पशु मेले में साल दर साल घट रहे नागौरी बैल

पशु मेले में साल दर साल घट रहे नागौरी बैल

Mukesh Kumar Sharma | Publish: Feb, 14 2016 08:17:00 PM (IST) Nagaur, Rajasthan, India

'नागौरी  बैलोंÓ की खरीद-फरोख्त के लिए विश्व प्रसिद्ध श्री रामदेव पशु मेला साल दर साल सिमटता जा रहा है।

नागौर। 'नागौरी  बैलोंÓ की खरीद-फरोख्त के लिए विश्व प्रसिद्ध श्री रामदेव पशु मेला साल दर साल सिमटता जा रहा है। पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मेले में आने वाले बैलों (गोवंश) की संख्या आधी रह गई है। इससे भी बुरी स्थिति मेले में बिकने वाले बैलों की है, मेले में आने वाले गोवंश की तुलना में बिकने वाले गोवंश की संख्या एक चौथाई तक सिमट गई है। मेले पर मंडरा रहे संकट का प्रमुख कारण गोवंश के परिवहन पर लगी रोक है, जिसके चलते बाहरी राज्यों से आने वाले पशुपालक व व्यापारी यहां का रुख ही नहीं करते। बिक्री नहीं होने के कारण स्थानीय पशुपालक भी अब मेले में पहले की बजाए कम आने लगे हैं।

वर्ष 2006 में रामदेव पशु मेले में जहां 22 हजार 134 पशुओं की आमद हुई थी, जिसमें से 10 हजार 813 गोवंश थे। वहीं वर्ष 2015 कुल पशुओं की संख्या घटकर 11 हजार 272 हो गई, इसमें गोवंश की संख्या 5 हजार 142 थी। एेसे ही वर्ष 2006 में बिकने वाले कुल पशु 12 हजार 655 थे, जिसमें गोवंश की संख्या 8 हजार 155 थी। वर्ष 2015 में बिकने वाले कुल पशुओं की संख्या 5 हजार 34 हजार रह गई, इसमें गोवंश की संख्या मात्र 2 हजार 647 थी।  दोनों आंकड़ों को देखें तो गोवंश की बिक्री में आई गिरावट स्पष्ट नजर आ रही है। दस साल पहले जहां गोवंश की बिक्री 65 प्रतिशत थी, वहीं गत वर्ष यह गिरकर 52 प्रतिशत रह गई।

ट्रेन परिवहन से मिल सकता है जीवनदान

इस बार बाहरी राज्यों से आए पशुपालकों व व्यापारियों का कहना है कि इस बार यदि उन्हें पशुओं के परिवहन के लिए ट्रेन की सौगात मिल जाए तो पशु मेले को जीवनदान मिल सकता है। व्यापारियों का कहना है कि आधे पशुपालक तो सिर्फ इसलिए नहीं आते, क्योंकि उन्हें रास्ते में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। यहां रुपए देकर पशु खरीदते हैं, ताकि खेती कर सके, लेकिन कुछ बदमाश लोग उन पर गो तस्करी का आरोप लगाकर मारपीट करते हैं। गाजियाबाद से आए पशुपालकों ने कलक्टर के नाम लिखे प्रार्थना पत्र में बताया कि वे गत वर्ष भी यहां बैल खरीदने आए थे और करीब सवा दो लाख रुपए की एक बैल जोड़ी खरीदी, लेकिन लौटते समय रास्ते में कुछ संगठनों के लोगों ने उनके साथ मारीपट की तथा बैलों को छुड़ा कर भगा दिया।

 इससे उन्हें पशुधन के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। मेरठ, गाजियाबाद सहित उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों से आए पशुपालकों ने कलक्टर से पशु परिवहन के लिए ट्रेन चलवाने की मांग की है।

अधिकारी कर रहे हैं प्रयास

कलक्टर के निर्देश पर पशुपालन विभाग के अधिकारी रेलवे अधिकारियों से मिलकर पशु परिवहन के लिए मालगाड़ी चलवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक सीआर मेहरड़ा ने बताया कि उन्होंने पशुपालकों का प्रार्थना पत्र मिलने के बाद रेलवे के स्थानीय अधिकारियों से बात की तथा 40 बोगी की मालगाड़ी चलवाने की मां रखी है।

कलक्टर ने डीआरएम को लिखा पत्र

पशुपालकों की मांग पर कलक्टर राजन विशाल ने जोधपुर रेलवे के डीआरएम को पत्र लिखकर सड़क मार्ग में आने वाली परेशानी से बचाने के लिए ट्रेन उपलब्ध कराने के लिए अनुरोध किया है। कलक्टर ने पत्र में बताया कि पहले पशु परिवहन के लिए रेल व्यवस्था होती रही थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह व्यवस्था बंद होने से पशुपालकों को रास्ते में काफी परेशानी होती है।

रामदेव पशु मेले यूं घटी गोवंश की आमद
वर्ष     - आमद
2006     - 10813
2007     - 9703
2008     - 10957
2009     - 11346
2010     - 9675
2011     - 11762
2012     - 9940
2013     - 9852
2014     - 7626
2015     - 5142

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