शिक्षक की मेहनत ने बदली सरकारी विद्यालय की दशा

खींवसर. जहां सरकारी विद्यालय का नाम आते ही मन में टूटी टेबल-कुर्सिया, फटी दरियां, जर्जर भवन की छवि बन जाती है। लेकिन लोगों की इस छवि को बिरलोका उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य संजयकुमार सोमरा ने बदल दिया है। अब इस स्कूल में निजी स्कूलों से कई गुना बेहतर सुविधाएं उपलब्ध है

By: Ravindra Mishra

Published: 05 Sep 2020, 02:12 PM IST

बिरलोका उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य संजयकुमार सोमरा ने बदली तस्वीर

भामाशाहों के सहयोग से करवाए 18 लाख के कार्य : सीसीटीवी कैमरों से शैक्षणिक गतिविधियों पर नजर


शिक्षक की प्रेरणा से एमएलए, एमपी ने भी किया सहयोग

सवाईसिंह हमीराणा
खींवसर. जहां सरकारी विद्यालय का नाम आते ही मन में टूटी टेबल-कुर्सिया, फटी दरियां, जर्जर भवन की छवि बन जाती है। लेकिन लोगों की इस छवि को बिरलोका उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य संजयकुमार सोमरा ने बदल दिया है। अब इस स्कूल में निजी स्कूलों से कई गुना बेहतर सुविधाएं उपलब्ध है। सोमरा के अथक प्रयासों व भामाशाहों के सहयोग से बिरलोका का सरकारी विद्यालय आज आधुनिक सुविधाओं में निजी स्कूलों को काफी पीछे छोड़ दिया है। यहां विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगे है जिनसे विद्यालय की हर गतिविधियों की मॉनिटरिंग की जाती है साथ ही कैमरे में कैद शिक्षक व्यवस्थाओं की अभिभावक भी पूरी जानकारी लेते है। यहां इन्वर्टर लगे हैं ऐसे में गर्मी के मौसम में भी छात्रों को पढ़ाई में कोई भी परेशानी नहीं आती है। स्कूल में पीने के पानी के लिए शीतल जल प्याऊ बनवाने सहित करीब 18 लाख रूपए के कार्य करवाकर सोमरा ने विद्यालय की कायापलट कर दी है। सोमरा ने विधायक व सांसद को भी प्रेरित करके विद्यालय में तीन कमरों का निर्माण करवाया है। विद्यालय में विद्यार्थियों की प्रार्थना सभा कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बड़ा टीनशेड भी बनवाया गया है। आधुनिक सुविधाओं को देख अभिभावक भी बच्चों के विद्यालय में प्रवेश को लेकर काफी रुचि दिखा रहे हैं।

भामाशाह के सहयोग से किए कई कार्य
विद्यालय में भामशाहों के सहयोग से पुराने विद्यालय भवन की मरम्मत व पलास्तर 5 लाख रूपए, टीन शेड ढाई लाख, प्याऊ निर्माण व वॉटर कूलर ढाई लाख, फर्नीचर एक लाख 71 हजार, विद्यालय मैन गेट 2 लाख, सीसीटीवी कैमरा 71 हजार, दो इन्वेटर 50 हजार व विद्यालय में 30 हजार की लागत से पिन्टर मशीन, ऑटोमेटिक घंटी सहित अन्य कार्य भामाशाह के सहयोग से किए गए हैं।
प्रत्येक विद्यार्थी के लिए टेबल-कुर्सी
जहां सरकारी विद्यालय में आमतौर पर विद्यार्थियों के बैठने के लिए दरी तक उपलब्ध नहीं होती है, वहीं इस विद्यालय में प्रत्येक विद्यार्थी के बैठने के लिए टेबल-कुर्सी की व्यवस्था की गई है। जिस पर बैठकर विद्यार्थी आराम से अपना अध्ययन कर पाते हंै। सोमरा के प्रयासों से पिछले तीन वर्षों में विद्यालय का नामंाकन में दो सौ विद्यार्थियों की बढ़ोत्तरी हुई है तथा परिणाम भी शत प्रतिशत
रहा है।

Ravindra Mishra
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