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राजस्थान में महंगे पेट्रोल-डीजल के बीच बढ़ी ई-वाहनों की रफ्तार, कम खर्च और सरकारी सब्सिडी बनी बड़ी वजह

राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग तेजी से बढ़ रही है। कम खर्च, सरकारी सब्सिडी, रोड टैक्स में छूट और आसान संचालन के कारण लोग तेजी से ई-वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे है।

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नागौर

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Anil Prajapat

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शरद शुक्ला

May 24, 2026

Electric Vehicle

Electric Vehicle (Photo-AI)

नागौर। बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दामों के बीच राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग तेजी से बढ़ रही है। कम खर्च, सरकारी सब्सिडी, रोड टैक्स में छूट और आसान संचालन के कारण लोग तेजी से ई-वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे है। यही कारण है कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में ई-वाहनों की संख्या छह गुना बढ़कर 4.92 लाख के पार पहुंच गई है। जुलाई 2023 में यह आंकड़ा करीब 1.75 लाख था।

अब शहरों से लेकर कस्बों तक ई-स्कूटर, ई-रिक्शा और ई-ऑटो आम नजर आने लगे हैं। ई-रिक्शा से रोजाना बचत राजस्थान में 70 से 80 हजार ई-रिक्शा और 6 से 8 हजार ई-ऑटो संचालित हो रहे हैं। कुल 1.37 लाख ई-तिपहिया वाहन पंजीकृत है। नागौर के ई-रिक्शा चालक सत्तार खान बताते हैं कि पहले डीजल पर प्रतिदिन लगभग 400 रुपए खर्च होते थे, अब बिजली पर करीब 80 रुपए में पूरा दिन निकल जाता है। इससे रोजाना लगभग 300 रुपए की बचत हो रही है।

ई-स्कूटर और बाइक बने पहली पसंद

परिवहन विभाग के वाहन पोर्टल के अनुसार प्रदेश में सबसे अधिक वृद्धि इलेक्ट्रिक दुपहिया वाहनों में दर्ज की गई है। वर्तमान में राजस्थान में 3.22 लाख से अधिक ई-स्कूटर और ई-बाइक पंजीकृत हैं। इनमें से करीब दो से ढाई लाख वाहन प्रतिदिन सड़कों पर संचालित हो रहे हैं। केवल जनवरी 2026 में ही 6252 नए ई-दुपहिया वाहनों की बिक्री हुई। यानी प्रतिदिन 200 से अधिक ई-वाहन बिके। विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण कम संचालन खर्च है। पेट्रोल वाहन जहां प्रतिदिन सैकड़ों रुपए का ईंधन खर्च मांगते हैं, वहीं ई-वाहन करीब 25 पैसे प्रति किलोमीटर में चल रहे हैं।

ई-कारों की रफ्तार अभी धीमी

दुपहिया और तिपहिया वाहनों की तुलना में ई-कारों की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है। सितंबर 2022 से मार्च 2026 तक प्रदेश में 8229 ई-कारें पंजीकृत हुई हैं। हालांकि सरकार इन पर 30 हजार से 1.50 लाख रुपए तक की सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। बैटरी क्षमता के अनुसार अनुदान तय किया गया है। इसके अलावा रोड टैक्स और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ है तथा राज्य जीएसटी की राशि भी वापस बैंक खातों में जमा की जा रही है।

चार्जिंग स्टेशन बढ़ने से भरोसा कायम

जयपुर, जोधपुर, कोटा और नागौर सहित कई शहरों में लगातार चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा है और लंबी दूरी की यात्रा भी आसान हो रही है। परिवहन विभाग के अनुसार नागौर जिले में भी ई-वाहनों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। जिले में कुल 6281 ई-वाहन पंजीकृत हैं। वर्ष 2025 में 2187 तथा वर्ष 2026 में अब तक 632 नए ई-वाहनों का पंजीयन हो चुका है।