रेलवे के पुल पर फूल रहा यात्रियों का दम

रवीन्द्र मिश्रा
नागौर . कोरोना संक्रमण काल के बाद शरीर की श्वसन क्रिया व सांस को लेकर हर कोई सजगता बरत रहा है। जरा सा भी सांस फूलने पर व्यक्ति के पसीने छूटने लगते हैं। वहीं नागौर जिले में रेलवे स्टेशनों पर बने पुल यात्रियों का दम फुला रहे हैं।

By: Ravindra Mishra

Published: 04 Oct 2021, 06:16 PM IST

- नागौर जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर नहीं है एस्केलेटर सीढिय़ां व लिफ्ट

- एक से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने में बुजुर्गो का चढ़ जाता है श्वास

- विकलांग व भारी सामान वाले यात्रियों को होती है परेशानी

- यात्री पटरी पार करने की निकालते हैं गली

एक नजर
नागौर स्टेशन

- 7000 यात्री प्रतिदिन आवक जावक
- 4 से 5 लाख रुपए प्रतिदिन की आय

- 47 ट्रेनों की प्रतिदिन आवक-जावक

मेड़ता रोड जंक्शन स्टेशन
- 6000 यात्री प्रतिदिन की आवक-जावक

- 70 हजार रुपए प्रतिदिन की आय
- 80 से ज्यादा मेल व सुपरफास्ट ट्रेनों का संचालनडेगाना जंक्शन स्टेशन

- 600 यात्री प्रतिदिन आवक जावक

- 80 हजार रुपए प्रतिदिन की आय
मकराना जंक्शन स्टेशन - 1000 यात्री प्रतिदिन की आवक-जावक

- 3000 रुपए प्रतिदिन की आय

उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर-बीकानेर मण्डलों के अधीन आने वाले नागौर जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर एस्केलेटर मशीन व लिफ्ट का अभाव होने के कारण यात्रियों को 21 फीट ऊंचे फुट ओवर ब्रिज की तकरीबन बीस से पच्चीस सीढियां चढकऱ और उतरकर एक प्लेटफार्म से दूसरे पर जाना पड़ता है।

इस दौरान कई बार अचानक ट्रेनों का प्लेटफार्म बदलने पर मुश्किलें और बढ़ जाती है। ऐसा नहीं कि जिले के प्रमुख स्टेशन रेलवे को यात्रीभार और आय देने में पीछे हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन में यात्री सुविधा जुटाने के नाम पर इच्छा शक्ति का अभाव बुजुर्गों व विकलांगों पर भारी पड़ रहा है। कई स्टेशनों पर तो फुट अंडर ब्रिज भी नहीं है। कई बार ऊपर-नीचे चढऩे उतरने की मशक्कत से बचने के लिए यात्री पटरियां पार कर रेलवे के नियमों की अनदेखी कर बैठते हैं।
जोधपुर रेल मंडल के अधीन नागौर-मेड़तारोड -डेगाना डीडवाना- मकराना-कुचामनसिटी-नावां सहित कई छोटे-बड़े स्टेशन आते हैं। ये स्टेशन यात्री सुविधाओं के नाम पर आज भी छोटे से गांव के स्टेशन लगते हैं। जबकि मेड़ता रोड और डेगाना तो जिले के दो प्रमुख जंक्शन है। जहां से पूरे देश के लिए ट्रेनों की आवक-जावक रहने से हजारों यात्री यहां से गुजरते हैं।

ए श्रेणी स्टेशन पर एस्केलेटर की सुविधा

नागौर स्टेशन जिला मुख्यालय होने के कारण जोधपुर मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल है। स्टेशन पर 47 ट्रेनों का ठहराव है। राजस्व व यात्री भार के हिसाब से स्टेशन ए ग्रेड में शामिल है। लेकिन ए ग्रेड स्टेशन को मिलने वाली सुविधाओं वातानुकूलित प्रतीक्षालय, रेस्तरां, सौर-आधारित ऊर्जा प्रणाली, स्वचालित एस्केलेटर, डिजिटल / एनालॉग घडिय़ां और डिजिटल सूचना बोर्ड जैसी कई सुविधाओं से महरूम है। एस्केलेटर व लिफ्ट नहीं होने से सामान्य यात्रियों के साथ बुजुर्ग व विकलांग यात्रियों को बेहद परेशानी होती है। हालांकि रेलवे ने ए श्रेणी मापदण्ड के अनुसार नागौर को एनएसजी 4, डेगाना को एनएसजी 5 व मेड़ता रोड को एनएसजी 6 की श्रेणी में रखा हुआ है। इसके तहत यात्रीभार, आय, उपयोगिता व धार्मिक स्थल के पैमाने पर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। नागौर स्टेशन पर ए ग्रेड के अनुसार सभी सुविधाएं हैं, लेकिन कागजों में।
धार्मिक स्थल नजर अंदाज

जिले में वीर तेजाजी की जन्मस्थली खरनाल, मेड़ता का मीरा बाई मंदिर, बुटाटी का चतुरदास महाराज मंदिर, मुंदियाड़ गणेश मंदिर, मेड़तारोड का फलवृद्धि पाŸवनाथ मंदिर, गोठ मांगलोद शक्ति पीठ सहित कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां देशभर से यात्रियों का आना-जाना रहता है। इनमें बुजुर्ग यात्री भी होते हैं, जिन्हें प्लेटफार्म के पुल चढऩे उतरने में दिक्कत होती है। लेकिन रेलवे धार्मिक रूप से उपयोगी होने के बावजूद किसी भी स्टेशन पर न एस्केलेटर की सुविधा दे रहा और न ही लिफ्ट की। यहां फुट अंडर ब्रिज भी नहीं है।
मेड़तारोड जोधपुर मंडल का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन

