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नागौर

बलात्कार के उदयपुर तो सामूहिक बलात्कार के अलवर में सबसे अधिक मामले

– नागौर की स्थिति अलवर, भीलवाड़ा, उदयपुर, झालावाड़, अजमेर व डूंगरपुर से अच्छी
– महिला अपराध के मामले में अलवर जिला सबसे आगे
– पिछले पांच साल में प्रदेश में बलात्कार के 25 हजार, छेड़छाड़ के 45 हजार से अधिक मामले हुए दर्ज
– प्रदेश में नागौर सहित समस्त जिलों में हत्या से जुड़े 155 लम्बित प्रकरणों का नहीं हुआ खुलासा

नागौरJul 06, 2024 / 12:03 pm

shyam choudhary

नागौर. प्रदेश में वर्ष दर वर्ष बढ़ रही महिला अपराधों की संख्या चिंता का विषय बन रही है। प्रदेश में पिछले पांच साल में महिला अपराध बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, हत्या, छेड़छाड़, अपहरण/व्यपहरण, दहेज हत्या एवं दहेज प्रताडऩा से जुड़े कुल 2 लाख 223 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से पुलिस ने एक लाख, 4 हजार 743 प्रकरणों में चालान पेश कर पाई, जबकि 89,829 प्रकरणों में एफआर दे दी। 5,350 प्रकरण ऐसे हैं, जो पेंडिंग चल रहे हैं।
विधानसभा में राजस्थान सरकार के गृह विभाग की ओर से दी गई महिला अपराधों जानकारी के अनुसार एक जनवरी 2019 से 31 दिसम्बर 2023 तक 2 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या छेड़छाड़, दहेज प्रताडऩा व बलात्कार के मामलों की है। इसमें भी जिलावार देखें तो पिछले पांच साल में सबसे अधिक 1277 बलात्कार के मामले उदयपुर जिले में दर्ज किए गए हैं, जबकि सामूहिक बलात्कार के सर्वाधिक 418 मामले अलवर जिले में दर्ज किए गए। बलात्कार के सबसे अधिक मामले दर्ज करने वाले उदयपुर में सामूहिक बलात्कार के मामले मात्र 72 ही हैं। इसी प्रकार हत्या सबसे अधिक 295 मामले अलवर जिले में दर्ज किए गए, तो दहेज हत्या के भी सबसे अधिक 135 मामले अलवर में ही हुए हैं। वहीं छेड़छाड़ के सबसे अधिक 1795 मामले अजमेर में दर्ज किए गए हैं। इसी प्रकार झालावाड़ में 1716, भीलवाड़ा में 1543, अलवर में 1445 तथा नागौर (डीडवाना-कुचामन सहित) में 1465 मामले छेड़छाड़ के दर्ज किए गए हैं।
बड़े जिलों में छोटे जिलों से कम है महिला अपराध

सरकार की ओर से खींवसर के पूर्व विधायक हनुमान बेनीवाल की ओर से लगाए गए प्रश्न के जवाब में दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश के छोटे जिलों की अपेक्षा बड़े जिलों में अपराध कम हुआ है। पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, नागौर, जोधपुर जैसे बड़े जिलों में अलवर, भीलवाड़ा, उदयपुर, अजमेर, झालावाड़, भरतपुर, धौलपुर जैसे छोटे जिलों की अपेक्षा महिला अपराध कम है।
बांसवाड़ा की स्थिति सबसे अच्छी

महिलाओं के लिहाज से बांसवाड़ा जिले की स्थिति काफी अच्छी है। पिछले पांच सालों में बांसवाड़ा में बलात्कार के मात्र 14, सामूहिक बलात्कार के 4, हत्या के 22, छेड़छाड़ का एक, अपहरण के 3, दहेज हत्या का एक, दहेज प्रताडऩा का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। यानी बलात्कार, छेड़छाड़, अपहरण व दहेज हत्या जैसे अपराधों के मामले पांच साल में पांच भी नहीं हुए। जबकि बांसवाड़ा जिला टीएसपी क्षेत्र में आता है, शिक्षा का स्तर काफी कम है।
वर्ष 2019 से 2023 तक प्रदेश में दर्ज महिला अपराधों के प्रकरणों की संख्या

शीर्षक – दर्ज प्रकरण – चालान – एफआर – पैंडिंग

बलात्कार – 25379 – 14001 – 10523 – 855
सामूहिक बलात्कार – 6999 – 3449 – 3281 – 269

हत्या – 3046 – 1788 – 1088 – 169

छेड़छाड़ – 45351 – 25877 – 18454 – 1020

अपहरण/व्यपहरण – 31208 – 9974 – 19818 – 1416
दहेज हत्या – 2366 – 1591 – 674 – 101

दहेज प्रताडऩा – 85874 – 48363 – 35991 – 1520

हत्या के 155 मामलों का नहीं हुआ खुलासा

प्रदेश में पिछले पांच साल में दर्ज हत्या से जुड़े 155 मामले ऐसे हैं, जो पुलिस के लिए ब्लाइंड मर्डर बन गए। इसमें चार नागौर के तथा दो डीडवाना-कुचामन जिले के भी हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि इनमें 101 मामले ऐसे हैं, जिनमें विशेष टीमों का गठन किया गया, ताकि हत्या के मामलों का खुलासा हो सके, लेकिन पुलिस को आज तक सफलता नहीं मिली है।

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