Women's Day Special: राजस्थान की ये नेत्रहीन बेटी दूसरो को दिखा रही रौशनी

neha soni | Publish: Mar, 08 2019 05:10:24 PM (IST) Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

एक साधारण किसान के घर जन्मी नेत्रहीन बेटी ने शिक्षा के बूते पर राजपत्रित अधिकारी तक किया सफर तय

नागौर।
'आंधियों से कह दो अपनी औकात में रहो, हम पंखों से नहीं हौसलों से उड़ान भरते हैं।' किसी शायर की यह पंक्तियां हौसलों की उड़ान भरने वाली एक शख्सियत ने चरितार्थ कर दिखाई है। ठेठ ग्रामीण परिवेश में एक साधारण किसान के घर जन्मी नेत्रहीन बेटी ने शिक्षा के बूते पर राजपत्रित अधिकारी तक का सफर तय किया है। जो अपने आप में एक प्रेरणादायी मिशाल है। नागौर जिले के गाजू गांव के किसान टोमसिंह शेखावत को जब पहली संतान होने की सूचना मिली तो एक बार खुशी तो हुई लेकिन जब यह पता चला की जन्म लेने वाली पहली संतान नेत्रहीन है तो उन पर मानो पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन इस बीच शिक्षा रूपी आशा की किरण भी जगी। जिसके बूते पर आज उनकी नेत्रहीन बेटी अनूप शेखावत मूण्डवा के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य के पद तक पहुंची है। रेडिय़ो पर एक वार्ता सुनते हुए उन्हें पता चला कि जोधपुर में नेत्रहीन बच्चों के लिए शिक्षण की व्यवस्था है। यह जानकारी उन्होंने शेखावत के पिता को दी। अनूप शेखावत के पिता ने रिश्ते में बहनोई खंवर निवासी छोगसिंह जो कि उस समय जोधपुर काजरी में कार्यरत थे उनके सहयोग से 1987 में नेत्रहीन विकास संस्थान जोधपुर में अनूप शेखावत प्रवेश दिला दिया। शेखावत ने बताया कि उस समय ग्रामीण क्षेत्र में राजपूत समाज में लड़कियों को पढ़ाने में कोई रूची नहीं लेता था। जब छोटी उम्र में पढऩे के लिए बाहर भेजा तो लोग अपने हिसाब से मन घड़ंत बाते बनाने लगे कि नेत्रहीन होने के कारण पता नहीं कहां छोड़ा होगा। लेकिन उनके पिता ने केवल अपनी बेटी की पढ़ाई का ही ध्यान रखा। शिक्षा अनूप शेखावत की अधिकांश शिक्षा ब्रेल लिपि के माध्यम में ही हुई है।

ब्रेल लिपि के माध्यम से हुई शिक्षा

आज भी वह जब पढ़ाती है तो बे्रल लिपि की पुस्तक से ही पढ़ाती है। आठवीं की पढ़ाई जोधपुर से सम्पन्न करने के बाद आगे के लिए राजस्थान में कहीं भी नेत्रहीन बालिकाओं के लिए व्यवस्था नहीं होने के कारण राष्ट्रीय बृजानंद अंध कन्या विद्यालय विकासपुरी नई दिल्ली में प्रवेश लिया। वहां से सीबीएसई माध्यम से दसवीं व बारहवीं की पढ़ाई की। स्नातक की पढ़ाई के लिए फिर जोधपुर लौटना पड़ा। जोधपुर के कमला नेहरू महिला महाविद्यालय से हिन्दी साहित्य, राजनितिक विज्ञान तथा कंठ संगीत के विषय से स्नातक किया। इसके बाद हिन्दी साहित्य से एमए तथा एमफिल की पढ़ाई की। बोर्ड की कक्षाओं से लेकर बीएड, एमए तक की क्लासों में हमेशा प्रथम श्रेणी से उत्र्तीण रही है। एमए में तो अपने कॉलेज में तीसरे स्थान पर रही। केवल अपनी पढ़ाई ही नहीं बच्चों की पढ़ाई पर भी उतना ही ध्यान देती है।

पहली बार प्रधानाचार्य का पद संभाला

7 सितम्बर 2017 को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मूण्डवा में पहली बार प्रधानाचार्य का पद संभाला। लेकिन इस दौरान एक साथ दो महिलाओं के पद स्थापन के कारण उनके सामने समस्या खड़ी हो गई थी। तब राजस्थान पत्रिका ने ही इस मुद्दे को प्रकाशित कर विभाग का ध्यान आकर्षित किया तब समाधान संभव हुआ। परिवार व्याख्याता बनने के बाद वर्ष 2010 में गृहस्थी भी बसी। बासनी खलील निवासी उदयसिंह सोलंकी के साथ उनकी शादी हुई। वर्तमान में आठ साल का बच्चा है। ससुराल मेंं भी पढ़ाई का माहौल नहीं था उनके पति भी साक्षर ही हैं। पढ़ाई का महत्त्व जान चुकी शेखावत ने अपने जेठ की पुत्री नव्या कंवर को अपनी बेटी के समान साथ रखते हुए पढ़ा रही है। जो वर्तमान में बारहवीं में पढ़ रही है तथा हॉकी में नेशनल खिलाड़ी भी रही है। संदेश अपनी कमियों को स्वीकारते हुए आगे बढऩा चाहिए। उनसे हार न मानें। विद्यालय में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अलग से व्यवस्था है। यदि कोई नेत्रहीन बालक-बालिका है तो मेरे से सम्पर्क करें मैं उसको ब्रेल लिपि में पढऩा सिखाउंगी।

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