अटका मजदूरों का मेहनताना, सरकार के पास बजट का बहाना

खींवसर. खींवसर सहित प्रदेशभर में पंचायती राज चुनाव मनरेगा श्रमिकों पर भारी पड़ रहे हैं। चुनाव के चलते इन श्रमिकों की मजदूरी अटक गई है।

सवाईसिंह हमीराणा

खींवसर. खींवसर सहित प्रदेशभर में पंचायती राज चुनाव मनरेगा श्रमिकों पर भारी पड़ रहे हैं। चुनाव के चलते इन श्रमिकों की मजदूरी अटक गई है। अकेले खींवसर पंचायत समिति में सरकार ने करीब दो हजार से अधिक श्रमिकों की मजदूरी के 60 लाख रुपए पर पिछले चार माह से कुण्डली मार रखी है। जिम्मेदारों की लापरवाही से योजना में लगे गरीब मजदूरों का चूल्हा-चौका प्रभावित हो रहा है। पिछले चार माह से भुगतान को लेकर श्रमिक ग्राम पंचायतों के चक्कर काट रहे हैं , लेकिन बजट नहीं होने के कारण उन्हें निराशा हाथ लग रही है। मनरेगा योजना में अपने सौ दिन पूरे करने के बाद भी मजदूरों का पैसा उनके हाथों में आने की बजाए सरकारी खजाने में अटका पड़ा है। इस वर्ष पहले से ही किसान अतिवृष्टि की मार झेल रहे हैं, उस पर मनरेगा की मजदूरी अटकने से किसानों का गुजर-बसर मुश्किल हो गया है।

यह है प्रावधान

हर हाथ को काम देने वाली मनरेगा योजना को सुदृढ़ और मजबूती देने के लिए मनरेगा में लगे मजदूरों का मेहनताना देने में विलंब होने पर मजदूर को न सिर्फ बकाया मजदूरी, बल्कि उस पर क्षतिपूर्ति राशि देने का भी प्रावधान है। वह राशि दोषी कर्मचारियों के वेतन से काटी जाएगी। हालांकि इस प्रावधान से किसी भी कर्मचारी को आजतक दण्डित नहीं किया गया है। इसी कारण मजदूरी के विलंब में अधिकारियों की शिथिलता सामने आ रही है।

पहले दबाव अब कर रहें बचाव

मनरेगा योजना मांग आधारित योजना होने के बाद भी पंचायती राज अधिकारियों ने गांवों में श्रमिक संख्या बढ़ाने के साथ लक्ष्य भी दिए थे और कार्मिकों ने लक्ष्य के अनुरूप श्रमिक लगाकर नाडी, तालाब, सडक़ इत्यादि कार्य करवाए, लेकिन श्रमिकों की मजदूरी भुगतान के वक्त सरकार ने बजट का बहाना बनाकर हाथ खींच लिए हैं। सरकार ने सितम्बर के बाद मनरेगा श्रमिकों को एक ढेले का भी भुगतान नहीं किया है।

सरकार के पास बजट का अभाव

सरकार के पास बजट का अभाव होने के कारण मनरेगा श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है। बजट आते ही श्रमिकों को भुगतान कर दिया जाएगा।

- रामलाल सुथार, विकास अधिकारी, खींवसर

मजदूरी नहीं मिलने से परेशान

बजट नहीं होने के चलते मनरेगा श्रमिकों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। हमारी पंचायत में सर्वाधिक करीब चार सौ श्रमिकों ने काम किया, लेकिन मजदूरी नहीं मिलने से श्रमिक परेशान है। हालांकि उन्हें बजट नहीं होने की जानकारी देकर संतुष्ट कर रहे हैं। बजट आते ही भुगतान कर देंगे।

ओमप्रकाश मेहरा, ग्राम विकास अधिकारी, माडपुरा

Ravindra Mishra Desk
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