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कहां है सरकार...!अब भी मर रहे लम्पी से गोवंश

Nagaur. सात हजार से ज्यादा गोवंश कि जिले में मौत होने के बाद भी अब तक नहीं आई इसकी कोई कारगर दवा
- अभी भी लक्षणों के आधार पर पशु चिकित्सक लंपी पीडि़त पशुओं का कर रहे इलाज
- तीसरी बार हुए सर्वे में 40 हजार से ज्यादा पशु पाए गए लंपी से पीडि़त
- पशु चिकित्सकों के खाली पदों से लंपी पीडि़त पशुओं के इलाज में हो रही मुश्किल
- पशुओं की बीमारी के इस आपातकालीन दौर में भी सरकार ने नहीं भरे पशु चिकित्सकों के खाली पद

नागौर

Published: September 12, 2022 08:42:45 pm

नागौर. जिले में सात हजार से ज्यादा पशुओं की मौत के बाद भी अब लम्पी पीडि़त पशुओं के लिए कोई कारगर दवा नहीं मिलने के साथ ही खाली पदों ने मुश्किल बढ़ा दी है। हालांकि लक्षणों के आधार पर पशुपालन विभाग के चिकित्सक पशुओं का इलाज करने में लगे हुए हैं, लेकिन फिर भी बीमारी पर पूरी तरह से लगाम अब तक नहीं लग पाई है। अभी भी लम्पी पीडि़त गोवंशों के मिलने व मरने का सिलसिला थमा नहीं है। इधर पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने दावा लम्पी की रफ्तार पर अब लगाम लगने का दावा करते हुए बताया कि जिले में इस रोग से पीडि़त होने के बाद दुरुस्त होने वाले गोवंशों की संख्या जहां 37 हजार तक पहुंच गई है, वहीं अभी भी करीब 45 हजार लम्पी पीडि़त पशु उपचाररत हैं। इससे स्थिति का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।
पशुओं में फैली लम्पी पीडि़त गोवंशों के लिए उपयुक्त दवा नहीं होने का दंश जिले के पशु पालकों को झेलना पड़ा। जिले में लगभग 90 प्रतिशत से ज्यादा गांवों के पशुपालकों के पशु लम्पी का शिकार होकर अपनी गंवा चुके हैं। हालांकि प्रशासनिक आंकड़ों में यह संख्या केवल सात से साढ़े सात हजार बताई जाती है, लेकिन ग्रामीणों की माने तो यह आंकड़ा चार से पांच गुना ज्यादा है। यदि ग्रामीणों का आंकड़ा सही है तो फिर जिले में मरने वाले पशुओं की संख्या सात या साढ़े सात हजार नहीं, बल्कि तीस से पैतीस हजार तक पहुंच जाती है। ग्रामीणों की माने तो हालात अभी भी पूरी तरह से सुव्यवस्थित नहीं हो पाए हैं। इस मुश्किल हालात में अकेले नागैर रेंज एरिया में ही में खाली पदों को सरकार ने नहीं भरा। इसकी वजह से विभिन्न क्षेत्रों में पशुपालकों के पशुओं को सुव्यवस्थित इलाज नहीं मिल सका। फलस्वरूप कई पशुओं की मौत हो गई।
खाली पदों ने भी बढ़ाई परेशानी
वायरस जनित बीमारी लम्पी की रोकथाम में पशुपालन विभाग में पशु चिकित्सकों व पशुधन सहायकों के खाली पदों ने भी मुश्किल बढ़ा दी। अकेले नागौर रेंज के पशुपालन एरिया में पशु चिकित्सकों व पशुधन सहायकों के खाली पदों की वजह से हालात और ज्यादा मुश्किल हो गए। सरकार ने इस आपातकालीन दौर में भी इन खाली पदों को भरने की जहमत नहीं उठाई।
खाली पदों की स्थिति पर नजर
पदनाम खाली पद
उपनिदेशक दो
एसवीओ 18
वीओ 78
वीए 27
एलएसए 62

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Where is the government... Still the cows from the dying lumpi

क्या कहते हैं चिकित्सक
लम्पी पीडि़त पशुओं के संदर्भ में पशुपालन विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेन्द्र किरडोलिया से बातचीत हुई तो उन्होंने कहा कि एलएसडी से प्रभावित गोवंश में रोग से पशुओं सही होने के बाद भी निमोनिया श्वसन संबंधी विकार। लौह एवं अन्य खनिज लवण की कमी से मिट्टी खाने की प्रवृत्ति का बढऩा। गहरे घाव हो जाना। इनमें मक्खी बैठने से कीड़े लग जाना। शारीरिक दुर्बलता। दुग्ध उत्पादन में अत्याधिक कमी के साथ ही शारीरिक दुर्बलता के कारण गोवंशों की स्थिति विकट हुई है। इसके लिए पशुपालक को धैर्य के साथ झोलाछाप की जगह विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों से इलाज कराना चाहिए। कई बार पशु पालक इन झोलाछाप के चक्कर में पड़ जाते हैं। झोलाछाप हायर लेवल की एंटीबायोटिक्स के साथ बिना सोचे, समझे इंजेक्शन लगाकर पशुओं को और ज्यादा बेकार कर देते हैं। इसका पशुपालकों को ध्यान रखना होगा, तभी गोवंश पूरी तरह से दुरुस्त हो सकेंगे।

इनका कहना है...
लम्पी पीडि़त पशुओं के इलाज के लिए चिकित्सा प्रभारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके लिए जिले की स्थिति पर नजर रखने के लिए जिला स्तरीय टीम बनी है। इसकी ओर से लम्पी पीडि़त पशुओं के इलाज की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। फिर भी किसी पशुपालक को परेशानी हो तो वह नियंत्रण् कक्ष फोन कर सकता है।
डॉ. महेश कुमार मीणा, संयुक्त निदेशक पशुपालन नागौर

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