राजफेड की गलती से फंस गए काश्तकारों के साढ़े तीन करोड़...!

Sharad Shukla

Publish: Nov, 14 2017 12:05:11 (IST)

Nagaur, Rajasthan, India
राजफेड की गलती से फंस गए काश्तकारों के साढ़े तीन करोड़...!

समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद, भामाशाह खातों के अंकन में राजफैड के सॉफ्टवेयर में तकनीकी त्रुटि, 200 काश्तकारों के भुगतान में लगा अड़ंगा

समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद, भामाशाह खातों के अंकन में राजफैड के सॉफ्टवेयर में तकनीकी त्रुटि, 200 काश्तकारों के भुगतान में लगा अड़ंगा
नागौर. समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद के भुगन में साफ्टवेयर के खाता अंकन में हुई तकनीकी त्रुटि के साथ ही जनधन खाते में 50 हजार रुपए तक के राशि की अनिवार्यता ने लगभग 200 किसानों के साढ़े तीन करोड़ रुपए से अधिक के भुगतान पर अडंग़ा लगा दिया है। भुगतान नहीं आने पर किसानों ने खरीद केन्द्र में संपर्क किया तो पता लगा कि उनके खातों के अंकन में तकनीकी त्रुटि हुई है, फिर से पासबुक की प्रमाणित छायाप्रति जमा करनी पड़ेगी। किसानों ने आरोप लगाया कि चार से पांच बार इसे जमा किए जाने के बाद भी भुगतान नहीं आया। इधर राजफैड ने क्रय-विक्रय सहकारी समिति को निर्देश दिए कि वह भुगतान में फेलियर हुए किसानों के पासबुक की छायाप्रति लेकर संशोधित खाते की सूची के साथ केन्द्रीय सहकारी बैंक में नेफ्ट अथवा आरटीजीएस के मार्फत जमा कराएं। समिति के अधिकारियों का कहना है कि संशोधित खातों की सूची बैंक में प्रेषित कर दी गई है, जल्द ही राशि काश्तकारों के खातों में आ जाएगी।
समर्थन मूल्य पर मूंग की तोलाई करा चुके लगभग दो सौ किसानों के खाता अंकन में साफ्टवेयर की तकनीकी त्रुटि ने उन्हें संकट में डाल दिया है। गोगानाडा के मुकेश, राकेश, बिस्सू व रोल क्षेत्र के काश्तकार भंवरलाल ने बताया कि उनके मूंग की तोलाई क्रमश: सात व आठ अक्टूबर को हुई थी, लेकिन एक माह बाद उन्हें पता नहीं कि उनके खातों में पैसा कब आएगा। खरीद केन्द्र में आने पर बताते हैं कि खातों के अंकन में तकनीकी त्रुटि होने से ऐसा हो गया, पासबुक की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करा दो, पैसा आ जाएगा।
पड़ताल में निकला यह गड़बड़झाला
किसानों द्वारा विरोध जताने के बाद पूरे प्रकरण की पड़ताल की गई तो चौंकानेवाली जानकारी सामने आई। पता चला कि भामाशाह कार्ड के अंकन के दौरान उसमें दर्ज खातों की डीजिट संख्या व राजफैड की ओर से साफ्टवेयर में दर्ज होने वाले खातों की संख्या एक अंक का अंतर हो जाता है। इससे राजफैड का साफ्टवेयर भामाशाह कार्ड में दर्ज हुए जनधन के खाते के डीजिट संख्या को गलत दर्शा देता है। इसकी वजह से किसानों के खातों में राशि अब तक जमा नहीं हो पाई। इस संबंध में को-ऑपरेटिव बैंक के जनरल मैनेजर बाबूलाल भाकल ने बताया कि खातों के अंकन में सॉफ्टवेयर की तकनीकी त्रुटि की वजह से ही किसानों का बकाया भुगतान जमा नहीं हो पाया था। अब इस पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
यह भी एक कारण आया सामने
किसानों में कइयों के भामाशाह कार्ड बनाए जाने के दौरान जनधन खाता खोलकर उसी का अंकन कर लिया गया। सरकार के मूंग खरीद में भामाशाह कार्ड की अनिवार्यता से किसानों को इसी कार्ड से ही अपने बेचान के लिए ईमित्र से पंजीकरण कराने पड़े। पंजीकरण में कार्ड में अंकित खातों का ही इन्द्राज किया गया। जनधन खाते में 50 हजार रुपए से अधिक की राशि जमा कराने के लिए इसकी सीमा बढ़ानी होती है। जानकारी के अभाव में जनधन खातों की राशि जमा करने की सीमा किसानों की ओर से नहीं बढ़ाई जा सकी। इससे कई जनों के खातों में राशि जमा नहीं हो पाई।
राजफैड ने दिए निर्देश
राजफैड की प्रबन्ध संचालक वीणा प्रधान ने क्रय-विक्रय समिति को निर्देश दिए है कि समिति फेलियर किसानों से बैंक खातों की पासबुक की प्रमाणित छायाप्रति प्राप्त कर उसमें सावधानी से संशोधन कर सूची मय छायाप्रति केन्द्रीय सहकारी बैंक की शाखा को भेज कर लाभार्थी के खातों में आरटीजीएस एवं एनएफटी कराना सुनिश्चित करे। यदि किसी समिति का खाता केन्द्रीय सहकारी बैंक में नहीं है तो समिति की ओर से केन्द्रीय सहकारी बैंक की शाखा में ही खाता खुलवाने के साथ ही केन्द्रीय बंैक के माध्यम से आरटीजीएस व एनएफटी कराकर सूचित करें।
इनका कहना है...
&किसानों की छाया प्रतियां प्राप्त कर संशोधित खातों की सूची बैंक को भेज दी गई है। जल्द ही काश्तकारों के खातों में राशि जमा हो जाएगी।
रामनिवास सिंवर, खरीद केन्द्र प्रभारी, को-ऑपरेटिव माकेटिंग सोसायटी नागौर

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