मंडी टैक्स में थी राहत मिलने की उम्मीद, दो प्रतिशत सेस और थोप दिया

कोरोना संकट में कटेगी किसानों की जेब, सेस लगाने से नुकसान का अंदेशा, कृषि मंडियों में पांच दिन का लॉक डाउन, कृषक कल्याण सेस वापस लेने की मांग

By: Jitesh kumar Rawal

Published: 10 May 2020, 11:01 AM IST

नागौर. कोराना संकट से जूझ रहे किसान व उद्योग टैक्स के फेर में उलझ गए हैं। प्रदेश की मंडियों में कृषि जिंसों की खरीद-फरोख्त पर मंडी टैक्स लग रहा है। कोरोना संकट में व्यापारियों को इस टैक्स में भी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन राज्य सरकार ने हाल ही में कृषि जिंसों के बेचान पर दो प्रतिशत कृषक कल्याण सेस और थोप दिया। जिसका विरोध करते हुए कृषि मंडियों में व्यवसाय बंद है। पांच दिनों के बंद का आह्वान होने से राज्य की 247 मंडियां ठप पड़ी है और माल नहीं मिलने से उद्योग संचालन पर भी संकट मंडरा रहा है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की सप्लाई चेन टूटने का अंदेशा बन रहा है। माना जा रहा है कि सेस की राशि किसानों की जेब से निकलेगी, जिससे किसानों को नुकसान होगा। इससे बचने के लिए वे अन्य राज्यों का रूख भी करेंगे। इससे प्रदेश में उद्योग चलाने के लिए कच्चा माल बाहरी राज्यों से लाना पड़ेगा, जो महंगा साबित होगा। ऐसे में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति रूकेगी एवं महंगाई बढऩे का भी अंदेशा है। व्यापारियों एवं उद्यमियों ने कृषक कल्याण सेस को वापस लेने एवं मंडी टैक्स में राहत देने की मांग रखी है। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ पश्चिमी जोन संयोजक भोजराज सारस्वत ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से 5 मई को सेस लगाने की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही विरोध स्वरूप पांच दिवसीय व्यापार बंद रखा गया है। यह अवधि 10 मई को खत्म हो जाएगी, लेकिन सरकार ने अभी तक न तो संघ को वार्ता के लिए बुलाया है और न ही सेस के निर्णय को वापस लिया है।

अन्य राज्यों में राहत तो यहां क्यों नहीं
प्रदेश की मंडियों में अभी 1.60 प्रतिशत मंडी टैक्स लिया जा रहा है। नई अधिसूचना के बाद दो प्रतिशत सेस भी लिया जाएगा। उधर, नजदीकी पंजाब राज्य मंडी टैक्स से भी मुक्त है। वहीं गुजरात में यह टैक्स काफी कम है। कृषि जिंसों के दाम ज्यादा मिलने से किसान इन नजदीकी राज्यों का भी रूख कर सकते हैं। इससे राज्य की मंडियां ठप हो जाएंगी और लघु उद्योगों पर संकट आएगा। उद्यमी एवं व्यापारी बताते हैं कि इन राज्यों में जब मंडियों का इस तरह से संचालन हो सकता है तो राजस्थान में क्यों नहीं कर सकते। एक देश एक टैक्स के तहत किसानों व उद्यमियों को राहत देनी चाहिए।

लघु उद्यमियों की कमर तोड़ दी
कोरोना महामारी में व्यापार ठप पड़े हैं। अभी कुछ छूट मिलने के बाद उद्योग खोले गए, लेकिन राज्य सरकार ने कृषि जिंसों पर सेस लगा दिया, जिससे छोटे व्यापारी एवं लघु उद्यमियों की कमर ही टूट गई। आटा, दाल, तेल, मसाला उद्योग शुरू होने वाले थे और मंडियां बंद होने से संकट आ गया। किसानों को जिंस बेचने में दो प्रतिशत सेस भुगतना पड़ेगा तो जेब भी कटेगी। इस पर वे अन्य राज्यों में माल बेच सकते हैं, जहां सेस तो क्या मंडी टैक्स भी नगण्य है। ऐसे में उद्योग सुचारू रखने के लिए बाहरी राज्यों से माल मंगवाना महंगा पड़ेगा। साथ ही राज्य सरकार को भी राजस्व हानि होगी।

सेस निरस्त करवाने की मांग
लघु उद्योग भारती की ओर से केंद्रीय भारी उद्योग राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कृषक कल्याण सेस निरस्त करवाने की मांग की है। अध्यक्ष भोजराज सारस्वत ने बताया कि सेस लगाने से किसान अन्य राज्यों में माल बेचने जाएंगे, जिससे प्रदेश में कालाबाजारी बढऩे का अंदेशा है। एग्रो प्रोसेस यूनिटों को माल नहीं मिल पाएगा और मिलेगा तो अतिरिक्ति भार बढ़ेगा। प्रदेश की मंडियों में भी यदि माल नहीं आएगा तो मंडियां बंद हो जाएगी, जिसका सीधा असर प्रदेश के राजस्व एवं लघु उद्योगों पर पड़ेगा।

Jitesh kumar Rawal
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned