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सर्दी में हुई बारिश ने दी फसलों को संजीवनी

Nagaur. पश्चिमी विछोभ से हुई बारिश से हुई मावठ से फसलों को ताकत मिली है। फसलों में गेहूं, जौ एवं चना आदि को बढ़ी सर्दी का लाभ मिलेगा

नागौर

Published: January 09, 2022 08:13:43 pm

नागौर. पश्चिमी विछोभ से हुई बारिश से हुई मावठ से फसलों को ताकत मिली है। फसलों में गेहूं, जौ एवं चना आदि को बढ़ी सर्दी का लाभ मिलेगा। इससे फसलों की गुणवत्ता के साथ ही इनकी ग्रोथ भी बेहतर होगी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो से तीन दिनों में हुई बरसात फसलों के लिए बेहद फायदेमंद है। बढ़ती सर्दी के चलते हुए मावठ का लाभ तो मिलेगा, लेकिन पाले से बचाव के लिए किसानों को जरूर सावधानी बरतनी होगी।
गांवों में बढ़ती सर्दी के साथ चल रही हाड़ कंपाती ठंड जहां लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है, वहीं यह मौसम का तल्ख हुआ तेवर किसानों के फसलों के लिए वरदान बन गया है। मौसम के बदले रंग को लेकर फिलहाल काश्तकार उत्साहित जरूर है। किसानों का मानना है कि इससे उनका उत्पादन बढिया रहेगा। करीब 62 हजार हेक्टेयर से ज्यादा एरिया में जहां गेहूं की बुवाई की गई है, वहीं इस बार सरसों की बुवाई 84 हजार हेक्टेयर से ज्यादा एरिया में रिकार्ड बुवाई की गई है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो सरसों, चना, तारामीरा, गेहूं एवं जौ के लिए हुई बारिश के साथ बढ़ी ठंड ने जहां उनको संजीवनी दी है, वहीं पानमेथी के लिए बारिश बिलकुल फायदेमंद नहीं है। इसको लेकर पानमेथी के किसान जरूर चिंतित हैं।
इस पर एक नजर
गेह 62596
जौ 13976
चना 40478
दालें 673
सरसों 84644
तारामीरा 36232
अलसी 49
जीरा 41042
मेथी 10087
ईसबगोल 44115
सौंफ 8409
चारा 1922
सब्जी व अन्य 3539
The rain in winter gave life to the crops
The rain in winter gave life to the crops
तो बेहतर हो जाएगा उत्पादन
कृषि अधिकारियों के अनुसार कुचामन कृषि रेंज में जहां 94066 एरिया में रबी उपज की बुवाई हो मौसम के मावठ का फायदा मिलेगा, वहीं मेड़तासिटी दो लाख 53 हजार 696 हेक्टेयर एरिया में गेहूं, जौ, चना, दालें, अलसी, जीरा, ईसबगोल, सौंफ आदि की उपज की फसल को इस बदले मौसम में रफ्तार मिलेगी। इससे फसल का उत्पादन बेहतर होगा।
इनका कहना है...
पश्चिमी विछोभ से हुई बारिश से बढ़ी ठंड का रबी की उपज को बेहद फायदा मिलेगा। हालांकि पानमेथी की उपज जरूर प्रभावित होगी, लेकिन अन्य उपज के लिए उत्पादन की दृष्टि से बारिश बेहद फायदेमंद है।
शंकरराम सियाग, पौध संरक्षण अधिकारी कृषि विस्तार नागौर

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