हल्की बरसात में फसलों को मिली संजीवनी

हल्की बरसात में फसलों को मिली संजीवनी

Sharad Shukla | Publish: Sep, 11 2018 12:03:40 PM (IST) | Updated: Sep, 11 2018 12:03:41 PM (IST) Nagaur, Rajasthan, India

जिले में दो से तीन दिनों के अंतराल में हुई हुई बारिश एवं बूंदाबांदी की वजह से खेतों में मुर्झाते पौधों की स्थिति बदली, कुचेरा, मूण्डवा, डेगाना एवं परबतसर आदि में फसलों को जीवनदान

नागौर. जिले में विभिन्न स्थानों पर हुई बूंदाबांदी एवं हल्की बरसात से खरीफ की फसलों को संजीवनी मिली है। विशेषकर मूंग, ज्वार एवं बाजरा आदि की उपज मुरझाती पौध को पानी से स्थिति बेहतर हुई है। कृषि विभाग के अनुसार बारिश एक-दो बारिश और हो जाती है तो फिर उपज की स्थिति और अच्छी हो सकती है। पूरे अगस्त माह के खाली जाने के बाद सितंबर में हुई छिटपुट बारिश ने खेतों में लहलहाती फसलों को ताकत दे दी है। विगत दो से तीन दिनों में मूण्डवा, कुचेरा, डेगाना एवं परबतसर आदि क्षेत्रों में हुई बरसात ने खेतों में खड़ी फसलों के सूखते पौधों की आंशिक प्यास बुझाई है। इसका परिणाम भी नजर आने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात नहीं होने की स्थिति में हालात बेहद ही खराब हो जाते, लेकिन देर से सही वर्षा होने के कारण अब फिर से उपज की स्थिति बेहतर होती नजर आने लगी है। बदले मौसम में मूंग के काश्तकारों के चेहरों पर उत्साह नजर आने लगा है। समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल की दर बढऩे के कारण काश्तकारों ने मूंग की बुवाई इस वर्ष गत साल की अपेक्षा ज्यादा कर दी। अब तक बारिश नहीं होने के कारण पीली पड़ती पौधों को बारिश की बूंद मिली तो वह फिर से लहलहाने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस माह के अंत में भी बारिश बेहतर हुई तो फिर काश्तकारों को इसका फायदा रबी की बुवाई में भी बेहतर तरीके से मिल सकेगा।
जिले में बुवाई के आंकड़ों पर एक नजर
फसल बुवाई
बाजरा 339478
ज्वार 32085
मूंग 399780
मोठ 58580
चौला 7283
मूंगफली 14541
तिल 4375
कपास 35958
ग्वार 105878
सब्जियां 435
हरा चारा 4685
अन्य 2046
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नमी एवं बदलते वातावरण से होने वाले प्रभावों के कारण रोगों की रोकथाम के लिए भी सहायक कृषि अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए जा चुके हैं। इनसे स्पष्ट कहा गया है कि किसान सेवा केन्द्रों में वह नियमित रूप से बैठने के साथ ही गांवों में जाकर खेतों की स्थिति पर काश्तकारों से चर्चा भी करें। स्थानीय स्तर पर उपज से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्याओं में रोग आदि उन्हें पर बचाव के उपाय भी बताएं।
इनका कहना
&जिले में दो से तीन दिनों में हुई हल्की एवं आंशिक बरसात से खेतों में फसलों की स्थिति पहले से काफी बेहतर हुई है। एक-दो बारिश होने पर उपज का उत्पादन और बेहतर हो सकेगा।
हरजीराम चौधरी, उपनिदेशक कृषि विभाग नागौर

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