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स्कूल जांचने में भी जिम्मेदारों को आया जोर, डेढ़ दर्जन को नोटिस, सुस्त काम पर मचा शोर

संदीप पाण्डेय

नागौर. सरकारी स्कूलों की दशा बदलने की ‘मनोदशा’ ही दुर्दशा का शिकार हो गई है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का स्कूली इंतजाम देखने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही ‘फेल’ साबित हो रहे हैं। दिसंबर माह में इन जिम्मेदारों ने ही अपना काम पूरा नहीं किया। आलम यह रहा कि सरकारी स्कूलों के निरीक्षण-शाला संबलन अभियान में नागौर प्रदेश में पंद्रहवे नंबर पर रहा। कई अधिकारियों की लक्ष्य प्राप्ति तो जीरो फीसदी ही रही।

नागौर

Published: January 10, 2022 10:07:48 pm

काम में लापरवाही बरतने वाले जिले के करीब डेढ़ दर्जन जिम्मेदारों को नोटिस जारी कर पांच दिन में जवाब मांगा है। साथ ही चेताया कि अगली बार टारगेट पूरा नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर के निदेशक काना राम ने आदेश में कहा कि शिक्षा की स्थिति का आकलन करने के लिए स्कूलों के निरीक्षण और उसमें आवश्यक सुधार किया जाता है। स्कूल में पाई खामियों को दूर कर बच्चों को ऐसा माहौल दें ताकि किसी तरह की शिकायत न हो। इसके लिए शाला संबलन मोबाइल एप के जरिए संभाग/ जिला/ ब्लॉक/ पीईईओ/ सीआरसीएफ स्तर के कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों को मासिक लक्ष्य दिया जाता है। दिसंबर में करीब डेढ़ दर्जन अधिकारियों के मासिक लक्ष्य की प्राप्ति अत्यंत न्यून/शून्य रही जो दर्शाता है कि कामकाज के प्रति वे घोर लापरवाह हैं। निदेशक ने आदेश में कहा कि पांच दिन में नोटिस का जवाब नहीं मिलने और आगामी प्रगति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर विभागीय कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
करीब डेढ़ दर्जन जिम्मेदारों को नोटिस
इनमें से चार अधिकारी तो ऐसे हैं जिनके खाते में जीरो है। मतलब कि उन्हें जितने विद्यालय अवलोकन का लक्ष्य मिला था, उनमें से एक पर भी वो नहीं पहुंचे।
नागौर 15वे तो बीकानेर अंतिम..

सूत्रों के मुताबिक पूरे राज्य में प्रतापगढ़ पहले नंबर पर रहा। उसने 272 स्कूलों के टारगेट में से 230 को पूरा कर करीब 84 फीसदी कामयाबी हासिल की। नागौर जिले पंद्रहवे स्थान पर रहा, 980 में से 613 का ही लक्ष्य पूरा हुआ, जिसका प्रतिशत 62.6 रहा। राज्य की राजधानी जयपुर 1507 में से 804 स्कूलों के अवलोकन का लक्ष्य पूरा कर 25वे स्थान पर रहा तो बीकानेर अंतिम पायदान पर रहा। बीकानेर जिले में 774 लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 327 स्कूलों का अवलोकन हो पाया, जो मात्र 42 फीसदी रहा। झालावाड़ दूसरे, डूंगरपुर तीसरे तो बूंदी जिला चौथे और कोटा पांचवे स्थान पर रहा। पाली, अलवर, उदयपुर और सिरोही निचले पायदान पर रहे।
18 में से चार तो जीरो

सूत्रों का कहना है कि जिले में शिक्षा विभाग से विभिन्न ब्लॉक/पद के उन 18 अधिकारियों को नोटिस मिला है जिन्होंने लक्ष्य का पचास फीसदी से कम अर्जि किया है। इनमें से चार अधिकारी तो ऐसे हैं जिनके खाते में जीरो है। मतलब कि उन्हें जितने विद्यालय अवलोकन का लक्ष्य मिला था, उनमें से एक पर भी वो नहीं पहुंचे। जायल के पृथ्वीराज भादू को 15, कुचामन के दिनेश सिंह, रियां के रघुनाथ देवल और लाडनूं के रामनिवास गोटिया को 12-12 विद्यालय का लक्ष्य दिया था। मजे की बात देखिए इन्होंने एक स्कूल तक जाना भी मुनासिब नहीं समझा। डीडवाना के शिवराम चौधरी, लाडनूं के अब्दुल हमीद, परबतसर के महावीर प्रसाद और मूण्डवा के नरसिंह राम ने 15-15 में से सिर्फ दो-दो स्कूलों में निरीक्षण कर 13 फीसदी लक्ष्य पूरा किया। कुचामन के प्रेमसिंह चौधरी ने बीस, डीडवाना के अर्जुनराम डूकिया ने 33, खींवसर के मेघाराम चौधरी ने 26, लाडनूं के सुरेश कुमार महरिया ने 16, मौलासर के मुंशी खान ने 33, मकराना के दीपाराम ने 47, समसा के शिव नारायण ने 45, मूण्डवा के नरसिंह राम पिण्डेल ने 40 और रियां के सुरेश चंद्र वैष्णव ने मात्र 16 फीसदी लक्ष्य प्राप्त किया।
बार-बार चेताया फिर भी...

कार्यक्रम सितंबर से शुरू हुआ। इसका उद्देश्य है कि स्कूल की खामियां ही नहीं बताएं, सुधार के उपाय भी साझा करें। इसके लिए अलग-अलग श्रेणी में टारगेट दिया जाता है। अक्टूबर-नवंबर में भी कई अधिकारियों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही थी। मुख्य शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को भी कई बार चेताया कि टारगेट पूरा करें, लेकिन हालत जस की तस। उधर, इसके पीछे भी कई कारण आए हैं, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के पास करीब एक साल से गाड़ी नहीं है। इस वजह से वो बच रहे हैं, वहीं कई अधिकारी इसे आवश्यक ही नहीं मान रहे। बहरहाल स्कूल की दशा सुधारने के इस सरकारी प्लान की हालत खराब है। जिले में करीब तीन हजार सरकारी स्कूले हैं। कुछ अधिकारियों ने लक्ष्य से भी ज्यादा काम किया।
इनका कहना

स्कूल अवलोकन के टारगेट पूरा नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस मिले हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूल की खामियों के साथ उसे आगे बढ़ाने के उपाय खोजना है।
-राजेंद्र प्रसाद शर्मा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी नागौर

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