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Video : अनशन पर बैठे छात्र नेता बांता की तबीयत बिगड़ी, सरकार की नींद नहीं उड़ी

अनशन कर रहे छात्र नेता वासुदेव बांता को पांचवें दिन अस्पताल में कराया भर्ती, कुछ देर बाद फिर धरने पर आ गया

नागौर

Published: May 02, 2022 09:50:15 am

नागौर. बीआर मिर्धा राजकीय महाविद्यालय में विभिन्न विषयों के पीजी कोर्स शुरू करने सहित तीन और मांगों को लेकर छात्र नेता वासुदेव बांता को पांच दिन से अनशन पर बैठे है। लेकिन सरकार की नींद नहीं टूटी है। रविवार को भीषण गर्मी के कारण बांता की तबीयत बिगड़ गई। बेहोश होने पर कोतवाली पुलिस ने उसे जेएलएन अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उसकी ईसीजी सहित अन्य जांचें कर ग्लूकोज ड्रीप लगाई। डॉक्टर ने बांता को बीपी हाई बताते हुए अस्पताल में रुकने की सलाह दी, लेकिन वह अन्य छात्रों के साथ वापस धरना स्थल आ गए।
Student leader Banta's health deteriorated in Nagaur
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुरेन्द्र दौतड़ ने बताया कि मिर्धा कॉलेज के बाहर धरना स्थल पर पांच दिन से अनशन कर रहे वासुदेव बांता की तबीयत बिगड़ने पर रविवार सुबह पुलिस व एम्बुलेंस 108 को सूचना दी। सूचना मिलने पर कोतवाली थानाधिकारी बृजेंद्र सिंह मय जाप्ता धरना स्थल पर पहुंचे, लेकिन काफी देर इंतजार के बावजूद एम्बुलेंस नहीं आई। इस पर वे अन्य छात्रों के साथ थानाधिकारी की जीप में ही बांता को जेएलएन अस्पताल ले गए और इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया। अस्पताल में डॉक्टर ने वासुदेव की प्रारंभिक जांच में ब्लड प्रेशर, शुगर, कीटोन, ईसीजी आदि की जांच की। चिकित्सक ने बताया कि अत्यधिक धूप और गर्मी के चलते इतने दिन भूखे रहने से वह बेहोश हुए है। शुगर लेवल बढ़ गया है। इसके बाद उसे मेल वार्ड में भर्ती कर दिया।
छात्र पहुंचे अस्पताल

छात्र हितों के लिए अनशन पर बैठे बांता के बेहोश होने की खबर सुनकर कॉलेज के कई छात्र अस्पताल पहुंच गए। खींवसर पंचायत समिति के उप प्रधान रामसिंह बागड़िया भी अस्पताल पहुंचे और बांता की कुशेलशेम पूछी। करीब तीन घंटे बाद जब बांता को होश आया तो वह छात्रों के साथ वापस धरना स्थल पर आकर लेट गया। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दौतड़ ने कहा कि यदि वासुदेव बांता के साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदार सरकार होगी। इसलिए सरकार को जल्द ही उनकी मांगों को स्वीकार करना चाहिए। अन्यथा अन्य छात्र भी मजबूरन अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। धरना स्थल पर वापस लौटने के बाद वासुदेव ने आह्वान किया कि सोमवार सुबह सरकार की सद्बुद्धि के लिए कॉलेज गेट के सामने यज्ञ किया जाएगा।
छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने की सांसद से मुलाकात

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दौतड़ के नेतृत्व में छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को सांसद हनुमान बेनीवाल से उनके आवास पर मुलाकात कर मिर्धा कॉलेज में हिंदी साहित्य, भूगोल सहित अन्य विषयों में पीजी कोर्स प्रारंभ करने व विवि का विद्यार्थी सहायता केंद्र खोलने की मांग का ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने सांसद को कॉलेज के बाहर दिए जा रहे धरने के संबंध में भी अवगत करवाया। सांसद ने कहा कि उनकी मांगों के संदर्भ में पूर्व में भी सक्षम स्तर पर चर्चा हुई है, अब दुबारा बात करेंगे। इसके बाद बेनीवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राज्य सरकार को जल्द से जल्द छात्रों की मांगों पर सहमति व्यक्त करने की जरूरत है। सांसद ने कहा कि नागौर के प्रभारी मंत्री व प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे मंत्री राजेंद्र सिंह यादव ने यहां छात्रों को आश्वासन भी दिया, लेकिन अब तक कोई परिणाम नहीं आया।
ये रहे उपस्थितरविवार को धरना स्थल पर छात्र बबली ग्वाला, बाबूलाल चोटिया, भागीरथ चोटिया, सुमित भाटी, रामलाल कांकड़ावा, राकेश गुर्लिया, दिनेश बेनीवाल आदि मौजूद रहे।

पत्रिका व्यू... सरकार सोचे... क्या इतनी बड़ी है मांगें
जिला मुख्यालय के 50 साल से अधिक पुराने सरकारी कॉलेज में राष्ट्र भाषा हिन्दी सहित कई महत्वपूर्ण विषयों में पीजी कोर्स शुरू करने की मांग को लेकर छात्रों को धरना व अनशन करना पड़ रहा है। गहलोत सरकार ने पिछले दो सालों में प्रदेश में डेढ़ सौ से अधिक कॉलेज खोले हैं, लेकिन मिर्धा कॉलेज में हिन्दी, भूगोल सहित विज्ञान के विषयों में स्नातकोत्तर विषय शुरू करने में इतना जोर आ रहा है, जैसे करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ेंगे, जबकि यहां आधारभूत ढांचा तैयार है, केवल घोषणा करके स्टाफ नियुक्त करना है। इसके बावजूद कभी मंत्री आश्वासन दे रहे हैं तो कभी विधायक और सांसद को पत्र लिखने पड़ रहे हैं। 46 डिग्री तापतान में कॉलेज का छात्र पांच दिन से भूखा बैठा है, जिसकी जानकारी होने के बावजूद न तो सरकार ने कोई सकारात्मक रुख दिखाया है और न ही स्थानीय प्रशासन ने। नियमानुसार चिकित्सा विभाग की टीम को छात्र का मेडिकल चेकअप करना चाहिए, लेकिन वह भी नियमित नहीं किया जा रहा है। रविवार को भी छात्र को पुलिस जीप से अस्पताल ले जाना पड़ा। सरकार को इस ओर सोचना चाहिए कि यह इतनी बड़ी मांग नहीं है, जिसे पूरा करने में वर्षों लग जाए।

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