैंक को पाक सेना छोड़ भागी थी। वर्ष 1971 जंग के जानकारों की मानें तो यह पाकिस्तानी सेना का टैंक भारतीय सेना के लिए बड़ा खतरा माना जाता था। तीन से 16 दिसंबर 1971 के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच जब युद्ध हुआ तो इस टैंक की मारक क्षमता दो किलोमीटर तक थी। उस दौरान भारतीय जवानों ने पाक सेना चारों तरफ से घेर लिया और पाक के हजारों सैनिकों और उनके हथियारों को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच हुए शिमला समझौते के बाद पाकिस्तान के सैनिकों को छोड़ा गया था और उनके हथियारों को भी वापस दे दिया गया था। बावजूद इसके पाकिस्तान के कुछ टैंक भारत के पास ही रह गए थे। यह टैंक उन्हीं में से एक है।
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विजय दिवस पर दिखेगा सेना का शौर्य-नकाश गेट के सामने बने चबूतरे पर रखा जाएगा टैंक( वर्ष 1971 की लड़ाई में पाक सैनिक छोड़ भागे थे ये टैंक-चबूतरे बनने का काम शुरू
36 टन का है टैंक टी-55

सूत्र बताते हैं कि इस टैंक का वजन करीब 36 टन है। गन के साथ इसकी लंबाई करीब नौ मीटर तो इसकी चौड़ाई करीब 3.3 मीटर है। इसे नकाश गेट पर 12 फीट चौड़ा तो 22 फीट लंबे चबूतरे पर रखा जाएगा। दो फीट ऊंचा चबूतरा बनेगा। खास बात यह कि स्टेशन से यह टैंक सीधा नजर आएगा। चबूतरे की मार्किंग का काम बुधवार से शुरू हो गया। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल मुकेश कुमार शर्मा ने नागौर नगर परिषद के एईएन मकबूल को मौके पर व्यापक दिशा-निर्देश दिए। माना जाता है कि करीब तीन हफ्ते में चबूतरे का काम पूरा हो जाएगा। mपुणे से टैंक मंगाने की जिम्मेदारी नगर परिषद उठाएगा।
कलक्टर की पहल को यूं मिली रफ्तार

सूत्रों का कहना है कि कुछ समय पहले केन्द्र सरकार ने सेना के टैंक समेत अन्य हथियारों के पड़े-पड़े होते कबाड़ पर चिंता जताते हुए इनके प्रदर्शन को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना बनाई थी। इसके मुताबिक भारतीय सेना के शौर्य से आमजन तो परिचित हों साथ ही एनसीसी के अलावा सेना में भर्ती होने वाले जवानों के लिए भी प्रेरणा बनें। ऐसे में जून माह में जिला कलक्टर डॉ जितेंद्र कुमार सोनी ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल मुकेश कुमार शर्मा से कहा कि ऐसा कोई टैंक यहां कैसे और कहां रखा जा सकता है? इस पर कर्नल ने अपने कार्यकाल के दौरान बीकानेर में किए गए प्रयास के बाद स्थापित टैंक का हवाला दिया। इस पर कलक्टर ने इस पर जल्द से जल्द काम करने को कहा।
फिर बना प्रस्तावइस पर

कर्नल मुकेश कुमार ने नागौर नगर परिषद के आयुक्त श्रवणराम चौधरी के जरिए एक प्रस्ताव मंगवाया और उसे सैनिक कल्याण निदेशक जयपुर को भेजा। यहां जगह की खोजबीन शुरू हुई तो नकाश गेट की बुर्ज के सामने पड़ी खाली जगह नजर आई। परिषद के साथ परिवहन और अन्य विभाग के अधिकारियों की सहमति भी ले ली गई। अब सवाल उठा कि टैंक कौनसा आए, इस पर पाकिस्तानी सेना को छठी का दूध याद दिलाने वाले भारतीय सैनिकों के जज्बे को सर्वोपरि रखा गया। हैड क्र्वाटर से पाकिस्तानी सेना से छीने टैंक टी-55 का नाम सामने आया। इधर जगह चिन्हित हो गई और उधर टैंक मंगवाने की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली। ऐसा माना जाता है कि विजय दिवस तक यह टैंक नागौर धरा पर आमजन को भारतीय वीरता का अहसास कराने लगेगा।
सेना से सरोकार

नागौर के कई जवानों ने सेना में रहकर देश के लिए जान दी। सैकड़ों की तादात में युवा सेना भर्ती के लिए परिश्रम कर रहे हैं। सेना को लेकर लोगों में कई तरह की जिज्ञासा भी रहती है। ऐसे में नागौर में सेना से जुड़ी एक्टिविटी करवाने के प्रयास कलक्टर के साथ जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ही नहीं अनेक रिटायर सेनाकर्मी करते रहे हैं। ऐसे में एक प्लान ने नागौर की भूमि को गौरवान्वित करने वाली है। टैंक लोगों के लिए सार्वजनिक रहेगा। पर्यटकों के साथ एनसीसी कैडेट को भी इसका इतिहास बताया जाएगा।कैप्शन...पाकिस्तानी सेना से छीना ये टैंक दिखेगा नागौर के नकाश गेट पर-मार्र्किंग के काम को देखते जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मुकेश कुमार व परिषद के एईएन मकबूल।

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