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मांग रहे थे भूगोल, मिला इतिहास, वो भी महिला को, जानिए क्या है मामला

जिला मुख्यालय के मिर्धा कॉलेज के छात्र निराश
- जिला प्रभारी मंत्री राजेन्द्र यादव के पास उच्च शिक्षा विभाग, फिर भी नागौर खाली हाथ
- उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं मंत्री की सोच और गंभीरता पर उठे सवाल

नागौर

Updated: April 06, 2022 08:38:22 pm

नागौर. जिला मुख्यालय के श्री बीआर मिर्धा कॉलेज में पिछले लम्बे समय से आधा दर्जन से अधिक स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों शुरू करने की मांग की जा रही है, लेकिन जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र यादव खुद उच्च शिक्षा मंत्री होने के बावजूद एक विषय नहीं दिला सके। यह नागौर का दुर्भाग्य ही है कि राष्ट्र की मातृभाषा हिन्दी में भी पीजी करने के लिए छात्रों को बाहर जाना पड़ता है, ऐसे में भूगोल, राजनीति विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान जैसे विषयों में पीजी कोर्स शुरू करने की बात करना ही बेमानी है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने विधानसभा में घोषणा करते हुए महिला कॉलेज को पीजी कॉलेज तो बना दिया, लेकिन वहां भी ऐसा विषय (इतिहास) दिया, जो पहले से मिर्धा कॉलेज में चल रहा है। यानी मांग भूगोल, हिन्दी, राजनीति विज्ञान सहित वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान की हो रही थी और दिया इतिहास। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उच्च शिक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता क्या है।
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जानिए, मिर्धा कॉलेज में क्यों जरूरी है पीजी कोर्स
- वनस्पति शास्त्र - कॉलेज में स्नातक स्तर पर 1969 से चल रहा है। 176 सीटें हैं, जिसके हिसाब से हर वर्ष इतने विद्यार्थी स्नातक करते हैं। वहीं जिले के दूसरे सरकारी एवं निजी कॉलेजों से करीब एक हजार विद्यार्थी स्नातक करते हैं, लेकिन उन्हें स्नातकोत्तर के लिए बाहर जाना पड़ता है।
- प्राणी शास्त्र - स्नातक स्तर पर वर्ष 1969 से चल रहा है। मिर्धा कॉलेज में 176 सीटें हैं तथा करीब 1000 विद्यार्थी दूसरी कॉलेजों से करते हैं।
- राजनीति विज्ञान - मिर्धा कॉलेज में स्नातक स्तर पर 1969 से चल रहा है, 500 सीटें हैं तथा करीब 2 हजार विद्यार्थी दूसरे कॉलेजों से स्नातक करते हैं, लेकिन पीजी की सुविधा नहीं है।
- हिन्दी साहित्य - वर्ष 1969 से चल रहा है, 500 सीटें हैं और 2 हजार विद्यार्थी दूसरे कॉलेजों से स्नातक करते हैं, इसमें भी पीजी की सुविधा नहीं है।
- भूगोल - वर्ष 2013 से चल रहा है, 100 सीटें हैं और करीब 700-800 विद्यार्थी दूसरे कॉलेजों से स्नातक करते हैं, लेकिन पीजी की सुविधा नहीं है।
मिर्धा कॉलेज में खास क्या
जिन विषयों में पीजी कोर्स की मांग की जा रही है, उनकी कक्षाएं शुरू करने के लिए मिर्धा कॉलेज के पास सभी आधारभूत एवं भौतिक संसाधन उपलब्ध हैं, ऐसे में यहां केवल इन विषयों की स्वीकृति देकर व्याख्याता लगाने मात्र से हजारों विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा सकता है।
बड़ी समस्या
वनस्पति शास्त्र व राजनीति विज्ञान में पूरे जिले में किसी भी राजकीय महाविद्यालय में स्नातकोत्तर की सुविधा नहीं है।

