Nagaur patrika news.नौनिहालों के भविष्य की तस्वीर होठों पर लगा देती है ताला...!

नागौर. निजी शिक्षण संस्थानों की ओर से अभिभावकों से फीस लिए जाने को लेकर चल रहे द्वंद के बीच ज्यादातर अभिभावक सिर्फ इस वजह से सामने नहीं आ रहे कि उनके बच्चों का भविष्य न प्रभावित हो सके

By: Sharad Shukla

Published: 17 Nov 2020, 08:54 PM IST

नागौर. निजी शिक्षण संस्थानों की ओर से अभिभावकों से फीस लिए जाने को लेकर चल रहे द्वंद के बीच ज्यादातर अभिभावक सिर्फ इस वजह से सामने नहीं आ रहे कि उनके बच्चों का भविष्य न प्रभावित हो सके। इस संबंध में शहर के विभिन्न हिस्सों में अभिभावकों से बातचीत की गई। फीस के संदर्भ में असंतुष्ट होते हुए भी अपनी बात नहीं कह पाने का अभिभावकों को मलाल तो है, लेकिन कई अन्य बातों से सहमत नहीं होते हुए इनको चुप रहना पड़ता है। हालांकि शुल्क को लेकर कुछ लोग नाम के साथ सामने तो आए, लेकिन अब तक हुई बातचीत में 60 प्रतिशत से अधिक ऐसे अभिभावक मिले, जिनके अंदर निजी शिक्षण संस्थानों के रवैये पर असंतोष है। इन अभिभावकों का कहना है कि केवल नागौर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी निजी शिक्षण संस्थानों के मनमर्जी के शुल्क पर प्रावधानों की एक लक्ष्मण रेखा होनी चाहिए। इसमें चाहे सीबीएसई बोर्ड के स्कूल हों या फिर आरबीएसई बोर्ड के स्कूल, दोनों के ओर से ही लगाए जाने वाले शुल्क पर एक लगाम लगनी चाहिए। अभिभावकों का कहना है कि जब देश की सरकार जनता के वोटों से बनती है तो क्यों नहीं, फिर निजी शिक्षण संस्थानों के इस मनमानी रवैये पर जनता को राहत देने वालो प्रावधानों को लागू कर देना चाहिए। अभिभावकों का कहना है कि अजमेर हो या फिर नागौर, यदि मापदंडों के पालना की बात की जाए तो शुल्क लिए जाने के नाम भारी-भरकम राशि की मांग करने वाले शिक्षण संस्थान इस पर विभिन्न दृष्टिकोणों पर खरे नहीं उतरते हैं। सरकार को इस पर भी ध्यान देना चाहिए। अभिभावकों का यह भी कहना था कि स्कूलों का पूरा ध्यान बच्चो की ड्रेस, किताबों की संख्या बढ़ाने एवं विभिन्न आयोजनों के माध्यम से शुल्क वसूलने पर ही रहता है। यह स्थिति समूचे प्रदेश की है। स्कूलों की इस होड़ में बच्चों के अवरुद्ध होते मानसिक विकास की ओर से शायद ही इन जिम्मेदारों को ध्यान जाता हो...! इनका कहना है कि स्कूलों की इस मनमानी व मनमर्जी का विरोध सभी करना चाहते हैं, लेकिन खुद के नौनिहालों के भविष्य के चलते होठों पर ताला लगाना पड़ता है

Sharad Shukla Reporting
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