पहले बारिश की देरी ने धरतीपुत्र की तोड़ी कमर, अब खाद के इंतजार में बीत रहा बुआई का समय

पत्रिका ग्राउण्ड रिपोर्ट

सवाईसिंह हमीराणा

खींवसर (nagaur). पहले बारिश की देरी ने किसानों की कमर तोड़ दी और अब रही-सही कसर खाद की कमी निकाल रही है। जुताई किए खेतों के बीच बैठा किसान अपनी किस्मत को कोस रहा है। कम्पनियों द्वारा इस बार डीएपी खाद का आयात नहीं करने से फसल बुआई का काम बुरी तरह से प्रभावित है।

By: Ravindra Mishra

Published: 11 Oct 2021, 06:31 PM IST

- सब्सिडी नहीं बढ़ाने से कम्पनियों ने खींचे हाथ
- असंचित क्षेत्रों में भी इस बार खाद की आवश्यकता

कम्पनियों द्वारा खाद के भाव में बढ़ोत्तरी के कारण इस बार बाजार में खाद की सप्लाई नहीं की। ऐसे में फसल बुआई का समय निकलते देख किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति यह है कि इनदिनों सरसों व तारामीरा की बुआई का समय है। आगामी दिनों में जीरा व ईसबगोल की बुआई होनी है, लेकिन खींवसर ही नहीं जिलेभर की किसी भी दुकान में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है। हालांकि सरकार ने सब्सिडी में बढ़ोत्तरी करते हुए कम्पनियों के साथ बातचीत की है फिर भी खाद के आयात से लेकर दुकानों तक पहुंचने में फिलहाल दो सप्ताह लग जाएंगे। तब तक किसानों के फसल बुआई का समय बीत जाएगा। खास बात यह भी है कि इस बार असिचिंत क्षेत्रों में भी अधिक बरसात के चलते बड़े पैमाने पर सरसों व तारामीरा की बुआई होनी है लेकिन खाद के अभाव में सबकुछ ठप पड़ा है।

जिलेभर में 20 हजार टन की खपत

जिलेभर में एक सीजन के लिए प्रतिवर्ष 20 हजार टन खाद की खपत होती है। यह खाद सहकारी सोसायटियों व खाद व्यापारियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचता है। खाद के आयात पर सरकार द्वारा कम्पनियों को सब्सिडी दी जाती है। इस बार विदेशों में खाद के दाम बढ़ गए, लेकिन सरकार ने सब्सिडी में वृद्धि नहीं की। जिसके चलते कम्पनियों ने खाद का आयात ही नहीं किया।

सरकार की गलती किसानों पर भारी

प्रदेश में प्रतिवर्ष विदेशों से लाखों टन डीएपी खाद का आयात किया जाता है। यह आयात देश की प्राईवेट कम्पनियों द्वारा करती है तथा थोक में बड़े व्यापारियों व सहकारी सोसायटियों को बेचती है। जिनके जरिये खाद किसान तक पहुंचता है। इस बार विदेश में डीएपी खाद के दामों में वृद्धि हो जाने व सरकार द्वारा सब्सिडी नहीं बढ़ाने से कम्पनियों ने खाद का आयात नहीं किया जिससे खाद की भारी किल्लत हो गई। जानकारों की माने तो इसके पीछे सारी गलती सरकार की है। सरकार को अच्छी तरीके से पता है कि प्रदेशभर में लाखों टन मात्रा में डीएपी खाद का आयात किया जाता है। अगर किसानों को डीएपी खाद नही मिली तो बुआई का कार्य नहीं होगा लेकिन सरकार ने समय रहते कम्पनियों से समझाइश नहीं की जिससे यह स्थिति पैदा हो गई।

किसान हताश

इस बार अधिक बरसात होने से किसानों की काफी फसल खराब हो चुकी है। इसके कारण किसानों ने सरसों, तारामीरा, ईसबगोल व जीरा फसल बुआई की तैयारी कर ली। बुआई को लेकर किसानों ने खेतों में जुताई भी कर ली। लेकिन खाद के नहीं होने से सब धरा पड़ा है। किसान खाद के लिए व्यापारियों व सहकारी सोसायटी के चक्कर लगा रहे है। किसानों को केवल निराशा हाथ लग रही है।

सरकार को करवाया अवगत

खाद की भारी किल्लत के चलते मैंने और सांसद ने भी ऊपर तक बात कर पत्राचार किया है। हमने सहकारी समितियों के माध्यम से शीघ्र खाद उपलब्ध करवाने के लिए भी कहा है। किसानों को समय पर डीएपी खाद मिले इसके लिए प्रयासरत है।

- नारायण बेनीवाल, विधायक, खींवसर

दो सप्ताह लग जाएंगे

सरकार और कम्पनियों के बीच सब्सिडी को लेकर समझौता हुआ है। लेकिन खाद आयात करने से लेकर किसान तक पहुंचने में करीब दो सप्ताह लग जाएंगे। फिलहाल खींवसर ही नहीं जिलेभर में किसी भी दुकान पर डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है।

- बिहारीलाल चाण्डक, खाद व्यापारी, खींवसर

सोसायटियों में भी नहीं

इस बार खाद की कमी के चलते किसान फसल बुआई नहीं कर पा रहे हैं। किसानों ने खेत तैयार कर रखे हैं लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है और फसल बुआई का समय निकल रहा है। हालात यह है कि बाजार तो क्या सोसायटी के गोदाम भी खाली पड़े हैं।

- रेवन्तराम सारण, अध्यक्ष, ग्राम सेवा सहकारी समिति, नागड़ी

पूरी सरकार की गलती

सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है। किसानों को खाद नहीं मिलने के पीछे सारी सरकार की गलती है कम्पनियों ने भावों को लेकर खाद की सप्लाई नहीं की। ऐसे में सरकार को फसल बुआई के समय को ध्यान में रखते हुए समय पर बातचीत करनी चाहिए थी। ताकि किसान अपनी फसल बुआई समय पर कर लेते।

- चूनाराम पालियाल, अध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा खींवसर

Ravindra Mishra
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