scriptImpact of pollution and illegal mining on Narmada river | अवैध खनन, प्रदूषण का असर- महाशीर और रोहूनरेन का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर | Patrika News

अवैध खनन, प्रदूषण का असर- महाशीर और रोहूनरेन का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर

- मछुआरे बोले नर्मदा में बीज डाले जाएं, ब्रीडिंग के समय मत्स्याखेट न हो
- कोलकाता की चीतल मछली चट कर रही छोटी मछलियां

नर्मदापुरम

Published: April 30, 2022 12:44:08 pm

नर्मदापुरम। मैं मछली हूं। नर्मदा के आंचल में मेरा घर है। जल को साफ करती हूं। पवित्र जल पीने को देती हूं। मेरा भी परिवार है, बच्चे हैं फिर मुझे क्यों पकड़ते हो, मेरी सांसें टूट रही हैं, मुझे क्यों मार रहे हो। ऐसे में मेरा अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। नर्मदा के तटों व घाटों किनारे देखकर मानो ऐसा लगता है जैसे मछलियां खुद यह कह रही हैं।

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जी हां, हम बात कर रहे हैं नर्मदा के मीठे पानी की महारानी बाड़स यानी महाशीर मछली की। लगातार हो रहे रेत के अवैध उत्खनन और प्रदूषण से जलीय जीवों पर संकट बढ़ रहा है। हालत ये है कि बाड़समहाशीर मछली भी विलुप्ति की कगार पर है। अब ये खास मछली नर्मदा में बहुत कम दिखाई दे रही है।

मछुआरे भी नहीं कर पा रहे महाशीर का संरक्षणसंवर्धन : जिले में 50 से 60 हजार मछुआरे हैं। ये भी चाहते हैं कि नर्मदातवा की मछलियों का संरक्षणसंवर्धन हो, लेकिन जिमेदार मत्स्य पालन विभाग के पास इसके लिए बारिश के पहले कोई कार्ययोजना ही तैयार नहीं है।

मांझीनिशाद सेना नर्मदापुरम के अध्यक्ष प्रदीप मांझी, संतोष मांझी, देव कहार, अमन कहार आदि का कहना है कि बाड़स के साथ रोहू और नरेन प्रजाति की मछली की संया भी भारी मात्रा में घट चुकी है। बड़े ठेकेदारों के डैम में बोरियों से पावडर डाल देने से भी मछलियां अचेतन होकर नीचे तल में चली जाती है। जो वापस ऊपर नहीं लौटती। इसलिए भी मछलियों का जीवन संकट में आ गया है।

संया घटी गायब: इसकी सप्लाई जिले से बाहर नहीं हो पा रही है। अब नर्मदा नदी में बाड़स सहित विशेष प्रजाति की रोहू, नरेन जैसी बड़ी और अच्छी मछलियां नहीं मिलतीं। इसके कारण मत्याखेट और इसके कारोबाररोजगार पर भी संकट पैदा हो गया है। जिले के मछुआरा परिवार बेरोजगार हो चुके हैं।

जिले में नर्मदातवा नदी में बड़े ठेकेदारों ने यहां कोलकाता से सिल्वर कलर की बड़ी चीतल मछलियां लाकर छोड़ दी है। ये मछली यहां की छोटी मछलियों को लगातार चट कर रही है। इससे भी मछलियों की संया में कमी आ रही है। इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी है।
जिले में मछलियों के संरक्षणसंवर्धन के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। आगामी बारिशकाल के प्रजननकाल में मत्स्याखेट पर सती से प्रतिबंध लगाया जाएगा। महाशीर की संया बढ़ाने के हैचरी (बीज उत्पादन केंद्र) बनाने की वृहद कार्ययोजना भी है
- राजीव श्रीवास्तव, सहायक संचालक मत्स्योद्योग विभाग नर्मदापुरम

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