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इंदिरा गांधी फीडर को लेकर पंजाब व राजस्थान सरकार कर रही पत्राचार, केन्द्र ने बिना जाने ही कह दिया मामला सुलझ गया

लोक सभा में सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल पर मिली जानकारी

नागौर

Published: December 02, 2021 10:30:25 pm

नागौर. लोकसभा में आरएलपी संयोजक व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा हरीके स्थित इंदिरा गांधी फीडर के हैड वर्क की क्षमता 15 हजार क्यूसेक से डिजाइन की गई क्षमता 18 हजार क्यूसेक के अनुरूप करने की मांग से जुड़े सवाल का जवाब सरकार ने गुरुवार को दिया। केन्द्र सरकार के जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित में जवाब देते हुए कहा कि हरीके में इंदिरा गांधी फीडर के हैड रेगुलेटर की डिजाइन और निर्माण 15000 क्यूसेक की क्षमता के साथ किया गया था, उसके बाद इंदिरा गांधी फीडर को 18500 की डिजाइन क्षमता के साथ निर्मित किया गया था। इंदिरा गांधी फीडर की क्षमता के बेहतर उपयोग के लिए इंदिरा गांधी फीडर के हैड रेगुलेटर की क्षमता में वृद्धि के मुद्दों पर जल शक्ति मंत्रालय का पंजाब तथा राजस्थान की सरकारों के साथ विचार-विमर्श चल रहा था, लेकिन 25 जुलाई 2019 को राजस्थान व पंजाब के मुख्यमंत्रियों के मध्य इस विषय पर हुई बैठक के बाद लिए गए निर्णय की अनुपालना में राजस्थान तथा पंजाब के मुख्य अभियंताओं ने 30 जुलाई 2019 को साइट का निरीक्षण किया। जिसमें यह निष्कर्ष निकाला कि सीमित क्षेत्र उपलब्ध होने के कारण इंदिरा गांधी फीडर के हैड रेग्युलेटर में अतिरिक्त निर्माण संभव नहीं है, साथ ही कुछ तथ्यों के साथ मंत्री शेखावत ने कहा यह द्विपक्षीय मुद्दा सुलझ गया है।
MP Hanuman Beniwal
अनसुलझे मुद्दे को केन्द्र के जल शक्ति मंत्रालय ने बताया निस्तारित, सांसद ने जताई आपत्ति
सांसद ने कहा - मंत्री का जवाब विवादास्पद
सांसद बेनीवाल ने मंत्री द्वारा दिए गए जवाब पर जारी प्रेस बयानों में कड़ी आपत्ति व्यक्त की और कहा कि जिन तारीखों के हवाले के बाद मंत्री शेखावत मामले में समाधान होना बता रहे, जबकि उन तारीखों के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री ने 14 अक्टूबर 2019 को पंजाब के मुख्यमंत्री को व 09 सितम्बर 2020 को राजस्थान के सीएस ने पंजाब के सीएस को पत्र लिखकर हैड रेगुलेटर की मॉडल स्टडी करने के लिए अनुरोध किया, ताकि इस मुद्दे का समाधान निकल सके। ऐसे में यह स्पष्ट है कि मामला सुलझा नहीं अन्यथा राजस्थान व पंजाब के मध्य इस मामले को लेकर पत्राचार नहीं होता। सांसद ने कहा इस हैड रेगुलेटर की क्षमता बढऩे से बाढ़ के दौरान व्यर्थ बह जाने वाले पानी का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन राजस्थान के इस अनसुलझे मामले को सुलझा हुआ बता दिया गया। ऐसे में इतनी बड़ी चूक जल शक्ति मंत्रालय की कैसे रही, उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सांसद ने कहा कि जल शक्ति मंत्रालय ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए इस तरह भ्रमित करने वाला जवाब दिया है, जबकि मंत्री स्वयं राजस्थान से हैं तो उन्हें रुचि लेकर मामले में तकनीकी समाधान करवाने की जरूरत थी।

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