हड़ताल नहीं थमी तो फिर किसी को नहीं मिलेगी डाक

ग्रामीण डाक सेवकों की मंगलवार से शुरू हुई हड़ताल में अखिल भारतीय डाक कर्मचारी यूनियन पोस्टमैन एवं एमटीएस भी शामिल

By: Sharad Shukla

Published: 24 May 2018, 11:46 AM IST

नागौर. जिले में मंगलवार से शुरू हुई ग्रामीण डाक सेवकों की अनिश्चितकालीन हड़़ताल में बुधवार से अखिल भारतीय डाक कर्मचारी यूनियन पोस्टमैन एवं एमटीएस भी शामिल हो गया है। आंदोलन में इसके शामिल होने से जिले में डाक वितरण की सेवाओं का काम ठप हो गया। कार्यालय में वितरण के लिए आए हुए डाक्यूमेंट्स एवं लिफाफे आदि रखे ही रह गए। पोस्टमैन्स यूनियन की ओर से देशव्यापी हड़ताल का आह्वान करने के साथ ही दस सूत्रीय मांगपत्र पूरी नहीं होने की स्थिति में हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया गया। इस दौरान जिले के प्रधान डाकघर के समक्ष धरनारत कर्मियों ने चेताया कि अब शेाषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीण डाक सेवकों की ओर से मंगलवार को वेतन विसंगति दूर करने के साथ शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल में पोस्टमैन्स यूनियन के शामिल होने के बाद से अब इसका स्वरूप बदल गया है। अभी तक केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही डाक वितरण का काम ठप हुआ था, लेकिन अब इसकी चपेट में शहर क्षेत्र भी आ गया। डाकघरों में बुधवार को वितरित होने वाले कोई दस्तावेज या फिर लिफाफे वितरण के लिए कार्यालय से बाहर ही नहीं निकले। अधिकारियों की ओर से समझाने का प्रयास विफल रहा। पोस्टमैन्स ने एक स्वर से डाक वितरण करने से साफ इनकार कर दिया। जिले के मकराना, परबतसर, कुचामन, रियाबड़ी, मेड़ता, डीडवाना, डेगाना, जायल, गोटन एवं नागौर के शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में डाक वितरण सेवाओं के ठप होने से हालात बेहद ही खराब नजर आए। डाक विभाग के प्रधान एवं उपडाकघर सहित 400 से ज्यादा डाकघरों में बुधवार को वितरण सेवाओं के ठप होने से लोगों में आवश्यक दस्तावेजों का वितरण भी नहीं किया जा सका।
आंदोलनकारियों ने पेश किया मांगपत्र
आंदोलनकारियों की ओर से दस सूत्रीय मांगपत्र पेश किया गया है। इसमें ग्रामीण डाक सेवकों से संबंधित समिति की रिपोर्ट को तुरन्त लागू करने, पोस्टमैन व एमटीएस के रिक्त पदों को भरना, बाहरी पोस्टल एजेंट से पोस्टमैन एवं एमटीएस का कार्य कराना बंद किया जाए, स्नातक पोस्टमैन व एमटीएस को तीन वर्षीय सेवा के बाद निरीक्षक डाक परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जानी चाहिए, ड्रेस-भत्ता पांच हजार से दस हजार करने के साथ ही रेडीमेड यूनिफार्म आपूर्ति का प्रस्ताव बंद करने आदि मांगें शामिल हैं।
इस बार समझौता नहीं, मांगे पूरी हो
प्रधान डाकघर के समक्ष धरने पर बैठे कर्मचारियों को संबोधित करते हुए परिमण्डल सचिव सत्यनारायण गौतम ने कहा कि शर्मनाक है कि ग्रामीण डाक सेवकों को आठ से दस हजार में कर्मचारियों को अपने घर का खर्च चलाना पड़ रहा है। पोस्टमैन्स डाक वितरण के लिए विभिन्न जगहों पर भटकते हुए संबंधित डाक्यूमेंट्स को सही जगह पर पहुंचाते हैं। इसमें न केवल अत्याधिक समय लगता है, बल्कि कठिन स्थितियों से भी गुजरते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों को उनकी समस्या नजर नहीं आती है। इस बार धरने पर केवल समझौते लिए नहीं बैठै हैं, बल्कि मांगों की पूर्ति कराने के लिए आए हैं।

Sharad Shukla Reporting
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