scriptnagdwari yatra 2022 panchami madhya pradesh | साल में एक बार खुलता है नागलोग का रास्ता, दिखता है अमरनाथ जैसा नजारा | Patrika News

साल में एक बार खुलता है नागलोग का रास्ता, दिखता है अमरनाथ जैसा नजारा

नागद्वारी यात्राः हमेशा जंगली जानवर और जहरीले सांपों से घिरा रहता है यह इलाका, साल में सिर्फ एक बार खुलता है यह स्थान...।

नर्मदापुरम

Updated: July 23, 2022 04:50:29 pm

नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश में भी एक ऐसा स्थान है, जहां पर पहुंचकर अमरनाथ जैसा नजारा दिखाई देता है। यह दुनिया के खतरनाक इलाकों में से एक है। नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी में नागद्वारी (nagdwari yatra 2022) के नाम से यह स्थान है, जिसे लोग नागलोक भी कहते हैं। सालभर भर में सिर्फ 11 दिनों के लिए यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। सात दुर्गम पहाड़ों को पार करने के बाद यहां पहुंचना पड़ता है।

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patrika.com आपको बता रहा है पचमढ़ी में स्थित नागलोक की यात्रा के बारे में...।

पचमढ़ी की नागद्वारी की यात्रा काफी दुर्गम है। यहां पल-पल पर खतरा बना रहता है। 11 दिनों के बाद जब यह इलाका पूरा बंद हो जाता है तो यहां सिर्फ जंगली जानवर और जहरीले सांप-बिच्छू ही रहते हैं। यहां का खौफ इतना है कि कोई भी इंसान यहां अकेले जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। क्योंकि यहां हजारों की संख्या में सांप बिच्छू रहते हैं।

कुलदेवी मानते हैं महाराष्ट्र के लोग

यह महाराष्ट्र से आने वाले कई लोग अपना कुलदेव मानते हैं। पचमढ़ी के घने जंगल और दुर्गम पहाड़ों के बीच एक गुफा में है यह मंदिर। यह मंदिर नागपंचमी से पहले 10 दिनों के लिए ही खुलता है।

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सबसे अधिक रोमांचक है यह यात्रा

यह स्थान भोपाल से करीब 200 किलोमीटर दूर पचमढ़ी में है और पचमढ़ी से धूपगढ़ जाने वाले रास्ते से 12 किलोमीटर का दुर्गम रास्ते से यहां जाया जाता है। पहाड़ों पर चढ़ाई के शौकीन व्यक्ति इस स्थान के खुलने का इंतजार करते हैं। इस रास्ते पर कई झरने हैं और जड़ी-बूटियों के पेड़-पौधे भी मिलते हैं। यहां पर एक तरफ जिंदगी और एक तरफ मौत हमेशा साथ चलती है। कदम कदम पर खाई है।

अमरनाथ यात्रा जैसा नजारा

इस यात्रा पर जाने वाले बताते हैं कि इसके रोमांच और कठिन रास्तों के कारण यह अमरनाथ जैसी यात्रा महसूस होती है। यहां के बड़े-बड़े पहाड़ और गुफा का अद्भुत दृश्य देखकर लगता है जैसे हम अमरनाथ यात्रा ही कर रहे हों। कदम-कदम पर खतरा तो रहता ही है, लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच के लिए यह हमारी पहली पसंद है।

लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं

साल में एक बार खुलने वाला यह क्षेत्र श्रावण मास में खुलता है। नागपंचमी के बाद यह बंद हो जाता है। इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व होने के कारण यहां 11 दिनों में देशभर से दस लाख से अधिक लोग पहुंचते हैं।

11 दिन चलता है यह मेला

देशभर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र पचमढ़ी का नागद्वारी मेला शनिवार से शुरू हो गया। 11 दिवसीय मेले का समापन 3 अगस्त को होगा। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से दो लाख से ज्यादा भक्त आते हैं। कोरोना के कारण पिछले दो साल से मेले का आयोजन नहीं किया जा रहा था। लेकिन, इस साल प्रशासन ने भी इसे धूमधाम से मनाने के लिए तैयारी की है। शुक्रवार को कलेक्टर एवं एसपी ने पचमढ़ी पहुंचकर मेला स्थल के सभी पाइंटों का निरीक्षण किया। इस दौरान पचमढ़ी में साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।

प्लास्टिक पर रहेगा पूरी तरह बैन

मेले के दौरान पॉलीथिन व प्लास्टिक के उपयोग पर पाबंदी रहेगी। खानपान की दुकानों में निर्मित खाद्य सामग्री का प्रतिदिन नमूना लिया जाए। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने अधिकारियों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करे कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने सभी पॉइंट्स पर अधिकारियों को चाकचौबंद व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मेला अवधि में निर्धारित पॉइंट्स पर चिकित्सा की भी बेहतर व्यवस्थाएं की जाएं। मेडिकल टीम मेला अवधि के दौरान तैनात रहे।

श्रद्धालुओं की मदद के लिए होमगार्ड व पुलिस तैनात

मेला अवधि के दौरान शुद्ध पेयजल श्रृद्धालुओं का सुचारू रूप से उपलब्ध हो इसके लिए कलेक्टर ने लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। कलेक्टर ने होमगार्ड एवं पुलिस अमले को निर्देशित किया कि वे सभी निर्धारित पाइंटों पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे और श्रृद्धालुओं को पूर्ण सहयोग प्रदान करें।

सात पहाड़ों की खतरनाक चढ़ाई

पचमढ़ी को कैलाश पर्वत के बाद महादेव का दूसरा घर कहते हैं। सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी की घनी पहाडिय़ों के बीच देवस्थान है, जिसे नागलोक का मार्ग या नागद्वार कहा जाता है। पचमढ़ी में घने जंगलों के बीच यह रहस्यमयी रास्ता सीधा नागलोक जाता है। इस दरवाजे तक पहुंचने के लिए खतरनाक 7 पहाड़ों की चढ़ाई और बारिश में भीगे घने जंगलों की खाक छानना पड़ता है, तब जाकर आप नागद्वारी पहुंच सकते हैं।

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