scriptWeddings took place but were very expensive due to the election season. | VIDEO...शादियां तो हुई, लेकिन चुनावी सीजन के चलते काफी खर्चीली रही | Patrika News

VIDEO...शादियां तो हुई, लेकिन चुनावी सीजन के चलते काफी खर्चीली रही

locationनागौरPublished: Nov 24, 2023 10:05:26 pm

Submitted by:

Sharad Shukla

शादियां तो हुई, लेकिन चुनावी सीजन के चलते काफी खर्चीली रही

Nagaur news
Weddings took place but were very expensive due to the election season.

-इस बार गाडिय़ां 40 प्रतिशत, कैटरर्स भी 40-45 प्रतिशत तक रहा मंहगा
- मनमर्जी की दर देने के बाद भी नहीं मिल रहे काम करने के लिए अतिरिक्त श्रमिक
नागौर. विधानसभा चुनाव के ठीक दो दिन पहले ही देवउठनी के सावा पर हुई शादियां इस बार बेहद मंहगी रही। शादी का बजट 35-40 प्रतिशत बढऩे के साथ ही होटल, खाद्य सामग्री, गाडिय़ों की व्यवस्था करने में ही वर एवं वधु पक्ष को पसीने आ गए। शादियां तो हुई और चार से पांच गुना की दर पर गाडिय़ों की व्यवस्था भी बमुश्किल हुई, लेकिन इसके प्रबंधन में इस वर्ष दोनों पक्षों को काफी मुश्किलें हुई। स्थिति यह रही कि चुनाव के चलते कई टेंट हाउस के सामान पहले से ही अग्रिम बुकिंग के चलते जहां हाउसफुल रहे, वहीं गाडिय़ों के लिए मुंहमांगी दर देने के बाद भी कई जगहों पर वर एवं वधु पक्ष के घरवाले इसके लिए परेशान नजर आए। स्थिति यह रही कि पहले से हुई बुकिंग के बाद भी ऐन मौके पर शादियों के घरवालों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़े। कारण बताते है कुर्सियों और शामियाने के साथ हलवाई तक नहीं मिल पा रहे है। उपलब्ध रहे हलवाई पहले ही बुक हो चुके थे। इन हलवाइयों के पास समय भी नहीं है, और काम लेने के लिए। हलवाई पन्नालाल ने बताया कि वह केवल जरूरी फोन ही उठा रहे हैं, क्योंकि वह हर किसी को मना भी नहीं सकते हैं। इसलिए इन्होंने फोन उठाना ही बंद कर दिया है। हालांकि इसकी कमी को देखते हुए शादी वाले समारोह को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए बाहर से हलवाई तक बुलवाए गए। बड़े टेंट हाउस वाले तो कुर्सियां और शामियानों की व्यवस्था अपने निकटवर्ती जिलों में से करने में लगे रहे। इसके चलतेे इस बार गाडिय़ां 35-40 से प्रतिशत, हलवाई , कैटरर्स 40-45 प्रतिशत एवं फूल भी 25-30 प्रतिशत अधिक की दर पर व्यवस्था करनी पड़ी। जो भी इस बार चुनाव से ठीक पहले हुई देवउठनी एकादशी की शादियों ने घरवालों की जेबें ढीली कर दी है। वर एवं वधु पक्ष के लोगों का कहना था कि अभी तो जैसे-तैसे शादी का कार्य संपन्न कराना ही है। अब इसके लिए कितने भी पैसे लगें, लेकिन शादी को तो रोका नहीं सकता है। इस बार की शादी अन्य वर्षों की अपेक्षा कुल मिलाकर दोनों ही पक्षों के लिए काफी खर्चीली साबित हुई।

ट्रेंडिंग वीडियो