सरकार ने पांच साल में खोले 167 कॉलेज, 56 की इस साल घोषणा
राज्य सरकार ने पिछले पांच सालों में प्रदेश में 167 कॉलेज खोले हैं, जिनके लिए स्टाफ और भवन भले ही हो न हो, लेकिन 12वीं पास करने वाले विद्यार्थियों को स्नातक की डिग्री देने का इंतजाम कर दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने बजट घोषणा वर्ष 2022-23 में 56 नवीन राजकीय महाविद्यालय खोलने की घोषणा की है। पिछले पांच साल में खोले गए कॉलेजों में 7 नागौर जिले के हैं, जिसमें परबतसर, नावां, मकराना, कुचेरा, मेड़तासिटी, लाडनूं व डीडवाना के कॉलेज शामिल हैं। इस वर्ष खींवसर, पांचला सिद्धा व कुचामन में महिला कॉलेज की घोषणा की गई है।
गांव-ढाणी के विद्यार्थियों का बाहर जाना मुश्किल
उच्च शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जिला मुख्यालय पर कम से कम एक महाविद्यालय ऐसा होना चाहिए, जहां विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा सरकारी स्तर पर मिले। जहां शिक्षक रिसर्च सुपरवाइजर की भूमिका निभा सके और स्थानीय स्तर पर शोध कार्य को बढ़ावा दिया जाए। नागौर के मिर्धा कॉलेज में विभिन्न विषयों में पीजी कोर्स शुरू करने की मांग लम्बे समय से की जा रही है, लेकिन राजनीतिक उदासीनता के चलते इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। ऐसे में गांव-ढाणी के जरूरतमंद एवं गरीब विद्यार्थियों के लिए जिले से बाहर जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

छात्र नेताओं को भी चुनाव में याद आते हैं ये मुद्दे
कॉलेज में राजनीति करने वाले छात्र नेताओं को भी जुलाई-अगस्त में मुद्दे याद आते हैं। इसके बाद छात्र नेताओं के साथ मुद्दे भी गायब हो जाते हैं। गत वर्ष जब उच्च शिक्षा मंत्री राजेन्द्र यादव जिले के प्रभारी मंत्री बनकर नागौर आए तो कॉलेज के छात्र नेताओं ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर महाविद्यालय में विज्ञान संकाय में वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान एवं कला संकाय में हिंदी व भूगोल के स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम शुरू करवाने की मांग की थी। साथ ही यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं किया तो वे जिला कलक्ट्रेट का घेराव करेंगे तथा भूख हड़ताल करेंगे। इसके बावजदू मंत्री ने छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन छात्र नेता भी अपनी चेतावनी भूल गए।
कॉलेज स्तर से कई बार भिजवाए जा चुके प्रस्ताव
नागौर मिर्धा कॉलेज प्रशासन ने कॉलेज में हिन्दी, भूगोल, राजनीति विज्ञान सहित विज्ञान संकाय के विभिन्न विषयों में पीजी पाठ्यक्रम शुरू कराने के लिए कई बार प्रस्ताव भिजवाए हैं, लेकिन आयुक्तालय के अधिकारियों ने उन प्रस्तावों पर गौर करने की बजाए रद्दी की टोकरी में डाल दिया। गत वर्ष दिसम्बर में भी आयुक्तालय ने प्रस्ताव मांगा, जो कॉलेज प्रशासन ने 14 दिसम्बर को भेजा था।
मंत्री दे चुके आश्वासन, पूरे नहीं किए
नागौर का मिर्धा कॉलेज जिले का नोडल कॉलेज भी है, यहां समय-समय पर विद्यार्थियों की मांग पर मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों ने थोथे आश्वासन भी दिए हैं, लेकिन पूरे नहीं किए। दिसम्बर में वर्तमान उच्च शिक्षा मंत्री यादव ने नागौर दौरे के दौरान बजट में घोषणा कराने की बात कही थी, लेकिन घोषणा हुई नहीं। इससे पहले वर्ष 2017 में छात्रसंघ कार्यालय के उद्घाटन समारोह में तत्कालीन सांसद ने आश्वासन दिया था। उसके बाद वर्ष 2019 में तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री भंवरसिंह भाटी ने भी हिन्दी, भूगोल, सहित अन्य विषयों में पीजी कोर्स शुरू करने का आश्वासन दिया था।

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