यूजीसी की टीम ने किया निरीक्षण

पांच सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी ने तीन दिवसीय दौरे के तहत कस्बे की जैन विश्व भारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) का

By: Sandeep Pandey

Published: 13 Mar 2018, 06:33 PM IST

लाडनूं. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की पांच सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी ने तीन दिवसीय दौरे के तहत कस्बे की जैन विश्व भारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) का निरीक्षण किया। टीम ने विश्वविद्यालय के जैनोलोजी विभाग, जीवन विज्ञान विभाग, समाज कार्य विभाग, प्राकृत एवं संस्कृत भाषा विभाग, अहिंसा व शांति विभाग, अंग्रेजी विभाग, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय आदि का निरीक्षण करते हुए पूर्ण जानकारी प्राप्त की। टीम में कमेटी अध्यक्ष कटक की रवेनशॉ युनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. प्रकाश सी सारंगी, यूजीसी की सचिव सुरेश रानी, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के जाकिर हुसैन, एजुकेशन स्टडी सेंटर की प्रो. मिनाक्षी पांडा, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के समाज विज्ञान के पूर्व डीन प्रो. गणेश कांवडिया व डा. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के रिसर्च डीन प्रो. आरकेएस धाकड़ शामिल हैं। इस मौके पर संस्थान के प्रस्तुतिकरण के लिए एक बैठक आयोजित की गई। इसमें शोध निदेशक प्रो. अनिल धर द्वारा पीपीटी के माध्यम से संस्थान की समस्त गतिविधियों के बारे में संक्षेप में जानकारी दी गई। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि यहां अनेकांत एवं अहिंसा तथा मानवता के लिए शांतिपूर्ण सह अस्तित्व एवं सहिष्णुता पर बल देने एवं श्रमणिक संस्कृति के उच्च आदर्शों को बढ़ावा देने तथा मानव जाति के लिए सही आचरण व ज्ञान के प्रसार पर पूरा जोर दिया गया है। यह संस्थान प्राकृत भाषा और साहित्य, पाली, संस्कृत, अपभ्रंश, जैनोलॉजी एवं तुलनात्मक धर्म व दर्शन के अध्ययन, ज्योतिष , मन्त्रविद्या, अवधान विद्या, योग ? और साधना, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, रंग थेरेपी, चुंबक थेरेपी, जीवन विज्ञान और प्रेक्षा ध्यान के क्षेत्र में ज्ञान के अनुसंधान और प्रगति में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान ग्रामीण राजस्थान के गरीबी से छुटकारा दिलवाने और पिछड़े क्षेत्र की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने का महती कार्य भी कर रहा है। इसके अलावा इस विश्वविद्यालय ने सामाजिक सद्भावना, महिला साक्षरता, वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को लोकप्रिय बनाने और विशेष रूप से योग विज्ञान और ध्यान में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए बुनियादी सुविधायें, उत्कृष्ट केंद्रीय पुस्तकालय और रिप्रोग्राफिक सुविधाएं, केंद्रीकृत और विभागीय कम्प्यूटर प्रयोगशालाएं, उच्च शोध और गुणवत्तायुक्त अनुसंधान, प्रकाशन, उत्कृष्ट प्लेसमेंट रिकार्ड, कुशल दूरस्थ शिक्षा का संचालन, पिछड़े क्षेत्र के सामाजिक दृष्टि से वंचित वर्ग की लड़कियों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने और आसपास के करीब आधे दर्जन पास के गांवों में कुशलता से संगठित विस्तार सेवाओं की पूर्ति करता है। बैठक में कुलसचिव वीके कक्कड़, प्रो. आरके यादव, प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी,प्रो. समणी ऋ जुप्रज्ञा, डा. समणी संगीत प्रज्ञा, डा. समणी अमलप्रज्ञा, डा. श्रेयांस प्रज्ञा, डा. समणी मल्लीप्रज्ञा, डा. समणी कुसुम प्रज्ञा, डा. युवराज सिंह खंगारोत, डा. पी सिंह, डा.जुगल किशोर दाधीच, डा. बी. प्रधान, प्रो. बीएल जैन आदि उपस्थित थे। गौरतलब है कि यह पांच सदस्यीय दल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम के सेक्शन 12-बी के तहत जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के विकास व आवश्यकताओं के अनुसार अनुदान की उपयोगिता एवं स्वीकृति दिए जाने के सम्बंध में यहां निरीक्षण के लिए आया है।

Sandeep Pandey Desk
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