बगैर तस्‍वीर जेल से फरार बंदियों को तलाश रही पुलिस

बीस महीने बाद भी जेल से फरार दो बंदी नहीं लगे पुलिस के हाथ, पोक्सो के अलग-अलग मामले में मेड़ता जेल में थे बंद

By: Rudresh Sharma

Updated: 09 Jun 2021, 08:46 AM IST

संदीप पाण्डेय @ नागौर. तकरीबन बीस महीने बाद भी जेल से फरार दो बंदी अब तक पुलिस की पकड़ में नहीं आए हैं। मेड़ता जेल से भागे ये दोनों दो अलग-अलग मामलों में पोक्सो एक्ट के तहत बंद थे। एक पर श्रीबालाजी थाने में नाबालिग से बलात्कार तो दूसरे पर मकराना थाने में किशोरी के अपहरण व बलात्कार के प्रयास का मामला दर्ज है।

इन दो विचाराधीन बंदियों का अब तक पुलिस पता नहीं लगा पाई है, उनको तलाशने के सुस्त प्रयास पर भी निशाना साधा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार श्रीबालाजी थाना क्षेत्र के मुंडासर का केसाराम (28) व डीडवाना के निम्बी कलां का अयुब खां (22) 6 अक्टूबर 2019 से फरार चल रहे हैं।

इस दिन शाम को बंदियों की संख्या के करीब एक घंटे बाद फिल्मी स्टाइल से मफलर के सहारे जेल की दीवार फांदकर भाग छूटे थे। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉ विकास पाठक के निर्देश पर जिलेभर में नाकाबंदी भी हुई पर वे हाथ नहीं आए। पाठक का तबादला हुआ फिर श्वेता धनखड़ के नेतृत्व में भी बंदी हाथ नहीं लगे या यूं कहें कि उनको तलाशने का पुलिस ने ढंग से प्रयास ही नहीं किया।

साधारण से अपराधी ही पुलिस की पकड़ से दूर हैं तो लेडी डॉन अनुराधा की गिरफ्तारी कैसे होगी। इन दोनों की फरारी का मामला मेड़ता सिटी थाने में दर्ज है। सूत्र बताते हैं कि दोनों आरोपी नागौर जिले के, केसाराम मजदूरी-खेती करने वाला तो अयुब साधारण युवक। दोनों ही एक-एक अपराध करने वाले, यानी उनकी न तो आपराधिक पृष्ठभूमि थी न ही वे इतने पैसे वाले कि दूरदराज के शहर-राज्य में जाकर अपनी फरारी काट सकें।

बावजूद इसके उनकी तलाश अब तक पूरी नहीं हो सकी। शुरुआती दौर में कुछ पुलिस वालों को इधर-उधर दौड़ाकर बैठा लिया गया। मेड़ता सिटी के पास इनकी जिम्मेदारी, मकराना, डीडवाना और श्रीबालाजी थाना पुलिस सहयोग करने वाली, फिर केसाराम और अयुब कहां गायब हो गए। दरअसल इनकी तलाश में न तो इनके परिजनों से पूछताछ की गई न जानने वालों से, बस इक्का-दुक्का बार पुलिस इनके घर-ठिकानों पर जाकर जिम्मेदारी निभा आई।


हुई दोस्ती और दोनों भाग छूटे
सूत्र बताते हैं कि केसाराम और अयुब की मेड़ता जेल में रहकर कुछ ही दिनों में गहरी दोस्ती हो गई। छह अक्टूबर 2019 की शाम को बंदियों की गिनती हुई तब तक वहीं थे। करीब साढ़े छह बजे वे बाथरूम में लगे पाइप पर मफलर के सहारे दीवार फांद गए। तब से दोनों गायब हैं। पुलिस का मानना है कि दोनों साथ-साथ ही रह रहे हैं।

फोटो तक नहीं
सूत्र बताते हैं कि जिस मेड़ता सिटी पुलिस के पास इन्हें तलाशने की जिम्मेदारी है, उसके पास दोनों आरोपियों की फोटो तक नहीं है। बस उनके नाम के आधार पर या फिर ठिकाने पर जाकर पुलिस इतिश्री कर रही है। अब तलाश में जुटा पुलिसकर्मी जरूरी तो नहीं कि वो इन्हें पहचानता हो। साथ ही वो इसी नाम राशि के किसी और युवक को तो पकड़ नहीं सकता। ऐसी ही खामियां पुलिस को छका रही है। यही नहीं असल में आरोपियों के संगी-साथी, परिचित से भी पूछताछ नहीं हो पाई न ही पुलिस ने उन्हें तलाशने इधर-उधर गई।

मामला-1
श्रीबालाजी थाना में मुण्डासर के रहने वाले केसाराम पर 16 मई 2019 को तेरह साल की बालिका से बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था। अगले दिन गिरफ्तारी फिर 18 मई को उसे न्यायिक अभिरक्षा में मेड़ता जेल भेज दिया गया था। वो पेशे से मजदूर है, अब पुलिस को उसके मां-बाप नहीं मिल रहे, अन्य परिजन कुछ बताते नहीं हैं, ऐसा पुलिस का कहना है।


मामला-2
मकराना थाना में डीडवाना निम्बी कलां के अयुब खां और उसके साथी कानसिंह पर 19 सितंबर 2019 को किशोरी के अपहरण कर बलात्कार के प्रयास का मामला दर्ज हुआ। बाद में दोनों को गिरफ्तार कर मेड़ता जेल भेजा गया। अयुब के परिजन कुछ बता नहीं रहे, कई बार पुलिस उसके जानकारों से पूछताछ कर चुकी है, ऐसा पुलिस का कहना है।


इनका कहना
पुलिस अपने स्तर पर उनको तलाश रही है। उनके ठिकानों के बारे में परिजन-जानकार कुछ बता नहीं रहे। आरोपियों की फोटो की जरुरत नहीं, वो तो नाम-ठिकाने से ही पकड़ में आ जाएंगे। कोरोना के चलते भी इस काम में थोड़ा रुकावट आ रही है।
- नरपत सिंह, सीआई मेड़तासिटी थाना, नागौर

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