पुलिस विभाग में डेढ़ साल से हो रही ये बड़ी गड़बड़ी, जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

- राजस्थान पुलिस के पुलिस दूरसंचार विभाग के हैड कांस्टेबल व एएसआई को हर महीने हो रहा है 8 से साढ़े 12 हजार का नुकसान
- जून 2013 में राज्य सरकार द्वारा छठे वेतन आयोग में किए गए संशोधन में रही त्रुटि का खमियाजा भुगत रहे हैं प्रदेश भर के करीब दौ सौ पुलिसकर्मी

By: shyam choudhary

Published: 10 Mar 2019, 11:34 AM IST

नागौर. राजस्थान पुलिस के पुलिस दूरसंचार विभाग के हैड कांस्टेबल व सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) सरकार की गलती का खमियाजा भुगत रहे हैं। प्रदेशभर में दूरसंचार विभाग के करीब 200 हैड कांस्टेबल व एएसआई को अपने ही समकक्ष राजस्थान पुलिस के सामान्य पुलिस विभाग के हैड कांस्टेबल व एएसआई से 8 से 12 हजार रुपए प्रति माह वेतन कम मिल रहा है। यानी समान पद के बावजूद अलग-अलग वेतन मिल रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि सरकार द्वारा गठित वेतन विसंगति निवारण समिति भी इस ओर ध्यान देने की बजाय टाइमपास कर रही है और सरकार उसका बार-बार कार्यकाल बढ़ा रही है।

गौरतलब है कि 12 सितम्बर 2008 को जारी छठे वेतन आयोग की अधिसूचना के अनुसार पुलिस विभाग में सामान्य पुलिस सेवा एवं पुलिस दूरसंचार सेवा के कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल व एएसआई का पद के हिसाब से वेतन भी समान था। लेकिन 30 अक्टूबर 2017 को जारी सातवें वेतन आयोग की अधिसूचना में सामान्य पुलिस के हैड कांस्टेबल का पे मैट्रिक्स लेवल-8 करते हुए ग्रेड-पे 2800 कर दिए, जबकि दूरसंचार विभाग के हैड कांस्टेबल का पे मैट्रिक्स लेवल-6 करके ग्रेड-पे 2400 ही रखा, जबकि कांस्टेबल का ग्रेड-पे भी 2400 रखा। इसी प्रकार सामान्य पुलिस के एएसआई का लेवल-10 करके ग्रेड-पे 3600 कर दिया, जबकि दूरसंचार विभाग के एएसआई का लेवल-8 करके ग्रेड-पे 2800 ही किया। यहीं से विसंगति पैदा हो गई, जो आज तक नहीं सुधर पाई है।

नीचे-ऊपर तक के अधिकारी लिखे चुके पत्र
समकक्ष पदों के बावजूद अलग-अलग वेतन मिलने पर पीडि़त पुलिसकर्मियों ने जब विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपनी पीड़ा रखी तो सबसे पहले 15 नवम्बर 2017 को पुलिस मुख्यालय राजस्थान जयपुर के वित्तीय सलाहकार आलोक माथुर ने गृह विभाग के संयुक्त शासन सचिव को पत्र लिखकर पूरी जानकारी दी तथा वेतन विसंगति दूर करने को कहा। इसके बाद गृह विभाग के तत्कालीन संयुक्त शासन सचिव कालूराम ने वेतन विसंगति निवारण समिति के सदस्य सचिव को पत्र लिखकर वेतन विसंगति दूर करने को कहा था। फिर भी समस्या का निस्तारण नहीं हुआ तो 12 मार्च 2018 को तत्कालीन डीजीपी ओपी गल्होत्रा ने अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक उप्रेती को पत्र लिखकर बताया कि इस वेतन विसंगति से पुलिस दूरसंचार के प्रभावित कार्मिकों के मनोबल पर विपरीत असर पड़ रहा है, इसलिए इसे प्राथमिक से परीक्षण करवाकर आवश्यक कार्रवाई करें। इसके बाद 31 अगस्त 2018 को राजस्थान पुलिस के दूरसंचार एवं तकनीकी अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस सुनील दत्त ने गृह विभाग के शासन सचिव को पत्र लिखकर पूरी प्रक्रिया समझाते हुए वेतन विसंगति दूर करवाने के लिए कहा, इसके बावजूद स्थिति जस की तस है।

15 माह बाद भी नहीं मिला लाभ
पुलिस दूरसंचार विभाग के हैड कांस्टेबल व एएसआई को सातवां वेतन आयोग लागू होने के 15 माह बाद भी छठे वेतन आयोग का वेतन मिल रहा है। यानी दोनों पदों के कार्मिकों को हर माह 8 से 12 हजार रुपए तक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

समिति का छठी बार बढ़ाया कार्यकाल
सातवें वेतन आयोग को लागू करने में रही विसंगतियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित वेतन विसंगति निवारण समिति का कार्यकाल बार-बार बढ़ाया जा रहा है। डीसी सामंत की अध्यक्षा वाली कमेटी का कार्यकाल बार-बार बढ़ाने से पीडि़त कर्मचारियों में रोष व्याप्त हो रहा है। सरकार ने जनवरी 2019 में कमेटी का कार्यकाल 30 जून 2019 तक बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि 31 दिसम्बर 2018 को कमेटी का कार्यकाल पूरा हो गया था। छह बार कार्यकाल बढ़ाने के बावजूद कमेटी ने कोई निर्णय नहीं दिया है।

पत्रिका व्यू...तो क्या आंदोलन करने वालों की ही सुनेगी सरकार
सामान्य तौर पर वेतन विसंगति सहित अन्य मांगों को लेकर बहुसंख्यक कर्मचारी आंदोलन करते हैं, मांग पूरी नहीं होती है तो ज्ञापन से लेकर हड़ताल और धरने-प्रदर्शन तक किए जाते हैं, जिसके बाद सरकार झट से उनकी मांग पूरी कर देती है। यहां मामला पुलिस विभाग से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिसकर्मी न तो धरना-प्रदर्शन कर सकते हैं और न ही हड़ताल या आंदोलन कर सकते हैं, इसी का परिणाम है कि 15 महीने बीतने के बावजूद हैड कांस्टेबल व एससआई की सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि सरकार को चाहिए कि ऐसे मामलों में तुरंत समाधान कर पीडि़त कार्मिकों को पूरा वेतन दिया जाए, ताकि वे अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से कर सकें।

shyam choudhary Reporting
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