सेना के हवलदार पर भारी पड़ी पत्नी की ‘गुहार’

ह्यूमेन स्टोरी

संदीप पाण्डे
नागौर. सेना जवान का ही नहीं उसके परिवार का भी पूरा खयाल रखती है। तीन बेटियों के बाद ससुराल से निकाली गई एक विवाहिता को एक साल के भीतर ही भरण-पोषण भत्ता मिलना शुरू हो गया। जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, नागौर में पति के बेदखल करने की गुहार लेकर आई पीडि़ता विमला देवी अब सुकून की सांस ले रही हैं।

By: Ravindra Mishra

Published: 13 Oct 2021, 07:32 PM IST



बनाया पगार का 33 फीसदी देने के लिए जिम्मेदार

-सेना मुख्यालय का आदेश, करीब एक साल में ही मिला न्याय
-तीन बेटियां होने पर पति समेत ससुराल जनों ने कर दिया था बेदखल

-जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में दर्ज शिकायत का निस्तारण

सूत्रों का कहना है कि विमला देवी का पति हवलदार हिमताराम जाट रेजीमेंट में जम्मू कश्मीर में तैनात है। हिमताराम की विमला से शादी करीब बीस बरस पहले हुई थी। हिमताराम लाडनूं का व विमला जायल की रहने वाली है। शादी के बाद विमला के तीन बेटियां हुई। तीसरी बेटी के होते ही उसे प्रताडि़त किया जाने लगा। उसका सुकून छिन गया । पति सेना में होने का गर्व उसकी बेरुखी से टूट चुका था। बेटियां उसके लिए अभिशाप सा बन गई थी। वो ठुकरा दी गई, अपने हाल में जिंदा रहने को छोड़ दी गई। तीन बेटियों के साथ विमला ने फिर जायल स्थित अपने मायके में शरण ली।
बुजुर्ग पिता और भाई विमला की मदद करने लगे पर आखिर इतना सबकुछ होता कैसे। इस दौरान विमला के घर वालों ने कई बार हिमताराम और उसके परिजनों से विमला को ले जाने की बात कही। कई बार हिमताराम को बुलाया गया पर वह विमला को शर्तों पर ले जाने की बातें करता रहा। वहीं दूसरी ओर ससुराल वाले उसे पैसा-गहना देकर तलाक देने की बात करने लगे। और तो और हिमताराम ने विमला को नौकरी तक छोडऩे की धमकी दी ताकि वो भरण-पोषण की हकदार भी न बन पाए। विमला अपने पर होते सितम के बाद भी मजबूती से खड़ी रही।

हौसले के साथ पहुंची सैनिक कल्याण कार्यालय
सूत्र बताते हैं कि करीब सवा साल पहले विमला जिला सैनिक कल्याण कार्यालय पहुंची। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल मुकेश शर्मा को अपनी पीड़ा बयान की। कर्नल शर्मा ने उसकी शिकायत ली और अपने स्तर पर हिमताराम के यूनिट और सेंटर तक दस्तावेज चलाए। यूनिट ने इसकी जांच करवाई, केस को स्वीकृत करते हुए नोटिस जारी करने के बाद हवलदार हिमताराम की पगार का करीब 33 फीसदी हिस्सा विमला देवी को देने का आदेश दिया। आदेश में यह भी कहा कि यह राशि एक अक्टूबर 2019 से दी जाए।

हिस्से में भी हिस्सा
आदेश के मुताबिक इस 33 फीसदी में से विमला को साढ़े सोलह फीसदी, उनकी बच्चियां सलोचना (14), निर्मला (12) और पीयूष (8) को साढ़े पांच-साढ़े पांच फीसदी राशि देना तय हुआ है। इस तरह हिमताराम की पगार में से 33 फीसदी राशि मिलेगी। एक अक्टूबर 2019 से यह राशि दी जाएगी, हालांकि अभी तो करीब 24-25 हजार रुपए ही आ रहे हैं।

इनका कहना

पति-ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया। पिता-भाई पर कब तक बोझ रहती। बेटियां होने की सजा भुगत रही हूं। आखिर में जिला सैनिक कल्याण कार्यालय की शरण ली तो सेना के बड़े अधिकारियों ने उसकी सुनी और भरण-पोषण देना शुरू किया। अब बेटियों का ढंग से लालन-पालन कर सकूंगी।
-विमला देवी, जायल, नागौर


विमला को न्याय दिलाने का हरसंभव प्रयास किया जो सफल भी हुआ। करीब एक साल में दर्जनभर पत्र संबंधित मुख्यालय और अधिकारियों को दिए। सुनवाई ऐसी हुई कि कमाण्ड हेडक्वार्टर ने विमला को राहत देते हुए भरण-पोषण की राशि स्वीकृत कर दी। कम समय में मिलने वाला यह पूरा न्याय है।

-कर्नल मुकेश शर्मा , जिला सैनिक कल्याण अधिकारी नागौर

Ravindra Mishra
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