मौत का जल्द नम्बर आने वालों की कतार में खड़े हैं सिलिकोसिस मरीज

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By: Anuj Chhangani

Updated: 10 Jan 2019, 11:41 PM IST

बड़ी खाटू. कस्बे में खनन क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर सिलिकोसिस बीमारी की चपेट में आकर दुनिया से कूच कर रहे हैं। जिंदगी के बचे दिन काट रहे हैं। सिलिकोसिस पीडि़त छगनलाल मेघवाल ने बताया कि मेहनत की कमाई के सिवा कोई सहारा नहीं था। शिक्षा पाने के लिए परिवार सक्षम नहीं थे। लालच में आकर सुबह से शाम तक खनन क्षेत्र में पत्थरों से इस तरह मुकाबला करते कि जैसे कोई पत्थर से लड़ाई लड़ रहा है। देर शाम तक कीमती पत्थर निकालकर ठेकदार जो रकम देते तब खुश तो होते पर हमें क्या मालूम था कि एक समय मौत की वजह भी यही बनेगा। फि लहाल बड़ी खाटू सहित कई गांवो के खान मजदूर जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चिकित्सक बताते हैं की सिलिकोसिस बीमारी लाइलाज बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है। नागौर जिले में अब तक लगभग 1400 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है जिसमें मरने वालों की संख्या अब तक 82 हो चुकी है।

केस-1
छगनलाल मेघवाल (60) ने खनन क्षेत्र में तीस वर्ष काम किया फिर सिलिकोसिस बीमारी की चपेट में आ गए । पिछले दस वर्ष से मौत से लड़ाई लड़ रहे हैं सरकार से अब तक 1 लाख की सहायता राशि मिली।

केस-2
जमीर अहमद (54) इन्होंने बीस वर्ष तक खनन क्षेत्र में काम किया और उसके बाद सिलिकोसिस चपेट में आकर पिछले 20 वर्ष से मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं । इनको सरकार से अब तक 1 लाख रुपए की सहायता राशि मिली।

केस-3
मकसूद अहमद गहलोत (55) तीस वर्ष तक खनन क्षेत्र में काम किया, अब पिछले दस वर्ष से मौत की लड़ाई लड़ रहे है फि लहाल हालत नाजुक बनी हुई है । सरकार से अब तक कोई सहायता नहीं मिली।

केस-4
धन्नराज चौकीदार (24) पांच वर्ष तक खनन क्षेत्र कम्प्रेशर चलाने का काम किया पिछले तीन साल से सिलिकोसिस बीमारी की चपेट में है। पत्नी ने तलाक दे दिया। इसको सरकार की तरफ से अब तक कोई सहायता नहीं मिली है।

मजदूरों के लिए गले का फांस बनी
पत्थर के कण जो की रेत के सूक्ष्म कण हवा में फैलने से वह श्वांस लेने पर मजदूर के शरीर के अंदर चले जाते हैं जो फेफ ड़ों में एकत्र हो जाते हैं। इससे मजदूर के शरीर में टीबी, सिलिकोसिस सहित कई तरह की बीमारियाँ होने लगती हैं। मरीज को श्वांस लेने में कठिनाई होती है, घबराहट होने लग जाती है। खांसी से फेफ डों में तकलीफ होने लग जाती है, मरीज पैदल नहीं चल सकता। अवैध खनन की वजह से सरकार को राजस्व हानि के साथ ही प्रकृति को देवीय खनिज की क्षति हो रही है जिसको रोकने के लिए सरकार व जिला प्रशासन फेल हो रहा है। खान मजदूर को सिलिकोसिस व टीबी बीमारी से बचाव के लिए आज भी डेस्क मास्क का उपयोग तक नही करते। खान श्रमिकों के स्वास्थ्य को लेकर खान धारकों के साथ ही विभागीय अधिकारी भी पूरी तरह से लापरवाह बने हुए हैं। यही वजह है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद जिले की खदानों में नियमो की पालना नहीं की जा रही।

इनका कहना है

सिलिकोसिस मरीजों की सुविधा के लिए अगर बड़ी खाटू आदर्श चिकित्सालय में एक्स रे मशीन आक्सीजन प्लांट व उससे सम्बंधित जांचें होती रहे तो सिलिकोसिस पीडि़तों को नजदीक में सुविधा उपलब्ध हो सकती है। सिलिकोसिस मरीजो को अचानक घबराहट होने के कारण उनको नागौर लेकर जाना पड़ता है। इससे बेहतर यही है कि इनके स्वास्थ्य के लिए बड़ी खाटू के नजदीक के आदर्श चिकित्सालय में सम्पूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए
अभय सिंह कुडोली . अध्यक्ष खान मजदूर एकता संगठन नागौर

सिलिकोसिस का कोई इलाज नही है। श्वांस में तकलीफ व घबराहट होने लग जाती है। इसका उपाय यही है कि मजदूरों को खनन क्षेत्र में काम करते समय अपने आप की सुरक्षा के लिए डस्ट मास्क व सुरक्षा उपकरण लगाकर काम करना चाहिए।
श्रवण राव, चिकित्सक क्षय रोग विशेषज्ञ, राजकीय क्षय रोग निधारण केन्द्र- नागौर

Anuj Chhangani Reporting
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