चप्पे-चप्पे पर अभियान की अलख जगाकर फैलाई सुकून की खुशबू

पत्रिका स्थापना दिवस विशेष

By: Sandeep Pandey

Published: 07 Mar 2020, 11:50 AM IST

नागौर. राजस्थान पत्रिका खबरों से तो रूबरू कराता ही है, आमजन का हाथ थाम कर नई मंजिल-नई दिशा भी तय करता है। जागरुकता के साथ कुरीतियां दूर करने की बात हो या अभियान के जरिए अवैध कार्य को रोकने का जिम्मा, बखूबी निभाया। शायद यही वजह है कि पत्रिका से आज घर-घर जुड़ा है, उसे अपने परिवार का हिस्सा माना है। नागौर में आमजन की दुविधा को दूर करने के साथ शहर-गांव के विकास करने/करवाने में पीछे नहीं रहा। तालाब/बावड़ी के सौंदर्यकरण हो या गरीब बच्चों के लिए स्कूल खुलवाने का काम। शराबबंदी के खिलाफ मुहिम हो या फिर किसानों की परेशानी को दूर करने की, हर में पाठक/आमजन के साथ अपनी महत्ती भूमिका निभाई। इसका असर यह हुआ कि लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।

नागौर में चार कच्ची बस्ती का सर्वे कर जिला कलक्टर समेत यहां के भामाशाहों को जगाकर बताया कि गरीब बच्चे शिक्षा से महरूम हैं। इसके बाद पत्रिका के रिपोर्टर ने कुछ दिन बच्चों को पढ़ाया। सरकारी स्तर पर परेशानियां आईं पर बार-बार पत्रिका के प्रयास से बिल्डिंग मिली, शारदा बाल निकेतन के शिक्षक बच्चे पढ़ा रहे हैं। बच्चों के चेहरे चमक रहे हैं। शिक्षा की यह नई इबारत यहां लिखी गई। नागौर के मूण्डवा कस्बे का ऐतिहासिक लाखोलाव तालाब का अंगोर जब अतिक्रमण की भेंट चढऩे लगा। पत्रिका ने अभियान के तहत कस्बेवासियों को जोडऩे के लिए टॉक शो आयोजित करवाए। जगह-जगह पोस्टर एवं बैनर लगाए गए। लोगों से लाखोलाव तालाब के संरक्षण में सहयोग देने की अपील की गई। नगर पालिका ने श्रमदान में 7 जेसीबी व 20 ट्रेक्टर लगाए। सैकड़ों लोगों ने श्रमदान कर पत्रिका की कोशिश को सफल बनाया।

बदली जड़ा तालाब की तस्वीर

नागौर. नागौर शहर के ऐतिहासिक जड़ा तालाब की बदहाल स्थिति को देखते हुए 14 मई 2015 को राजस्थान पत्रिका की ओर से अभियान शुरू कर तालाब में श्रमदान कार्य शुरू किया गया। धीरे-धीरे पूरा शहर इस अभियान से जुड़ा और तत्कालीन मंत्री युनुस खान व केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी ने तालाब का निरीक्षण किया। इसी बीच 29 अक्टूबर 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने तालाब का निरीक्षण कर हेरिटेज लुक देने के लिए जयपुर से आर्किटेक्ट भेजे, जिनकी रिपोर्ट पर अमृत मिशन योजना में एक करोड़ 10 लाख रुपए स्वीकृत किए तथा पुरातत्व विभाग द्वारा एक करोड़ 25 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया। करीब पांच साल बाद जड़ा तालाब की तस्वीर बदल चुकी है। यहां आधुनिक सिटी पार्क विकसित हो चुका है और पुरातत्व विभाग का कार्य भी अंतिम चरण में है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागौर के कुचामन सिटी की एक बावड़ी में हुए काय पर ट्वीट किया। इस बावड़ी पर पत्रिका ने भी खबरें प्रकाशित की थी। इसके निए अभियान चलाने का एक मात्र मुख्य उद्देश्य यह रहा कि जिस तरह से म्यूजियम में एतिहासिक वस्तुओं को सजा कर रखा गया है ताकि हम लोगों इतिहास को जानते रहे। पत्रिका ने भी धरती के इन अनमोल धरोहरों को भी धरती का म्यूजियम मानते हुए बावड़ी जैसे जल स्त्रोत पर फोकस किया। भले ही इन बावडिय़ों में पीने योग्य पानी नहीं रहे। लेकिन इनकी बनावट, इतिहास की कलाकारी को दर्शाती है। नागौर शहर में सात तालाब हैं और सातों ही उपेक्षा के शिकार होने से बदहाल थे।

इनकी दशा सुधारने का अभियान 14 मई 2015 को शुरू किया।अभियान के तहत सबसे पहले जनसहयोग से श्रमदान के माध्यम से तालाब की सफाई का कार्य शुरू किया। दानदाता के सहयोग से तालाब की खुदाई का काम शुरू करवाया, जिसमें करीब 25 लाख रुपए का खर्चा आया। इस बीच तालाब में होने वाले गंदे पानी की निकासी भी बंद करवाई। तालाब की खुदाई होने से न केवल गंदगी साफा हुई है, बल्कि तालाब में उगे कमल एवं बबूल की झाडिय़ां भी साफ हो गई। खुदाई के बाद बारिश होने से तालाब में वर्षों बाद साफ पानी भरा है, हालांकि शहर में नहर का पानी आने के कारण लोग पीने के लिए उपयोग नहीं ले रहे, लेकिन शहर के सात तालाबों में जड़ा तालाब आज सबसे साफ है।

तालाब के आसपास सौंदर्यकरण का काम शुरू हो चुका है। तालाब में नौकायन शुरू करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। पत्रिका के अभियान के बाद लोगों का जुड़ाव एवं अभियान की सार्थकता को देखते हुए नागौर के तत्कालीन कलक्टर राजन विशाल ने सार्वजनिक निर्माण विभाग एवं नगर परिषद अभियंताओं से तालाब एवं कैचमेंट एरिया का ले-आउट प्लान तैयार करवाया। आज जड़ा तालाब समेत अन्य तालाब सुंदर हो गए हैं।

यही नहीं नागौर जिले के किसानों की फसल बीमा योजना में चल रही धोखाधड़ी के खिलाफ जो खबरों का सिलसिला शुरू हुआ। सरकार तक हिल गई, बाद में सरकारी स्तर पर किसानों को इसका लाभ पहुंचा। शराबबंदी अभियान के जरिए नागौर जिले के करीब दो दर्जन गांवों ने शराब पीने-बेचने का बहिष्कार किया, प्रतिबंध लगाया। बड़ी खाटू समेत कई जगह के गरीब/लाचार/बीमार लोगों की मदद करवाई। स्वास्थ, शिक्षा, पेयजल के साथ आम जरूरतों के लिए पत्रिका ने खुद को लोगों के साथ हमेशा रखा। महिला सहित युवाओं के अधिकार की अलख जगाई। यही वजह है कि पत्रिका यहां हर दिल पर राज करता है।

Sandeep Pandey Desk
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