यह कैसी सरकार जो सांस्कृतिक धरोहर को खत्म करने में लगी है...!

Sharad Shukla

Publish: Feb, 11 2019 12:30:22 PM (IST) | Updated: Feb, 11 2019 12:30:23 PM (IST)

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

Nagaur.पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मेले में आने वाले बैलों (गोवंश) की संख्या आधी रह गई है। इससे भी बुरी स्थिति मेले में बिकने वाले बैलों की है, मेले में आने वाले गोवंश की तुलना में बिकने वाले गोवंश की संख्या एक चौथाई तक सिमट गई है। मेले पर मंडरा रहे संकट का प्रमुख कारण गोवंश के परिवहन पर लगी रोक है, जिसके चलते बाहरी राज्यों से आने वाले पशुपालक व व्यापारी यहां का रुख ही नहीं करते। बिक्री नहीं होने के कारण स्थानीय पशुपालक भी अब मेले में पहले की बजाए कम आने लगे हैं। वर्ष 2006 में रामदेव पशु मेले में जहां 22 हजार 134 पशुओं की आमद हुई थी, जिसमें से 10 हजार 813 गोवंश थे। वहीं वर्ष 2015 कुल पशुओं की संख्या घटकर 11 हजार 272 हो गई, इसमें गोवंश की संख्या 5 हजार 142 थी। ऐसे ही वर्ष 2006 में बिकने वाले कुल पशु 12 हजार 655 थे, जिसमें गोवंश की संख्या 8 हजार 155 थी। वर्ष 2015 में बिकने वाले कुल पशुओं की संख्या 5 हजार 34 हजार रह गई, इसमें गोवंश की संख्या मात्र 2 हजार 647 थी। दोनों आंकड़ों को देखें तो गोवंश की बिक्री में आई गिरावट स्पष्ट नजर आ रही है। इस बार सुरक्षा के इंतजाम तो हैं, लेकिन अन्य प्रबन्धों की स्थिति नगण्य रही है।

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