हमको उपज बिक्री की राशि मिलने में होती है लेतलाली, शासकीय योजनाएं भी नहीं पहुंचतीं

पत्रिका ने दुकानों पर मौजूद लोगों से चुनावी बाते साझा की

By: Lalit Saxena

Published: 15 Nov 2018, 08:02 AM IST

नागदा. शहर के चौराहे, चाय के ठिए व पानी की गुमटियों पर इन दिनों सिर्फ चुनाव को लेकर चर्चा है। कौन प्रत्याशी जीत का ताज पहनेगा। शहर को कौन-कौन से विकास की दरकार है। पत्रिका ने बुधवार ने शहर के व्यवस्तम मार्गों पर मौजूद चाय की दुकानों पर मौजूद लोगों से चुनावी बाते साझा की। लोगों का कहना है, कि प्रत्याशियों ने तूफानी तरीके से प्रचार शुरू कर दिया है, लेकिन अभी तक मैनिफेस्टों जारी नहीं किया है। बेरोजगारी, समर्थन मूल्य पर बेचे जाने वाली उपज की राशि में होने वाली देरी, शहर के व्यवस्तम मार्गों पर हो रही जाम की स्थिति को लेकर प्रत्याशी कुछनहीं बोल रहे हैं।
उपज की बिक्री के बाद राशि वितरण में ना हो लेतलाली
पाड्ल्या रोड स्थित आर्य गार्डन पर बैठे समूह के लोगों का तर्क है, कि शहर की उपज मंडी में पहुंचने वाले किसानों को सबसे अधिक परेशानी विक्रय होने के बाद उपज की राशि में होने वाली लेतलाली से किसानों को परेशान होना पड़ता है। इतना ही नहीं मंडी परिसर छोटा होने के कारण मंडी पहुंचने में किसानों को जाम की परेशानी से रूबरू होना पड़ता है। यदि वह उपज विक्रय के समय पहुंच भी गए तो उपज दूसरे दिन तुलने या बारदाने समाप्त होने का भय व्याप्त रहता है। चर्चा के दौरान जगदीश पांचाल, भगवान सिंह, जितेंद्र राठौर, चेतन नामदेव आदि मौजूद थे। उपस्थितों का कहना है कि क्षेत्र किसके बाहुल्य है, ऐसे में किसानों की परेशानी की ओर ध्यान देते हुए व्यवस्थाओं को सुधारना चाहिए।
शासकीय योजनाएं नहीं पहुंचती ग्रामीणों तक
महिदपुर रोड स्थित चाय की दुकान पर समीपस्थ ग्राम बैरछा के ग्रामीणों का तर्क है, कि शासन द्वारा अनेकों शासकीय योजनाएं निकाली जाती है। योजनाएं लोगों के हितों के लिए होती है, लेकिन उचित प्रचार-प्रसार के अभाव में योजनाएं आम लोगों तक नहीं पहुंच पाती। इतना ही नहीं यदि योजनाओं का लाभ कोई हितग्राही भूल चूक से लेने की कोशिश करता है, तो शासकीय मशीनरी उसे कागजों के अभाव में निराश कर देती है। उक्त चर्चा के दौरान कन्यालाल परिहार, मुकेश बामनिया, धर्मेंद परिहार आदि मौजूद थे। युवाओं का कहना है, कि चुनाव में प्रत्याशी रूप में खड़े जनप्रतिधि यदि शासकीय योजनाओं का लाभ प्रत्येक हितग्राहियों तक पहुंचाने की बेहतर कोशिश करें तो मतदाताओं को काफी हद तक लाभ पहुंचेगा।

Lalit Saxena
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