आप भी जानिए नोटबंदी को लेकर क्या कहती है नागौर की जनता

90 फीसदी लोगों का कहना है नोटबंदी करने का उद्देश्य नहीं हुआ पूरा

By: Devendra Singh

Published: 08 Nov 2017, 11:29 AM IST

नागौर. केन्द्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी को आठ नवम्बर को एक साल पूरा हो गया। जिस उद्देश्य को लेकर नोटबंदी की गई थी क्या वह पूरा हो पाया? क्या भ्रष्टाचार पर लगाम लग पाई, नोटबंदी से कैशलेश बैंकिंग को बढ़ावा मिला क्या? काला धन बाहर आया क्या? ऐसे बहुत से सवालों के जबाव जानने के लिए मंगलवार को जब शहरवासियों से बात की गई तो 70 फीसदी लोगों ने नोटबंदी के फैसले को गलत ठहराया। लोगों का कहना था कि नोटबंदी से कुछ सुधार नहीं हुआ लोगों को परेशानी ही मिली। कुछ लोगों का कहना था कि भ्रष्टाचार कुछ हद तक कम हुआ है, जबकि कुछे का कहना था कि भ्रष्टाचार को अधिक बढ़ावा मिला है। बातचीत में सबसे खास बात यह सामने आई कि 90 फीसदी लोगों का कहना था कि जिस उद्देश्य को लेकर नोटबंदी कर पब्लिक को परेशान किया गया वह आज तक पूरा नहीं हो पाया ।

नोटबंदी फेल रही
&नोटबंदी का फैसला पूरी तरह फेल साबित हुआ है।
भ्रष्टाचार आज भी उतना ही है। आज भी बाजारों में दुकानदारों का नोटबंदी को लेकर रोना बरकरार है। कैशलेस की बात करें तो कुछ हद तक बढ़ावा मिला है। नोटबंदी जैसा फैसला दुबारा लेने के लिए सरकार सोचेगी भी नहीं।
रणजीत धोलिया, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष

 


पूरा नहीं हुआ उद्देश्य
जिस उद्देश्य को लेकर नोटबंदी की गई वह पूरा नहीं
हो पाया। बाजार इसका असर आज भी देखने को मिल रहा है। नोटबंदी ने मितव्यता सिखा दी है। ई-पेमेंट सुविधा जनक है, लेकिन सुरक्षा के मापदण्ड बढ़ाने चाहिए। नोटबंदी से भ्रष्टाचार पर काफी हद तक लगाम लगी है।
अशोक मूण्दड़ा, बाहेतियों की गली

 

 

बेकसूर लोगों की हुई मौत
नोटबंदी का फैसला सही था, लेकिन उचित मैनेजमेंट
नहीं होने से बैंकों की लाइनों में लगने वाले बेकसूर सौ से अधिक गरीब लोगों की मौत दुखदाई रही। नोटबंदी से ई-पेमेंट को बेहद बढ़ावा मिला है। आज मजदूर भी एटीएम व पेटीएम का इस्तेमाल करना सीख गए हैं। नोटबंदी से भ्रष्टाचार कम हुआ है।
सनी चौधरी बिडियासर

 

पूराने नोट अच्छे थे
केन्द्र सरकार द्वारा लिया गया नोटबंदी का फैसला
पूरी तरह गलत साबित हुआ। इससे सिर्फ और सिर्फ लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। जिस उद्देश्य को लेकर नोटबंदी की गई वह भी पूरा नहीं हो पाया। पुराने नोटों की सीरिज नए नोटों से कहीं अच्छी थी। नोटबंदी से ई-पेमेंट को खास बढ़ावा नहीं मिला है।
मधु सरवाडिय़ा, सोनीवाड़ा नागौर


पूरी तरह गलत था फैसला
सरकार का नोटबंदी का फैसला पूरी तरह गलत रहा।
इससे ना तो भ्रष्टाचार कम हुआ और ना ही वो उद्देश्य पूरा हुआ जिसके लिए इसे लागू किया गया। लोगों को परेशानी के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा। हां ई-पेमेंट कुछ हद तक बढ़ा है। ई-पेमेंट सुविधाजनक भी है।
भोजराज सारस्वत, अध्यक्ष, कृषि मण्डी व्यापार मण्डल

कम नहीं हुआ भ्रष्टाचार
वैसे तो नोटबंदी का फैसला सही था, लेकिन जिस उद्देश्य से इसे लागू किया गया वो पूरा नहीं हो पाया। नोटबंदी का असर बाजार में अब भी देखा जा रहा है। जिसके चलते बाजारों में मंदी है। हां इससे ई-पेमेंट को कुछ हद तक बढ़ावा मिला है। अचानक से नोटबंदी का इतना बढ़ा फैसला लेने के बाद नहीं लगता कि सरकार भविष्य में दुबारा ऐसा चेगी।
दिलीप चाण्डक, भूतनाथ मंदिर


भ्रष्टाचार बढ़ा है
नोटबंदी छोटा व्यापार करने वालों के लिए पेरशानी का सबब बना रहा। नोटबंदी का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ। इसे लेकर सरकार ने पब्लिक को परेशान किया वह वहां का वहीं है। नोटबंदी से कैशलेश को कहीं हद तक बढ़ावा जरूर मिला है। नोटबंदी के बाद भ्रष्टाचार और ज्यादा बढ़ा है।
सुरेन्द्र गोदारा, खरनाल


नोटबंदी का फैसला सही था
नोटबंदी का फैसला सही था, लेकिन इसका उद्देश्य
पूरा नहीं हो पाया। अब नोटबंदी का कोई असर नहीं। इस सीरिज के नोटों से पुराने नोट कहीं अच्छे थे। नोटबंदी से ई-पेमेंट को खास बढ़ावा नहीं मिला है। ई-पेमेंट हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं है।
किशन शर्मा, सुराणा की बारी


सही था फैसला
नोटबंदी का फैसला सही था। जिस उद्देश्य से नोटबंदी की गई उसके लिए करीब 80 फीसदी सही साबित हुई। निजी बैंकों ने साथ नहीं दिया नहीं तो पूरा फैसला सही साबित होता। ईपेंट की बात करें तो यह बेहद सुविधा जनक है। इससे लाइनों में लगे बगैर व कहीं जाए बिना घर बैठे सारा काम हो जाता है।
हिम्मत सिंह, संजय कॉलोनी


नहीं थमा भ्रष्टाचार
नोटबंदी का फैसला सही था, जिस उद्देश्य को लेकर
यह कदम उठाया गया वो कुछ हद तक पूरा हो पाया। शुरुआती दौर में कुछ सुधार हुआ, लेकिन जैसे ही नए नोट बाजार में आए वैसे ही भ्रष्टाचार शुरू हो गया।
संगीता डागा, मेड़ताबाड़ी

Devendra Singh
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