मेड़ता रोड जोधपुर मंडल का दूसरे सबसे बड़े रेलवे स्टेशन है । यहां से करीब 80 से ज्यादा सवारी, मेल एक्सप्रेस व सुपरफास्ट गाडिय़ों का आवागमन होता है। लगभग 6000 यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं। एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए दो ऊपरी पैदल पुल है, लेकिन बीमार व वृद्ध जनों को पुल से आने जाने में अत्यधिक परेशानी होती है। बुटाटी आने वाले लकवा पीडि़त यात्रियों के लिए मेड़ता रोड स्टेशन पर लिफ्ट या एस्केलेटर की सुविधा नहीं है।

डेगाना जंक्शन
डेगाना. डेगाना को सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन होने का दर्जा प्राप्त है। लेकिन सुविधाओं के नाम पर फिसड्डी है। यहां चार प्लेटफार्म है, लेकिन प्लेटफार्म बदलने के लिए एकमात्र फुट ओवरब्रिज बना हुआ है। जिसकी ऊंचाई 21 फीट के करीब है। वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांगजनों को एक से दूसरे फ्लेटफार्म या 4 नंबर फ्लेटफार्म पर जाने में परेशानी उठानी पड़ती है। जंक्शन पर एस्केलेटर या लिफ्ट की आवश्यकता है। कोरोना के बाद लगभग प्रतिदिन 600 यात्री रोजाना आते-जाते हैं। मकराना स्टेशन मकराना रेलवे प्लेटफार्म पर एक से दो पर जाने के लिए फुट ओवर ब्रिज बना हुआ है। फुट अंडरब्रिज नहीं हैं। ओवर ब्रिज की ऊंचाई 6.5 मीटर है। बुजुर्गों व विकलांगों को एस्केलेटर या लिफ्ट नहीं लगी होने से पुल चढऩे-उतरने में समस्या आती है। जबकि यहां से प्रतिदिन 1000 यात्री की आवक-जावक है। और आय भी रोजाना तीस हजार के करीब है।

डीडवाना स्टेशन
डीडवाना क्षेत्र में फ्लोराइड की अधिकता के कारण घुटनों की तकलीफ से जूझते लोगों को स्टेशन पर लिफ्ट नहीं होने की वजह से फुट ओवरब्रिज के माध्यम से प्लेटफार्म बदलने में दिक्कत आती है। वृद्धजन, दिव्यांगों, महिलाओं, बच्चों व भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यहां एस्केलेटर की महती आवश्यकता है। दोनों प्लेटफार्म पर कोच गाइडेंस सिस्टम नहीं लगा होने से यात्रियों को लम्बे प्लेटफार्म पर कोच ढूंढने व सामान को इधर उधर ले जाना मशक्कत से कम नहीं है।

इनका कहना

मेड़तारोड, डेगाना जंक्शन व नागौर स्टेशन पर एस्केलेटर या लिफ्ट लगाने के लिए कई बार मीटिंग में मुद्दा उठाया गया। यहां तक कि बुटाटीधाम आने वाले लकवा पीडि़तों व उनके परिजनों की सुविधा के लिए मानवीय पहलू अपनाते हुए रेण स्टेशन पर एस्केलेटर लगाने की कई बार मांग की गई, लेकिन रेलवे प्रबंधन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
जगबीर छाबा

सदस्य, क्षेत्रीय परामर्श समिति, उत्तर पश्चिम रेलवे
डेगाना रेलवे जंक्शन व बुटाटी सहित जिले के अन्य स्टेशनों की समस्याओं को पूरी गंभीरता से लेती हूं। यात्रियों को प्लेटफार्म बदलने, वरिष्ठ नागरिकों या दिव्यांगजनों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए एस्क्लेटर या लिफ्ट लगवाने के लिए जल्द ही प्रयास किए जाएंगे।
दीया कुमारी सांसद, राजसमंद
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नागौर, मेड़तारोड व बुटाटी स्टेशन पर एस्केलेटर सीढिय़ां आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। नागौर ए श्रेणी का स्टेशन है लेकिन सुविधा उस तरह की बिल्कुल नहीं है। स्टेशन पर एस्केलेटर लगाने के लिए रेल प्रबंधन के समक्ष कई बार मांग रखी गई है।
नृत्यगोपाल मित्तल, अध्यक्ष रेलवे ट्रेवल्स एसोसिएशन नागौर।

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जंक्शन के हिसाब से दिव्यांग व वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्लेटफार्म बदलने के लिए एक एस्क्लेटर या लिफ्ट होनी चाहिए। चार नंबर प्लेटफार्म पर कोच गाइड डिस्प्ले, मुसाफिर खाने को आधुनिक बनाने, तीन नंबर प्लेटफार्म पर टीनशेड निर्माण, हावड़ा बाड़मेर, जैसलमेर-जम्मू तवी का ठहराव डेगाना में फिर से करने की मांग है।

अशफाक खान, संयोजक, आदर्श रेल सेवा संघर्ष समिति, डेगाना
रेलवे प्लेटफार्म पर एस्केलेटर नहीं होने के कारण बुजुर्ग यात्रियों को दो नंबर प्लेटफार्म पर जाने के लिए काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। मकराना शहर के प्लेटफार्म पर रोजाना 1000 से 1200 यात्रियों का आवागमन रहता है।

नितेश जैन, पूर्व अध्यक्ष, मकराना विकास समिति

Ravindra Mishra
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