scriptSettled houses are breaking up in search of new shelter, more married | नया आशियाना तलाशने में टूट रहे हैं बसे-बसाए घर, पांच साल में 244 लापता बालिग में ज्यादा शादीशुदा | Patrika News

नया आशियाना तलाशने में टूट रहे हैं बसे-बसाए घर, पांच साल में 244 लापता बालिग में ज्यादा शादीशुदा

संदीप पाण्डेय नागौर. खुद का घर छोडऩे वाले महिला-पुरुषों की संया में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। अकेली विवाहिताएं ही नहीं शादीशुदा मर्द भी प्यार की पींगे बढ़ाकर ‘लापता’ की फेहरिस्त में दर्ज किए जा रहे हैं। पिछले पांच साल में अविवाहित प्रेमी-प्रेमिका ही नहीं बसे-बसाए घर को ‘गुड-बाय’ कहने वाले ‘विवाहितों’ की तलाश पूरी नहीं हो पा रही। बालिगों को ढूंढने में पुलिस ‘नाबालिग’ साबित हो रही है। पिछले पांच साल में 2691 बालिगों की गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें से 244 अब तक लापता हैं। इनमें सवा सौ युवतियां बताई ज

नागौर

Published: February 20, 2022 09:49:57 pm


- नाबालिग बने समझदार, घर से निकलने के बाद कुछ ही समय में लौट आते हैं-पांच साल में सिर्फ पांच नाबालिग ही नहीं मिल पाए, युवतियां/विवाहिताएं घर छोडऩे में आगे

सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों डीडवाना में गुमशुदा महिला को तलाशने में लापरवाही के चलते थाना प्रभारी समेत एक कांस्टेबल को निलंबित किया गया है। असल में पहले उसकी रिपोर्ट दर्ज करने और फिर नामजद आरोपियों अथवा ठिकाने पर दबिश डालने में पुलिस बचती रही। घर से नाराज होकर भाग जाने वालों में कुछ युवक-युवती वो भी शामिल हैं जो कुछ दिनों बाद खुद ही घर लौट आए। कोरोना काल के लगभग दो साल में भी बालिगों की गुमशुदगी के मामले भी कम नहीं हो पाए।पांच साल का हालसूत्रों का कहना है कि वर्ष 2017 में 341 बालिग गुम हुए जिनमें 19 अब तक नहीं मिले। वर्ष 2018 में 447 में से 35, वर्ष 2019 में 516 में से 40, वर्ष 2020 में 455 में से 45 और वर्ष 2021 में 597 में से 105 की तलाश अभी शेष है। यानी कुल 2691 में से 244 गुमशुदा बालिग अभी तक पुलिस की पकड़/नजर से दूर हैं। नाबालिग गुमशुदगी के मामले में रिकॉर्ड काफी बेहतर है। वर्ष 2017 में 51 नाबालिग गुम हुए जिनमें सिर्फ दो ही अब तक नहीं मिले। वर्ष 2018 में 120 तो वर्ष 2019 में 130 नाबालिग लापता हुए जो सभी तलाश लिए गए। वर्ष 2020 में 107 में से एक और वर्ष 2021 में 134 में से दो की तलाश अभी शेष है। यानी कुल 535 में से सिर्फ पांच बच्चे ही नहीं मिले, यहां 99 फीसदी से भी अधिक गुमशुदगी निस्तारित हो गई। तत्कालीन प्रभारी विमला चौधरी, हैड कांस्टेबल बंशीलाल, कांस्टेबल रहे मुकेश विश्नोई समेत अन्य की टीम ने बेहतर काम किया।
घर से भागने में बालिगों की संया में बढ़ोत्तरी तो घर वापसी की मुश्किलें खूब
दस फीसदी नहीं लौटे घर, न पुलिस ढूंढ पाई न परिजन, इनमें अधिकांश शादी-शुदा
केवल एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लंबित

सूत्रों का कहना है कि पिछले पांच साल में हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं के करीब 75 मामले सामने आए। इनमें सिर्फ एक याचिका ही लंबित है, मेड़ता की बालिग युवती का यह मामला है। वर्ष 2017 में 7 बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में से सिर्फ एक लंबित है। इसके बाद वर्ष 2018 में 18, वर्ष 2019 और 2020 में 17-17 और वर्ष 2021 में 19 याचिका थीं जो सभी निस्तारित हो चुकी हैं। पिछले पांच साल में मानव तस्करी वाले पांच बच्चों को मुक्त कराया गया जबकि इन मामलों में सात गिरतारी हुई। इस दौरान बाल मजदूरी के 159 मामले पकड़े गए जिनमें 208 बाल श्रमिक मुक्त कराए गए,

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