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ऐसा क्या हो गया कि सभापति को थमा दी गई नोटिस......

Nagaur. सभापति को जमीन से कब्जा हटाने का कोर्ट ने दिया नोटिस
-खसरा नंबर 355 का मामला, नोटिस में 700 वर्गफुट की जमीन को सरकारी कार्यालय एवं आवास के लिए रिकार्ड में सुरक्षित बताते हुए इस पर अवैध कब्जा करने का लगाया आरोप, मंगलवार सुबह दस बजे पहले कब्जा कर स्पष्टीकरण देने के निर्देश, नहीं तो फिर सभापति के खिलाफ दी कार्रवाई की चेतावनी

नागौर

Published: June 28, 2022 10:16:54 pm

नागौर. कांग्रेस कार्यालय के पास स्थित एक भूखण्ड के स्वामित्व को लेकर नया मोड़ आ गया है। इस भूखण्ड को जहां सरकारी आवास एवं कार्यालय के रिकार्ड में सुरक्षित बताते हुए इस पर अवैध कब्जा व अतिक्रमण करना बताते हुए सभापति मीतू बोथरा के नाम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी कर दिया गया है। सभापति बोथरा को नोटिस के माध्यम से चेताया गया है कि अवैध कब्जा व चारदीवारी निर्माण मंगलवार को सुबह दस के पहले हटा लें, नहीं तो फिर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए उसे हटाने के साथ ही इसका खर्चा-हर्जाना भी वसूल किया जाएगा। कब्जा हटाने के साथ ही इस पर स्पष्टीकरण पेश करने के लिए कहा गया है। इस संबंध में सभापति बोथरा की ओर से पूरी कार्रवाई राजनीतिक द्वेषवश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास संबंधित भूखण्ड के पूरे दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसके बाद भी इस पर उनके खिलाफ कार्रवाई हुई तो संबंधितों पर इसकी जवाबदेही होगी। सभी के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
कार्यालय तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से 23 जून को सभापति मीतू बोथरा के नाम नोटिस में कहा गया है कि खसरा नंबर 355 गैर मुमकिन आबादी भूमि सरकारी कार्यालय एवं आवास के लिए सुरक्षित होने के बाद भी उस भूखण्ड के सात सौ वर्गफुट भूमि पर अनाधिकृत तरीके से चारदीवारी का निर्माण कर लिया गया। यह अवैध कब्जा या अतिक्रमण की श्रेणी में आता है। आरक्षित क्षेत्र में स्थित उस भूमि पर अनाधिकृत तरीके से किया गया निर्माण गैर कानूनी कब्जा के दायरे में आता है। इसलिए इस पर कार्रवाई का क्षेत्राधिकार राजस्व न्यायालय तहसीलदार नागौर का है। इस निर्माण को मंगलवार सुबह दस बजे से पहले हटाने के आदेश देते हुए कहा गया कि अवैध कब्जा हटाकर इस पर रिपोर्ट प्रस्तुत करें, नहीं तो फिर क्यों नहीं राजकीय खर्चे से न्यायालय तहसीलदार की ओर से हटाया जाए, और इसका पूरा व्यय भी वसूल किया जाए। इसके साथ ही अन्य सक्षम धाराओं में उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए। इस नोटिस को लेकर सभापति बोथरा ने पलटवार करते हुए कहा कि उनकी ओर से वर्ष 2008 में यह भूखण्ड नरेन्द्र कुमार सखलेचा से खरीदा गया था। सखलेचा को यह भूखण्ड वर्ष 2002 में तत्कालीन कलक्टर निरंजन आर्य की ओर से भूखण्ड के बदले भूखण्ड में दिया था। इसके पश्चात तत्कालीन कलक्टर समिति शर्मा के कार्यकाल के दौरान रामकिशोर की ओर से निगरानी पेश करने पर नगरपरिषद को रिमाण्ड भेज दिया कि वह सुनवाई कर निस्तारण करे। इस पर नगरपरिषद की ओर से मीतू बोथरा एवं सोनी बोथरा के नाम नोटिस जारी की गई। नोटिस जारी होने के बाद मीतू बोथरा की ओर से पेश होकर बताया कि उस जमीन के दस्तावेज नागौर अरबन को-आपरेटिव बैंक में बंधक हैं। इस पर नगरपरिषद की ओर से कागजातों के बैंक में बंध्क होने का हवाला देते हुए सुनवाई करने में असमर्थता जता दी गई थी। इसके पश्चात इसे बोथरा की ओर से निदेशालय में चैलेंज किया गया। तत्कालीन निदेशक पुर्षोत्तम बियाणी के समक्ष प्रकरण जाने के बाद वर्ष 2015 में फैसला किया गया कि आवंटी के कागजात सही हैं। इसके बाद करीब तीन माह पूर्व सभापति बोथरा की ओर से नगरपरिषद में निर्माण की स्वीकृति ली गई थी। बोथरा का कहना है कि इस दौरान पीडल्यूडी की ओर से उनके प्लाट के सामने दीवार बना दिए जाने के बाद उनकी ओर से वैध कागजातों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया तो सभी ने इस कार्रवाई से अनभिज्ञता जता दी। इस पर दीवार को बोथरा की ओर से तोड़ दिया गया। बोथरा का कहना है कि इस संबंध में दो बार सीमांकन के लिए कमेटियां बनी, लेकिन एक भी कमेटी की रिपोर्ट मांगे जाने के बाद भी अब तक नहीं दी गई। इसके अलावा करीब डेढ़ माह पूर्व तहसीलदार की ओर से कोर्ट में केविएट लगाए जाने के बाद बोथरा की ओर से वर्ष 2002 से 2022 तक के समस्त दस्तावेज मेल कर दिए गए थे।
23 को जारी 27 को शाम मिली नोटिस
बोथरा ने बताया कि यह नोटिस 23 जून को जारी किया गया, और उनको 27 जून की शाम आठ बजे तामील कराया गया। 28 को सुबह दस बजे से पहले हटाने के लिए कहा गया। इसके साथ ही इस नोटिस में कोई डिस्पैच नंबर आदि भी नहीं है। इससे स्पष्ट है कि यह कार्रवाई केवल राजनीति विद्वेषवश उनको परेशान करने के लिए की जा रही है।

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