सरकार की मेहरबानी से चित्त होगी शराब के बरसों पुराने बकायादारों की पहलवानी

संदीप पाण्डेय
नागौर. शराब के पुराने बकायादारों पर सरकार मेहरबान हो गई है। मेहरबान भी इतना कि बरसों का ब्याज-जुर्माना तो छोड़ो मूल का भी नब्बे फीसदी तक माफ। आपने भी सुना होगा कि उधारी का बैंक तक ब्याज नहीं छोड़ती। पुराने जमाने में भी साहूकार सूद भले ही छोड़ दे पर मूल की तो पाई तक नहीं बख्शता था।

By: Ravindra Mishra

Updated: 16 Apr 2021, 12:31 AM IST

-कर्जा वसूलने की छूट ऐसी कि नब्बे फीसदी तक का मूल माफ
-शराब के ठेकेदार बरसों से नहीं चुका रहे सरकार को पैसा

-आखिर क्यों दी गई इतनी छूट, कुल रकम की वापसी 25 फीसदी भी नहीं

सरकारी सिस्टम को ही देख लें, वित्तीय वर्ष के आखिर में बकाया लीज, गृहकर ही नहीं अन्य सरकारी कर्जे को चुकाने में ब्याज-जुर्माने पर ही छूट दी जाती है। शायद पहली मर्तबा मामूली भुगतान के बाद मूल का भी एक बड़ा हिस्सा माफ किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार आबकारी विभाग के राजस्व बकाया के पुराने मामलों को शीघ्र निस्तारित करने के लिए यह आबकारी एमनेस्टी योजना-21 लाई गई है। शराब के पुराने बकायादार इसका तीस जून तक फायदा उठा सकेंगे। अब तक यानी 31 मार्च 2020 तक के बकायादार ठेकेदार इस योजना के अलग-अलग हिस्सों में लाभान्वित हो सकेंगे। बताया जाता है कि अकेले नागौर जिले का करोड़ों रुपए बाकी चल रहा है। अब इनसे जैसे-तैसे रकम लेकर मामले बंद करने की जद्दोजहद शुरू की गई है।

पंद्रह मामले, करोड़ों बकाया
सूत्र बताते हैं कि नागौर जिले में पंद्रह ऐसे मामले हैं जिनमें मोटे बकायादार हैं। एक तो अयोध्या का राजेश कुमार निगम ही है जिस पर मूल के साथ ब्याज मिलाकर करीब एक सौ चार करोड़ की देनदारी है। इसके लिए अब उसकी सम्पत्ति नीलाम की जा रही है। आबकारी विभाग ने भी उसके परिजनों को करीब साढ़े ग्यारह करोड़ में सेटलमेंट करने का ऑफर दिया है। उसके अलावा भी शराब के कई ठेकेदार बरसों से मूल के साथ ब्याज नहीं चुका रहे थे। इन पंद्रह में से दो मामले अफीम-डोड़े के अधिकृत ठेके हैं, जबकि बाकी शराब के।

दस फीसदी चुकाओ, करोड़ों से छुटकारा पाओ
सूत्रों का कहना है कि इस योजना के तहत 31 मार्च 89 से पहले के बकायादारों को तो मूल राशि का केवल दस फीसदी ही चुकाना है यानी नब्बे फीसदी मूल के साथ लाखों का ब्याज माफ किया जा रहा है। इसके बाद एक अप्रेल 89 से 31 मार्च 2009 के बीच के बकायादारों को मूल रकम का पचास फीसदी ही जमा कराना होगा। इससे पचास फीसदी मूल और लाखों के इंट्रेस्ट से उन्हें राहत मिलेगी। यही नहीं एक अप्रेल 09 से 31 मार्च 2014 तक के बकायादारों को केवल अस्सी फीसदी मूल चुकाकर तमाम कर्जे से मुक्ति मिल जाएगी। इसके अलावा 1 अप्रेल 2014 से 31 मार्च 20 तक के बकायादारों को मूल रकम पूरी जमा करानी होगी, जबकि ब्याज आदि की छूट रहेगी। बताया जाता है कि इन पंद्रह पर मय ब्याज डेढ़ सौ करोड़ की देनदारी है। सरकार की छूट से इन ठेकेदारों को काफी फायदा होगा, और ठेकेदार भी सरकार के इस ऑकर्षक ऑफर को कबूलने से नहीं चूकेंगे।

...आखिर क्यों पड़ी जरुरत
सरकार की इस योजना पर सवाल उठने लगे हैं। आखिर क्यों करोड़ों का बकाया सरकार कुछ प्रतिशत में ही समेट रही है। क्या सरकार को अब इनसे वापसी की उम्मीद नहीं थी या फिर बरसों से चल रहे कोर्ट केस से सरकार थकन महसूस करने लगी थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि पूरे राज्य के बकाया प्रकरण में से पचास फीसदी से कुछ राशि मिल गई वो भी सरकार के लिए कारगर साबित होने वाली है। क्योंकि कोरोना के चलते सरकार के पास खर्चा ज्यादा है।

दो मामले निस्तारण के करीब
सूत्र बताते हैं कि तेरह अप्रेल को पत्रिका में प्रकाशित अब होगी बाहुबली की सम्पत्ति नीलाम, आबकारी विभाग को मिलेगा 104 करोड़ का बकाया खबर पढऩे के बाद नोहर के ओमप्रकाश का नागौर में वर्ष 2001-02 में डोडे का ठेका था। बकाया चुकाने के लिए चेक दिए वो बाउंस हो गए, सरकार ने कोर्ट में केस दायर कर दिया। अब ब्याज समेत उसका बकाया 72 लाख तक पहुंच गया। पत्रिका में प्रकाशित खबर पढऩे के बाद आबकारी जिला कार्यालय में संपर्क कर बकाया चुकाने जा रहा है। ऐसे ही कुचामन की एक होटल बार मालिक बीकानेर निवासी नगेन्द्र सिंह ने भी योजना का लाभ लेने के लिए विभाग तक दस्तक दी है।

इनका कहना है

पुराने ठेकेदारों के बकाया के मामले निस्तारित करने के लिए सरकार यह योजना लाई है। नागौर जिले के पंद्रह प्रकरण हैं, बकाया समेत ब्याज को आंके तो करोड़ों का मामला है। कोर्ट में भी केस चल रहे हैं, ऐसे में सरकार ने विशेष राहत देते हुए मामले निस्तारित करने की पहल की है। दो मामलों में तो बकायादार चालान भरने वाले हैं।
मोहनराम पूनिया, जिला आबकारी अधिकारी, नागौर

Ravindra Mishra
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